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आखिरी बस राघव को उस शहर में नौकरी करते हुए लगभग दो साल हो चुके थे। रोज़ की तरह उस दिन भी वह शाम की आखिरी बस से घर लौट रहा था। यह कोई सुनसान या पहाड़ी इलाका नहीं था।…

अगर किसी गाँव में हर रात ठीक 1:13 बजे एक सूखे तालाब से पानी अपने आप भरने लगे…. और फिर उसमें से कोई बाहर निकलकर पूरे गाँव में घूमे…. तो क्या आप उस गाँव में एक रात भी रुक पाएँगे…

यह कहानी आपको आधी रात के उस सुनसान बस स्टॉप पर ले जाएगी, जहाँ एक रहस्यमयी बस हर अमावस्या को सिर्फ़ एक ज़िंदा यात्री को अपने साथ ले जाती है। आखिर उस बस में बैठी लाल साड़ी वाली औरत कौन…

कुछ गाँव ऐसे होते हैं जहाँ रात का अँधेरा सिर्फ़ सूरज के डूबने से नहीं आता….. बल्कि किसी के लौट आने से आता है। मैंने हमेशा भूत-प्रेत की कहानियों को अंधविश्वास समझा था। मेरा नाम विवेक शर्मा है। मैं पेशे…