गाँव के बाहर एक पुराना श्मशान घाट था, जहाँ रात होते ही कोई जाने की हिम्मत नहीं करता था। लोग कहते थे कि वहाँ एक रहस्यमयी इंसान रहता है, जिसकी लाल आँखें अंधेरे में चमकती हैं और जो जलती चिताओं के बीच दिखाई देता है। अजय इन बातों को सिर्फ अंधविश्वास मानता था, लेकिन एक रात उसने अपनी आँखों से जो देखा, उसने उसकी पूरी जिंदगी बदल दी। आखिर कौन था वो श्मशान वाला इंसान? एक साधारण इंसान, खतरनाक तांत्रिक या फिर मौत से लौटकर आई कोई भयानक आत्मा ?
Table of Contents
रात के लगभग ग्यारह बज रहे थे। आसमान में बादल इस तरह फैले हुए थे जैसे किसी ने काली चादर पूरी दुनिया पर डाल दी हो। हवा में अजीब-सी ठंडक थी और दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ बार-बार माहौल को और डरावना बना रही थी। गाँव के लोग इस समय अपने घरों में बंद हो चुके थे, क्योंकि इस गाँव में एक ऐसी जगह थी। जहाँ रात होते ही कोई जाने की हिम्मत नहीं करता था। गाँव के बाहर पुराना श्मशान घाट।
उस श्मशान घाट के बारे में कई कहानियाँ मशहूर थीं। लोग कहते थे कि वहाँ एक इंसान रहता है जो इंसान कम और परछाई ज्यादा लगता है। उसका चेहरा कभी साफ दिखाई नहीं देता, लेकिन उसकी लाल आँखें अंधेरे में चमकती रहती हैं। बच्चे उसे “श्मशान वाला इंसान” कहते थे। कोई नहीं जानता था कि वह कौन है, कहाँ से आया है, और आखिर हर रात जलती चिताओं के बीच क्या करता है।
गाँव में रहने वाला अजय इन बातों पर विश्वास नहीं करता था। वह शहर में पढ़ाई कर चुका था और खुद को बहुत समझदार मानता था। जब भी गाँव वाले श्मशान वाले इंसान की बात करते, वह हँसकर कहता, ये सब अंधविश्वास है। कोई आदमी होगा जो लोगों को डराता होगा।
लेकिन अजय को यह नहीं पता था कि कुछ सच्चाइयाँ इतनी डरावनी होती हैं कि इंसान उन्हें जानने के बाद पहले जैसा नहीं रह पाता।
एक दिन गाँव में अचानक एक बूढ़े आदमी की मौत हो गई। रात होने से पहले उसकी अंतिम यात्रा निकली और लोग उसे लेकर श्मशान घाट पहुँचे। अजय भी उनके साथ गया। उस दिन मौसम कुछ ज्यादा ही खराब था। तेज हवा चल रही थी और आसमान में बिजली चमक रही थी।
जब चिता को आग दी गई, तभी अचानक अजय की नजर दूर खड़े एक आदमी पर पड़ी। वह काले कपड़ों में था और उसके लंबे बाल हवा में उड़ रहे थे। वह बिल्कुल स्थिर खड़ा था। जैसे किसी चीज़ का इंतजार कर रहा हो।
वो कौन है….. अजय ने पास खड़े रमेश से पूछा। रमेश का चेहरा डर से पीला पड़ गया। उसने धीमी आवाज़ में कहा उधर मत देख वही है……. श्मशान वाला इंसान। अजय मुस्कुराया। डरपोक हो तुम लोग। लेकिन अगले ही पल बिजली चमकी और उस आदमी का चेहरा साफ दिखाई दिया। उसका चेहरा राख से ढका हुआ था, होंठ काले पड़ चुके थे और आँखें इतनी लाल थीं जैसे उनमें आग जल रही हो।
अजय का दिल एक पल के लिए रुक गया। उसने फिर ध्यान से देखा लेकिन वह आदमी गायब हो चुका था। उस रात अजय को नींद नहीं आई। बार-बार उसे वही लाल आँखें याद आ रही थीं। उसने खुद को समझाने की कोशिश की कि यह उसका भ्रम था लेकिन दिल के किसी कोने में डर पैदा हो चुका था।
करीब आधी रात को अचानक उसके कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई। तेज हवा अंदर आने लगी। अजय उठा और खिड़की बंद करने गया। तभी उसकी नजर बाहर पड़ी। घर के बाहर अंधेरे में कोई खड़ा था। वही लंबा आदमी।

अजय का गला सूख गया। उसने तुरंत खिड़की बंद कर दी। उसके हाथ काँप रहे थे। वह धीरे-धीरे पीछे हटने लगा। तभी उसे अपने कमरे के दरवाजे के बाहर किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी। ठक…… ठक….. ठक…..।
कदमों की आवाज़ धीरे-धीरे उसके दरवाजे के पास आकर रुक गई। पूरा कमरा सन्नाटे में डूब गया। फिर अचानक दरवाजे पर तीन बार जोर से दस्तक हुई। धड़ाम ! धड़ाम ! धड़ाम !अजय डर के मारे जम गया। उसने हिम्मत करके पूछा क…….. कौन है ?
