दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसी सच्ची और खौफनाक कहानी बताने जा रहा हूँ… horror story in hindi for reading
जिसे जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
यह कहानी है एक ऐसे श्रापित गाँव की… जहाँ कभी सब कुछ ठीक था, लेकिन एक औरत की ख्वाहिश ने पूरे गाँव को बर्बादी के रास्ते पर डाल दिया।
कहते हैं कि उस गाँव का एक कुआँ आज भी ज़हर बन चुका है…
और अमावस्या की रात वहाँ से आज भी डरावनी आवाजें आती हैं…
एक श्रापित गाँव की कहानी

यह कहानी एक डायन की है! काली डायन इस कहानी का नाम हे दोस्तों मैंने यह कहानी बनाकर नहीं लिखी यह कहानी एक सचमुच की घटना है जो की मैंने अपनी दादी से सूनी है और बहुत पुरानी है कुछ लोगों का मानना है की भूतों का कोई अस्तित्व नहीं होता है!
आप लोग जानते हैं भगवान् का अस्तित्व होता है है! तो भूतों का क्योँ नहीं सभी ने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों मैं पढ़ा या किसी से सुना होगा की भगवान् जब इस धरती पर थे तब भी भूत पिशाच हुआ करते थे भगवान् निराकार है!
निराकार का अर्थ होता है जिसका कोई आकर नहीं होता जो लोग जिस रूप मैं भगवान् को पूजते हैं भगवान् उसी रूप मैं उसे दिखाई देते हैं ! तो प्रेम से बोलिए भक्त और भगवन की जय और समय ब्यर्थ न करते हुए मैं आपको अपनी कहानी की और ले चलता हूँ बहुत पुरानी बात है तब पानी के ज्यादा शाधन नहीं हुआ करते लोग कुए बाबड़ी तालाब आदि से पानी पिया करते थे!
बांझ औरत का दर्द
तो यह कहानी भी एक तालाब की है! जो कि उस काली डायन के जादू से अमृत से ज़हर बन गया था! यह डायन कैसे बनी कैसे इस तालाब का पानी विष बन गया मैं यह कहानी आपको बताता हूँ!एक गाँव मैं एक औरत के कोई बच्चा नहीं था! वह औरत गांव के मुखिया की पत्नी थी उसके शादी को काफी समय हो गया था! सब लोग उसे बाँझ कहा करते थे!
सारे गाँव वाले उसका मुंह भी नहीं देखना कहते थे कहते थे कि इसका मुंह देख लिया तो पूरा दिन बेकार चला जायेगा पर मुखिया कि पत्नी थी इसलिए लोग थोड़ी बहुत बात चीत कर लिया करते थे!एक दिन गांव मैं एक फकीरा बाबा भिक्षा मांगते हुए आ पहुँचता है तो वह बतों ही बातों मैं उसका हाथ देखने लग जाता है!
और कहता है आपको बच्चा नहीं है ना वह बोली आपको कैसे पता चला वह बोला हम हस्त रेखा मैं निपुण है और हाथ देखकर यह बता सकते हैं कि क्या होने वाला है क्या होगा वह बोली अच्छा तो यह बताओ कि मेरे बच्चा कब होगा तो उसने कहा आपको भगवान् ने बच्चा तो नहीं दिया पर मैं एक रास्ता बताता हूँ!
काली बलि का खौफनाक सच

वह सुनो अमावस्या की रात को किसी एक ऐसे लड़के कि बलि पीपल के पेड़ के नीचे दो!जो अपने माँ बापके एकलोता पुत्र हो औरउसके खून से अपने बाल धोना फिर कहना ए प्यासी आत्माओ यह बलि मेरी तरफ से स्वीकार करो और मुझे एक पुत्र दे दो!
