Short Horror Stories in Hindi | 5 Darawni Kahani (2026)

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Short Horror Stories in Hindi पढ़ना पसंद है? आज हम आपके लिए 5 ऐसी डरावनी कहानियाँ लेकर आए हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगी। इन हिंदी हॉरर स्टोरीज़ में भूत-प्रेत, रहस्य और सस्पेंस का ऐसा मेल है जो आपको आखिरी तक बांधे रखेगा।

दीवार की परछाई | Short Horror Story in Hindi

एक सुनसान गाँव था – नाम था कालीझर। गाँव के किनारे एक पुराना, टूटा हुआ मकान था जिसे लोग “परछाई वाला घर” कहते थे। कहते थे कि जो भी रात में उस घर के पास जाता है, उसे अपनी ही परछाई अजीब हरकतें करती दिखाई देती हैं।

एक दिन शहर से आया राहुल उस गाँव में रहने लगा। उसे भूत-प्रेत जैसी बातों पर बिल्कुल विश्वास नहीं था। गाँव वालों ने उसे उस घर के बारे में चेतावनी दी, लेकिन राहुल हँसकर टाल गया।

एक रात राहुल ने सच जानने का फैसला किया। वह टॉर्च लेकर उस मकान के अंदर चला गया। मकान के अंदर बहुत सन्नाटा था। टूटी दीवारें, जाले और हवा की डरावनी आवाज़।

अचानक उसकी टॉर्च बंद हो गई।

राहुल ने मोबाइल की रोशनी जलाई… तभी उसने देखा सामने दीवार पर उसकी परछाई हिल रही थी।

लेकिन राहुल तो बिल्कुल स्थिर खड़ा था।

उसकी परछाई धीरे-धीरे हाथ उठाने लगी… जबकि राहुल के हाथ नीचे थे।

राहुल का दिल तेजी से धड़कने लगा।

परछाई ने धीरे-धीरे अपना सिर उसकी तरफ घुमाया… जैसे वह उसे देख रही हो।

फिर दीवार से अलग होकर वह परछाई जमीन पर उतर आई।

राहुल घबरा गया। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर जैसे जमीन से चिपक गए थे।

परछाई उसके पास आई और फुसफुसाई

“तुम्हें सच जानना था ना… अब तुम भी हमारे साथ रहोगे।”

अगली सुबह गाँव वालों ने देखा कि उस पुराने मकान की दीवार पर एक नई परछाई जुड़ गई है।

वह परछाई किसी और की नहीं… राहुल की थी।

और अजीब बात यह थी कि जब सूरज निकलता, तब भी वह परछाई दीवार से गायब नहीं होती थी। 🌑

आखिरी कॉल | Short Horror Story in Hindi

रात के लगभग 2 बजे थे। शहर की सारी सड़कें सुनसान हो चुकी थीं। अमित अपने कमरे में अकेला बैठा मोबाइल चला रहा था। तभी उसका फोन बजा।

स्क्रीन पर एक अनजान नंबर था।

अमित ने कॉल उठाई।

दूसरी तरफ से बहुत धीमी आवाज आई
“हेलो… क्या तुम मुझे सुन सकते हो…?”

आवाज बहुत डरावनी और टूटी-फूटी लग रही थी। अमित ने पूछा,
“कौन बोल रहा है?”

कुछ सेकंड तक चुप्पी रही… फिर वही आवाज आई
“मैं… तुम्हारे घर के बाहर हूँ…”

अमित थोड़ा घबरा गया। उसने खिड़की से बाहर झांका। सड़क पूरी तरह खाली थी।

अमित बोला, “यहाँ तो कोई नहीं है।”

फोन पर हल्की हँसी सुनाई दी…

फिर आवाज आई
“अभी पीछे मुड़कर देखो…”

अमित का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसके हाथ कांपने लगे।

धीरे-धीरे उसने पीछे मुड़कर देखा…

लेकिन कमरे में कोई नहीं था।

अमित ने राहत की सांस ली।

तभी फोन पर फिर से आवाज आई
“तुमने गलत जगह देखा…”

अमित डर गया। उसने पूछा, “तो कहाँ देखूं?”

फोन पर कुछ सेकंड की चुप्पी रही…

फिर आवाज फुसफुसाई

“मोबाइल की स्क्रीन में…”

अमित ने जैसे ही स्क्रीन की तरफ देखा…

उसके पीछे खड़ी एक भयानक परछाई स्क्रीन में दिखाई दे रही थी।

अमित ने तुरंत पीछे मुड़कर देखा…

लेकिन वहाँ फिर से कोई नहीं था।

डर के मारे उसका फोन हाथ से गिर गया।

जब उसने फोन उठाया… कॉल कट चुकी थी।

लेकिन कॉल हिस्ट्री में आखिरी कॉल के सामने सिर्फ एक शब्द लिखा था

“अंदर से…”

खिड़की वाला आदमी – short horror stories

एक छोटे से शहर में नेहा अपने नए किराए के फ्लैट में रहने आई थी। फ्लैट सस्ता था, लेकिन बहुत पुराना भी।

पहली रात सब कुछ ठीक था।

लेकिन दूसरी रात, करीब 3 बजे, नेहा की नींद अचानक खुल गई। उसे ऐसा लगा जैसे कोई उसे देख रहा हो।

