Category: Uncategorized

अँधेरे का निमंत्रण Part-3अँधेरे का निमंत्रण Part-3

अधूरी मुक्ति सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए अद्वैत ने तय कर लिया था—वह अब इस हवेली में एक रात भी नहीं रुकेगा। नीचे आँगन में पहुँचते ही उसने दरवाज़ा खोला।

अँधेरे का निमंत्रण Part-2अँधेरे का निमंत्रण Part-2

दर्पण के उस पार जब अद्वैत की आँख खुली, वह अपने ही बिस्तर पर था। खिड़की से सुबह की रोशनी अंदर आ रही थी। “सपना था…” उसने राहत की साँस

अँधेरे का निमंत्रण Part-1अँधेरे का निमंत्रण Part-1

वाराणसी की तंग गलियों में रात हमेशा थोड़ी लंबी लगती है। खासकर तब, जब गंगा के घाटों पर धुआँ देर तक ठहरा रहे और हवा में राख की महीन गंध