काली डायन Part-1- Horror story in hindi for reading में आपने देखा कि कैसे एक औरत अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिए हैवानियत की सारी हदें पार कर देती है और अंत में उसे भयानक सजा मिलती है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
उसकी मौत के बाद भी उसका खौफ खत्म नहीं हुआ। कहते हैं कि कुछ आत्माएं मरने के बाद भी शांति नहीं पातीं, और वही हुआ इस गाँव के साथ। उस डायन की आत्मा वापस लौट आई और इस बार उसका बदला और भी ज्यादा खतरनाक था।
गाँव का पानी सूखने लगा, कुएँ से अजीब आवाजें आने लगीं, और जो भी उस पानी को पीता… उसका अंजाम बेहद डरावना होता। पूरा गाँव डर और मौत के साये में जीने लगा।
क्या सच में वह काली डायन वापस आ चुकी थी?
क्या कोई इस भयानक श्राप से गाँव को बचा पाएगा?
जानने के लिए पढ़िए काली डायन Part-2, horror story in hindi for reading एक ऐसी डरावनी कहानी जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी…
डायन का भयानक श्राप

एक एक को मैंने पानी के लए नहीं तर्शाया तो मेरा नाम भी काली डायन नहीं! यही नाम दिया हैं तुमने मुझे मैं तुम्हीं छोडूंगी नहीं दो दिन तक उसकी लाश यूंही लटकती रही तीसरे दिन अमावस्या थी उस दिन की रात के बाद उस लाश का पता नहीं चला की कहाँ गयी उसकी लाश जबकि कुआ बिलकुल सूखा था! उस बात को काफी टाइम हो चुका था लोग उसके बारे मैं भूल चुके थे कुछ दिन बाद ऐसी ऐसी खबर सुनने मैं मिली की उस कुए से आवाजें आती है
कभी वही बात सुनाई पड़ती की मैं तुम लोगो को पानी के लिए तडपा दूंगी और कभी रात मैं मन्त्रों की आवाजें आती लोग उस राज़ को समझ रहे थे कि उसका जब तक शरीर नहीं जल जाता तबतक उसकी आत्मा भटकती रहेगी !
कुछ दिनों बाद गांव के कुए का अचानक पानी सूख गया तो वो लोग परेशान हो गए कुछ इनो बाद क्या देखते हैं की जिस कुए मैं वह मारी थी वह पानी से भर गया है! यह आश्चर्य देखते हुए कुछ लोगों ने कहा क्या पता है की उसी ने यह सब किया हो कुछ लोग कह रहे थे की उस बात को बहुत समय हो गया है अब वो यहाँ कहाँ राखी है और कहा चलो पानी इसी से खीच के पिया करेंगे!सुबह जब कुछ लोगों ने कहा चल कर पानी खींचते हैं।
कुएँ से आने लगी डरावनी आवाजें

जब कुए के पास पहुंचे तो कुए मैं पानी नही यह सब देखकर लोग आश्चर्य मैं पड़ गए की पानी गया कहाँ तब उसमें से अजीब आवाज आई कहा था न पानी के लिए तडपा दूंगी मुझे पानी नहीं पिलाया था तुम लोगो ने हा हा हा हा अब मैं तुम सबको पानी के लिए ही नहीं खाने के लिए भी मुंहताज कर दूंगी यहाँ अब कभी पानी नहीं बरसेगा हा हा हा हा अब गाँव वाले परेशान हो गए उनके पास पानी ख़तम हो गया था।
दुसरे गांव से पानी लाना पड़ता था पानी न बरसने के कारण वह कुआ भी सूखने लगा तब उस गाँव के मुखिया ने भी उन्हें पानी भरने के लिए मन कर दिया और कहा तुमने जो किया है उसके लिए हम क्योँ दुःख झेलें जाओ !