उसने धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलीं…

कमरे में सब शांत था।

लेकिन जब उसने खिड़की की तरफ देखा, तो उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

खिड़की के बाहर एक आदमी खड़ा था

उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था, क्योंकि बाहर बहुत अंधेरा था।

नेहा डर गई, लेकिन उसने सोचा शायद कोई पड़ोसी होगा।

अगली रात…

फिर 3 बजे उसकी आँख खुली।

वह आदमी फिर से खिड़की के बाहर खड़ा था।

इस बार वह थोड़ा और पास था।

अब नेहा को उसका चेहरा थोड़ा दिखाई देने लगा…

लेकिन चेहरा बहुत अजीब था… जैसे किसी गुड़िया का टूटा हुआ चेहरा

डर के मारे नेहा ने तुरंत परदे बंद कर दिए।

सुबह होते ही उसने मकान मालिक को सब बताया।

मकान मालिक का चेहरा अचानक पीला पड़ गया।

उसने धीरे से कहा

“उस खिड़की के बाहर तो… पाँचवीं मंजिल से सीधा खाली हवा है… वहाँ खड़े होने की कोई जगह ही नहीं है…”

नेहा का गला सूख गया।

उस रात उसने तय किया कि वह खिड़की की तरफ नहीं देखेगी।

लेकिन ठीक 3 बजे

उसे अपने कमरे के अंदर से आवाज आई

“आज खिड़की के बाहर नहीं…

मैं अंदर हूँ…

आईने का सच – horror short story

रवि को पुराने सामान खरीदने का शौक था। एक दिन उसे एक पुराना, खूबसूरत आईना मिला। दुकान वाले ने उसे सस्ते में दे दिया, लेकिन जाते-जाते अजीब सी बात कही

“इस आईने में ज्यादा देर मत देखना…”

रवि हँस पड़ा और आईना घर ले आया।

पहले दिन सब सामान्य था।

लेकिन दूसरी रात, जब वह आईने के सामने खड़ा था, उसे लगा जैसे उसका प्रतिबिंब कुछ अलग कर रहा है।

रवि स्थिर खड़ा था…

लेकिन आईने में उसका चेहरा धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा था।

रवि डर गया। उसने तुरंत पीछे हटकर फिर से देखा सब सामान्य था।

उसने सोचा यह उसका भ्रम होगा।

तीसरी रात…

रवि ने फिर आईने में देखा।

इस बार उसका प्रतिबिंब उससे पहले ही आँख झपका गया।

रवि का गला सूख गया।

वह घबराकर पीछे हटने लगा…

लेकिन आईने में खड़ा “रवि” वहीं खड़ा रहा।

अब वह रवि को घूर रहा था।

फिर उसने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया…

और आईने के अंदर से बाहर आने लगा।

रवि चीखने ही वाला था कि अचानक कमरे की लाइट बंद हो गई।

कुछ सेकंड बाद जब लाइट वापस आई…

आईने के सामने अब सिर्फ एक ही रवि खड़ा था।

लेकिन असली कौन था…

यह कोई नहीं जानता।

लास्ट बस – short horror story

एक ठंडी रात में विकास देर तक काम करके घर लौट रहा था। सड़कें सुनसान थीं और आखिरी बस ही उसका सहारा थी।

कुछ देर बाद एक पुरानी सी बस आई, जिस पर लिखा था “लास्ट बस”

विकास जल्दी से उसमें चढ़ गया।

बस के अंदर अजीब सा सन्नाटा था। कुछ लोग बैठे थे, लेकिन कोई भी हिल नहीं रहा था। सबकी नजरें नीचे झुकी हुई थीं।

विकास को थोड़ा अजीब लगा, लेकिन वह पीछे की सीट पर बैठ गया।

बस चल पड़ी।

थोड़ी देर बाद उसने देखा कि कंडक्टर उसके पास आया… लेकिन उसने टिकट नहीं मांगा।

बस धीरे-धीरे एक सुनसान रास्ते पर मुड़ गई, जहाँ विकास ने पहले कभी रास्ता नहीं देखा था।

विकास घबरा गया। उसने कंडक्टर से पूछा
“ये बस कहाँ जा रही है?”

कंडक्टर ने धीरे से उसकी तरफ देखा… उसकी आँखें बिल्कुल सफेद थीं।

वह बोला
“जहाँ से कोई वापस नहीं आता…”

विकास का दिल जोर से धड़कने लगा।

उसने बाकी यात्रियों की तरफ देखा…

अब सभी धीरे-धीरे अपना सिर उठाकर उसे घूर रहे थे।

उनके चेहरे… बिल्कुल बेजान थे।

विकास चिल्लाया और बस से कूदने की कोशिश की।

जैसे ही उसने दरवाजा खोला…

बस के बाहर कुछ भी नहीं था सिर्फ गहरा अंधेरा।

अगली सुबह…

उस रास्ते पर लोगों को एक खाली सड़क मिली।

लेकिन सड़क के किनारे एक पुराना बस स्टॉप था…

जिस पर धूल में लिखा था

“लास्ट बस – सिर्फ एक तरफ का सफर”

by horrorstory.in

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