एक लोटे मैं उस कुए का पानी भर कर उस मैं उसके सरीर की दो बून मिला कर खुद पी लेना और उस लड़के के सिर के बाल अपनी साडी की गांठ मैं बंधे रखना तो युम्हे अवस्य एक पुत्र पैदा होगा इतना कहकर वह वहां से भिक्षा लेकर चला गया! उस दिन के ठीक तीन दिन बाद अमावश्या थी उस औरत ने वही किया जो उस बाबा ने बताया था उसने अपने देवरानी के लड़के कि बलि दे दी और खून की दो बूंदे पानी मैं मिलाकर खुद पी लिया और उस सिर के कुछ बाल को काटकर अपनी गांठ मैं बांध लिया और बिना पीछे मुड़े अपने घर आ गयी सुबह गांव बालों को पता चला कि मुखिए के भाई के बेटे को किसी ने मार के वहां फेक रखा है।
जब यह बात मुखिए और उसके भाई ने सूनी तो वह नंगे पैर दौड़ पड़े धीरे धीरे सारा गांव इकठ्ठा हो गया उस लड़के की माँ का रो रो बुरा हो गया था!तब किसी व्यक्ति ने हिम्मत जुटाकर उस सिर को धड से जोड़ा और उसे नदी मैं बहाने की सलाह दी वेसा ही किया लोगो ने उस लाश को पानी मैं बहा दिया!सब लोग यही कह रहे थे किसने किया यह सब कैसे हुआ सब लोगों केलिए यह घटना चिंता का विषय बन गयी थी! जब मुखिया घर पहुंचा तो क्या देखता है की उसकी पत्नी तो पकवान बना रही थी वह बड़ी खुश नज़र आ रही थी।
मुखिया ने क्रोध मैं कहा क्या तुम्हे इस बात का बिलकुल भी दुःख नहीं है की हमारे भाई का बेटा मर गया है वह पहले ऐसी नज़रों से देखी जैसे की उसे मार ही डालेगी फिर कहने लगी लड़का उसका मरा है मेरा नहीं मैं क्योँ शोक मनाऊँ और हसने लगी और कहने लगी तुम पागल हो तुम्हे तो खुस होना चैये की अब तुम्हारे भी एक पुत्र आने वाला है और यह जान कर और ख़ुशी होगी की वह इस जायदात का अकेला वारिस होगा हां हां हां वह फिर ऐसे हसी यह देखकर मुखिया से रहा नहीं गया और उसे जान से मारने के लिए तलवार उठाने चला गया।
गाँव में फैलता डर और आतंक

वह अन्दर तलवार ढून्ढ रहा था पर तलवार नहीं मिली! जब वह पत्नी के बेद के पास पहुंचा तो क्या देखता है की सारे कपडे खून से लथपत हैं और तलवार भी वही पडी है और उस पर खून लगा है वह यह सब देखते ही समझ गया की यह सब इसने पुत्र प्राप्ति केलिए बलि दी है उसने उसे मारने का विचार बनाया की अभी मैं इसको मार दूंगा तो सब लोग मुझे गलत समझेंगे!
और वह वहां से चला गया उस दिन से गाँव मैं ऐसी ऐसी घटना होने लगी किसी की भैंस मर गयी किसी ने उसे मार डाला और उस के सरीर के अंग इधर-उधर फैले पड़ेजैसे की किसी ने उसे नोच नोच कर खाया हो तो किसी दिन किसी का कुत्ता किसी का बछडा तो किसी की बकरी मर गयी और उसी तरीके से वह मर रही थी जिस तरीके भैंस को किसी ने मारा था ऐसी घटना से सारा गांव परेशान था।
किसी को यह समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है! एक दिन की बात है मुखिया रात को अपने गेट के पास सोया हुआ था आधी रात के समय उसे गेट खुलने की आवाज आई वह जाग गया उसने देखा की एक औरत बाल फिकरे हुए आधी रात को बहार चली जा रही है देखने मैं तो ऐसा लग रहा था की जैसे उसको कोई खींच कर ले जा रहा हो! भादों(अगस्त) की काली रात थी चरों तरफ से आवाजें आ रही थी कही शियार तो कहीं कुत्ते भोकते ऐसा लग रहा था उसे की जैसे यह रात जाने क्या क़यामत ढायेगी!