जहर बन गया कुएँ का पानी
अब उसे भुगतो! कभी कुए मैं पानी आ जाता तो कभी नहीं जब गांव वाले प्यास से परेशान हो गए तो कुछ लोग ने उस से पानी खींच लिया और उसे जैसे ही पिया तो उसका सरीर पूरी तरहसड गया किसी को चरम रोग हो गया किसी के हाथ पैर गलना सूरू हो गए।
यह भयानक द्रश्य देखकर और लोगो ने तो उसे छुआ तक नहीं अब गाँव वालों की बुरी दशा हो गयी सब लोग भगवान् को याद करने लगे है भगवन यह सब किस जन्म के पापों की सजा दे रहा है।
तू बस चरों तरह हा हाकार मच गयी!उस दिन से गांव मैं तो जैसे मातम सा छा गया हो! दुसरे दिन सुबह मैं उस गांव से एक बाबा आता हुआ नज़र आया सफ़ेद वस्त्र माथे पे तिलक हाथ मैं कमंडल एक हाथ मैं माला बस राम का नाम लेते हुए चले आ रहे थे !
रहस्यमयी बाबा का आगमन
सब गांव वालों ने उस बाबा को आते देख सब लोग उनके चरणों मैं गिर पड़े और कहने लगे बाबा हमे इस संकट से बचालो! बाबा ने कहा क्या बात है आप सारे गांव वाले इतने परेशान क्योँ हो तब बाबा को मुखिया ने सारी बात बताई तब बाबा ने कहा की मैं तुम्हारी इस काम मैं अवस्य मदद करूंगा और कहा।
मैं कल अपने शिष्य विराट को ले कर आऊँगा क्योँ की इस काम के लिए मुझे एक सदभाव और ईश्वर पर विश्वास करने वाले व्यक्ति की ज़रुरत हे और वह बुद्धि मैं भी निपुण है! आप लोग धेर्य रखिये मैं अवश्य वापस आऊँगा यह कह कर बाबा वहां से चले गए दुसरे दिन सूर्य उदय होने से पहले वह अपने शिष्य विराट के साथ उस गांव मैं पहुँच गए !
सब लोगो ने बाबा को प्रणाम किया बाबा ने कहा की कुछ लोग जा कर पूजा का सामन ले कर आओ मैं यहाँ पर हवन करूंगा और अपने शिष्य से कहा की तुम इस कुए मैं अन्दर जा कर उस डायन का अंत करोगे और
डायन के अंत की तैयारी
अमीन तुम्हे कुछ ध्यान मैं रखने वाली बाते बताता हूँ कि इस कुए मैं उतरने से पहले तुम्हे सच्चे मन से भगवान् का स्मरण करके बिना मुंह मैं पानी जाये हुए नीचे पहुंचना पड़ेगा और तुम्हें इस कुए की गहराई यानी पातळ तक पहुँचाना पड़ेगा ध्यान रहे यह काम सूरज डूबने से पहले ख़तम करना पडेगा क्यूंकि दिन के डूबते ही बुरी आत्माओ की शक्ति बढ़ जाती है!ध्यान रहे की सबसे पहले डायन के बाल काटने हैं।
जिससे वह कमजोर पड़ जायेगी जब वह पूरी तरह से कमजोर पड़ जाए तब भगवान् का नाम लेकर यह खंज़र जो मैं तेरे को दे रहा हूँ इससे उसको मार देना और उसके सरीर को जला देना और मैं यहाँ यज्ञ करके तुम्हारी मदद करूंगा! उनका शिष्य तो समझ गया पर कुछ गाँव वालों ने पुछा बाबा इस कए मैं पानी मैं कैसे उसकी लाश को जलाओगे तब बाबा ने बताया कि वह पाताल लोक मैं अपने घरों की तरह रह रही है वहां भी आत्माओ और भूत प्रेतों के घर हुआ करते हैं!तब गाँव वालों को समझ मैं आया!बाबा ने अपने शिष्य से कहा की अब देर मत करो तुम जल्दी जाओ! तब उनका शिष्य ने भगवान् का नाम लेकर उस कुए मैं कूद गया !
और इधर बाबा मन्त्रों से यज्ञ करने लगे!जब विराट वहां पहुंचा तो क्या देखता है काफी बड़ा खंडर है और कहीं से मन्त्रों की आवाजें आ रही हैं तो वो वह जाकर क्या देखता की एक बाल फकेरे हुए एक औरत आहुत्ति आग मैं दीये जा रही है! जैसे ही वह उसके पास पहुंचा तो उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़कर देख के बोली कौन हो तुम और यहाँ क्योँ आये हो वह बोला मैं विराट हूँ और गांव वालों की तरफ से मैं तुम्हें यहाँ मारनेके लिए आया हूँ !
