क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि कोई आपके आसपास है… लेकिन दिखाई नहीं देता ?
क्या कभी रात के सन्नाटे में आपको ऐसा लगा कि कोई आपको देख रहा है ? हमारे आसपास कई ऐसी घटनाएँ होती हैं, जिन्हें हम समझ नहीं पाते। कुछ लोग इन्हें महज़ भ्रम कहते हैं, तो कुछ इन्हें किसी अनदेखी शक्ति का संकेत मानते हैं।
आज मैं आपको एक ऐसी ही सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ, जिसे सुनकर शायद आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएँगे कि क्या वाकई आत्माएँ होती हैं…यह कहानी है “हास्टल वाला भूत” की…. short horror story in hindi
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एक शांत हॉस्टल की कहानी

हमारे गाँव के पास ही एक स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। इसकी गणना एक बहुत ही अच्छे शिक्षण संस्थान के रूप में होती है। दूर-दूर से बच्चे यहाँ शिक्षा-ग्रहण के लिए आते हैं।
7-8 साल पहले की बात है। बिहार का एक लड़का यहाँ हास्टल में रहकर पढ़ाई करता था। वह बहुत ही मेधावी और मिलनसार था। हास्टल में उसके साथ रहनेवाले अन्य बच्चे उसे विशुभाई – विशुभाई किया करते थे। एकबार की बात है कि वह अपने बड़े भाई की शादी में सम्मिलित होने के लिए 15 दिन के लिए गाँव गया। हास्टल के अन्य बच्चों ने उससे कहा कि विशु भाई जल्दी ही वापस आ जाइएगा।
15 दिन के बाद वह लड़का फिर से आकर हास्टल में रहने लगा। लेकिन अब वह अपने दोस्तों से कम बात करता था। यहाँ तक कि वह उनके साथ खाना भी नहीं खाता था और कहता था कि बाद में खा लूँगा। अब वह पढ़ने में भी कम रुचि लेता था। जब उसके साथवाले बच्चे उससे कुछ बात करना चाहते थे तो वह टाल जाता था।
वापसी के बाद बदला व्यवहार
वह दिनभर पता नहीं कहाँ रहता था और रात को केवल सोने के लिए हास्टल में आता था। घर से हास्टल में आए उसे अभी एक हप्ते ही हुए थे कि एकदिन उसके कुछ घरवाले हास्टल में आए। सबके चेहरे उदासीन थे। एक लड़का उन लोगों से बोल पड़ा कि विशु भाई तो अभी हैं नहीं, वे तो केवल रात को सोने आते हैं।
उस लड़के की बात सुनकर विशु के घरवाले फफककर रो पड़े और बोले वह रात को भी कैसे आ सकता है। हमलोग तो उसका सामान लेने आए हैं। अब वह नहीं रहा। हास्टल से जाने के दो दिन बाद ही वह मोटरसाइकिल से एक रिस्तेदार के वहाँ जा रहा था।

उसकी मोटरसाइकिल एक तेज आती ट्रक से टकरा गई थी और वह आन स्पाट ही काल के गाल में समा गया था। इतना कहकर वे लोग और तेज रोने लगे। हास्टल के जो बच्चे ये बात सुन रहे थे उन्हे ठकुआ मार गया था और उनके रोंगटे खड़े हो गए थे।
क्या वो सच में भूत था ?
वे बार-बार यही सोच रहे थे कि रात को जो लड़का उनके पास सोता था या जिसे वे देखते थे क्या वह विशुभाई का भूत था। खैर उस दिन के बाद विशुभाई का भूत फिर कभी सोने के लिए हास्टल में नहीं आया पर कई महीनों तक हास्टल के सारे बच्चे खौफ में जीते रहे और विशुभाई के रहनेवाले कमरे में ताला लटकता रहा।
लोग कहते रहे कि विशुभाई को अपने हास्टल से बहुत ही लगाव था इसलिए स्वर्गीय होने के बाद भी वे हास्टल का मोह छोड़ न सके। कहते हैं आज भी जो बच्चे विशुभाई के भूत के साथ सोते थे डरे-सहमे ही रहते हैं। यह घटना सही है या गलत; यह मैं नहीं कह सकता। क्योंकि मैंने यह घटना अपने क्षेत्र के कुछ लोगों से सुनी है। खैर भगवान विशुभाई की आत्मा को शांति और मोक्ष प्रदान करें।
समाप्त।
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