पीपल के पेड़ का डरावना राज़
अचानक उसे एक गाय के बछड़े के रंभाने की आवाज आई वह समझ गया हो न हो यही सारे गांव की बर्बादी का कारन हैं! मुखिया के दिमाग मैं एक आइडिया आया की क्योँ न मैं चलकर देखूं की यह कहाँ जाती है! वह उठकर चल दिया उसने आगे चल के क्या देखा कि पड़ोसी के गाय का बछड़ा का कटा हुआ मुंड पडा है और उसके धड को वह औरत खींचकर पीपल की और ले जा रही हे और ले जा कर उसने वही शब्द दोहराया यह लो प्यासी आत्माओ मैं तुम्हारे लिए भोजन लायी हूँ! मुखिया यह सब नीम के पेड़ से छुपकर देख रहा था!
एक दम वह क्या देखता है कि चार काली छाया वहाँ प्रकट हुई देखते ही देखते वह ऐसे भयानक सरीर मैं बदल गयी की उसे देखकर उसके सर्रीर के रोयें खड़े हो गए उनके ये बड़े-बड़े दांत लाल-लाल आंखें सरीर पूरा जला हुआ बड़े बड़े नाखून आंखें तो ऐसे चमक रहीं थी की बार-बार बदलने वाली लाइट जल रही हो इतना भयानक द्रश्य उसने अपनी ज़िन्दगी मैं कभी नहीं देखा था!
डायन का असली रूप सामने आया

वह क्या देखता है कि वो चरों भूत और उसकी पत्नी उस लाश को खाने लगी दोनों हाथों से लापा-लप जैसे की कोई भूखा व्यक्ति खाने पर टूट पड़ता है!यह सब देखकर मुखिया के पर के नीचे की ज़मीन खिशक गयी की उसकी पत्नी एक डायन है!
जब उन्होंने सारे मांश को नोच-नोच कर खा डाला तब उसने एक भूतों की एक बात सूनी और कहा की बस तीन दिन बाद फिर अमवस्या है और हमारी शक्ति उस दिन बढ़ जायेगी तब हम तुम्हे पुरी शक्ति शोंप देंगे और तुम अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकती हो तुम गांव वालों को अपनी उंगली पर नाचा सकती हो!उसने यह सब सुनकर सारे गाँव को चोरी-चोरी जगा करके कहा देखो मैं तुम्हे बताता हूँ की तुम्हारी बर्बादी एक डायन की वजह से हुई है! और सब से कहा की अपनी अपनी लाठी उठाओ और चलो मेरे साथ आज उस डायन का अंत हम सब मिलकर करेंगे! और सब भागते हुए उस पीपल की और चल दिए सारे गांव को अपनी तरफ आते देख सारे भूत तो गायब हो गए पर वह डायन खडी रह गयी!
मुखिया की पत्नी को इस हालत मैं देखकर सारे गांव वालों के तो होश उड़ गए और वह रुक गए मुखिया ने कहा खड़े क्योँ रह गए यह तुम्हारी मालकिन नहीं डायन है डायन और यह बोलते हुए सब उसे लाठियों से मारने लगे वह अपनी जान बचाकर भागी और भागते हुए उस कुए मैं जा गिरी उसकी साडी ऊपर अटक गयी और वह चिल्लाने लगी बचाओ बचाओ सारे गांव नव कहा इसे सजा अपने आप मिलेगी लटकी रहने दो इसे वह चिल्लाती रही सारे लोग उसका यह तमाशा देख्र रहे थे!
वह चीखती रही चिल्लाती रही मुझे ऊपर निकालो मुझे पानी पिलाओ पर किसी ने उसकी सहायता नहीं की पर वो बार-बार यही बोलती रही कि मैं तुम सब गांव वालों को बर्बाद कर दूंगी!
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Coming Soon Ending
लेकिन… कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
जिसे गाँव वालों ने खत्म समझ लिया था… वो असल में एक नई शुरुआत थी।
कुएँ में दबी वो चीखें आज भी ज़िंदा हैं…
काली डायन Part-2 जल्द ही आएगा… horror story in hindi for reading
जहाँ सच और भी ज्यादा डरावना होगा।
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