डायन से आमना-सामना

वह हँसी हा हा हा हा तुम मरोगे मुझे साधारण मनुष्य गांव वालों ने तुझे भेजा और तू मरने चाला आया लौट जा और अपने प्राण बचा ले मुझसे नहीं तो वह बोला नहीं तो क्या मुझे मार डालोगी वह बोली समझदार हो वह बोला तू अपने प्राण बचाना चाहती है तो इस गांव और इस कुए को छोड़कर चली जाओ नहीं तो मुझे मारना होगा !
उसने इतना कहकर जैसे ही उसके ऊपर उसे मारने को झपटा वह एक दम गायब हो गई और उसका बार खाली निकल गया अब बस उसे उसकी आवाज सुनाई दे रही थी अब वह क्या करे उसके पीछे से उसे एक बार उसने उसे ऐसा मारा की उसका सिर दीवार से टकराया और बेहोश हो गया तभी उसे उसके गुरु की आव्वाज सुनाई दी बेटे अपनी आत्मा की शक्ति से देख और भगवान् क्या ध्यान लगा तुझे सब कुछ नज़र आएगा !
उसने भगवान् का ध्यान करके आंखें खोली तो उसे वह डायन दीवार से छुपी हुई नज़र आई और उसके बाल दिख रहे थे तभी उसको गुरु की बात का ध्यान आया तो उसने झट से उसके बाल काट दिए और वह झट से उसको मारने के लिए खंज़र उठाया तो वह गिडगिडाने लगी की तुम आदमी हो मैं औरत और मैं निहत्थी हूँ।
अंतिम वार और डायन का अंत

तुम मुझे छोड़ दो और रोने लगी बाल काटने से उसकी सारी शक्ति कमज़ोर पड़ गयी पहले तो उसे उस पर दया आई पर जब गाँव वालों के दुःख को याद किया तो उसने देर न करते हुए वह खंज़र उसके सीने के बीच उतार दिया और उस अग्नि कुंड मैं उसके शरीर को जला दिया उसकी आत्मा चीखती चिल्लाती हुई मैं वापस आऊँगी मैं वापस आऊँगी उस कुए से ऊपर से निकल गयी जब गांव वालों ने वह आत्मा देखी तो वह लोग डर गए तब बाबा ने कहा अब कोई डरने की बात नहीं है।
अब इसका शरीर खत्म हो चुका है!अब यह तुम्हारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती तभी विराट कुए से बाहर आया तब गांव वालों ने उस बधाई दी और कहा की अगर तुम ना होते तो पता नहीं हमारा क्या होता तब विराट ने कहा यह सब तो भगवान् की कृपा है!तब बाबा ने गांव वालों से कहा अब तुम ख़ुशी ख़ुशी से इस कुए का पानी पी सकते हो! सभी गांव वालों ने पानी पिया और बाबा का आदर सत्कार किया !
तभी जोर-जोर से बादल हुए और पानी बरसने लगा और गांव वाले ख़ुशी से झूम उठे तब उस गांव मैं फिर से खुशहाली छा गयी! दोस्तों तो यह थी काली डायन की कहानी यह तो आपको पता होगा कि आप लोगों को कैसी लगी! पर मनुष्य एक ख़ुशी के लिए इतनी हथ्याएँ करे तो वह ख़ुशी नहीं खुद-ख़ुशी है क्यों कि ऐसे लोगों को भगवान् भी अपनी शरण भी नहीं देता! क्या पता वह बाबा जी ही भगवान् ही बन कर आये हों।
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इस तरह आखिरकार उस काली डायन का अंत हो गया और गाँव एक भयानक श्राप से मुक्त हो सका। बारिश के साथ जैसे पूरे गाँव की खुशियाँ भी लौट आईं और लोग फिर से सामान्य जीवन जीने लगे।
लेकिन जाते-जाते वह डायन एक ऐसी चेतावनी दे गई, जिसने हर किसी के मन में डर बैठा दिया “मैं वापस आऊँगी…”
क्या सच में उसका अंत हो गया था, या यह किसी नए खतरे की शुरुआत थी? यह सवाल आज भी लोगों के मन में है।
यह कहानी हमें एक गहरी सीख भी देती है।
इंसान अगर अपनी इच्छाओं के लिए गलत रास्ता चुनता है, तो उसका अंजाम सिर्फ उसका नहीं, बल्कि पूरे समाज को भुगतना पड़ता है।
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