बाहर से कोई जवाब नहीं आया। कुछ देर बाद फिर वही दस्तक हुई लेकिन इस बार और भी जोर से। अजय ने काँपते हुए दरवाजा खोला। बाहर कोई नहीं था। सिर्फ जमीन पर राख फैली हुई थी। अगले दिन अजय सीधे गाँव के सबसे बूढ़े आदमी हरिनारायण बाबा के पास पहुँचा। बाबा गाँव की हर पुरानी कहानी जानते थे।
अजय ने उनसे पूछा बाबा ये श्मशान वाला इंसान कौन है ? बाबा कुछ देर चुप रहे। फिर उन्होंने गहरी साँस ली और बोले बहुत साल पहले उस श्मशान में एक तांत्रिक रहता था। उसका नाम भैरवनाथ था। लोग कहते हैं कि वह मौत को हराना चाहता था। उसने काले जादू की साधना शुरू कर दी। रात-रात भर वह जलती चिताओं के बीच बैठकर मंत्र पढ़ता था।
अजय ध्यान से सुनने लगा। बाबा आगे बोले एक रात उसने अमर होने की कोशिश की। लेकिन उसकी साधना गलत हो गई। अचानक आग भड़क उठी और वह उसी चिता में जलकर मर गया। मरने से पहले उसने कहा था मैं वापस आऊँगा……. और इस श्मशान को कभी नहीं छोड़ूँगा।
अजय के शरीर में सिहरन दौड़ गई। तब से लोग कहते हैं कि उसकी आत्मा वहीं भटकती है। जो भी उसे देखने की कोशिश करता है। वह धीरे-धीरे मौत के करीब पहुँच जाता है। अजय ने हँसने की कोशिश की लेकिन उसकी आवाज़ कमजोर पड़ चुकी थी। उस रात उसने तय किया कि वह इस रहस्य का अंत करके रहेगा।
करीब बारह बजे वह टॉर्च लेकर अकेला श्मशान घाट की ओर निकल पड़ा। रास्ता सुनसान था। पेड़ों की परछाइयाँ जमीन पर ऐसे हिल रही थीं जैसे कोई उसके पीछे-पीछे चल रहा हो। श्मशान घाट पहुँचते ही उसकी नाक में जली हुई लकड़ियों और राख की गंध भर गई। चारों तरफ घना अंधेरा था। कहीं-कहीं पुरानी अधजली चिताएँ दिखाई दे रही थीं। अजय धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा।
तभी उसे किसी के मंत्र पढ़ने की आवाज़ सुनाई दी। ॐ काल…… महाकाल…….. उसकी धड़कन तेज हो गई। आवाज़ श्मशान के बीचों-बीच बने पुराने मंदिर की तरफ से आ रही थी। अजय ने टॉर्च की रोशनी उधर डाली। मंदिर के सामने वही आदमी बैठा था। उसके चारों तरफ इंसानी खोपड़ियाँ रखी हुई थीं। वह आँखें बंद करके मंत्र पढ़ रहा था। अचानक उसकी आवाज़ बंद हो गई।
धीरे-धीरे उसने अपनी गर्दन घुमाई। उसकी लाल आँखें सीधे अजय पर टिक गईं। अजय के हाथ से टॉर्च गिर गई। वह आदमी उठ खड़ा हुआ। उसकी लंबाई लगभग सात फुट थी। उसके शरीर से धुएँ जैसी काली परछाइयाँ निकल रही थीं।
तू यहाँ क्यों आया है। उसकी आवाज़ इंसानी नहीं लग रही थी। अजय पीछे हटने लगा। त…. तुम कौन हो ? वह आदमी हँसा। उसकी हँसी इतनी भयानक थी कि पूरा श्मशान गूँज उठा। लोग मुझे श्मशान वाला इंसान कहते है। अचानक हवा बहुत तेज चलने लगी। चिताओं की राख उड़कर आसमान में फैल गई। अजय ने भागने की कोशिश की लेकिन उसके पैर जैसे जमीन से चिपक गए थे।
श्मशान वाला इंसान धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। तुझे सच जानना है उसने पूछा। अजय कुछ बोल नहीं पाया। वह आदमी उसके बिल्कुल पास आ गया। उसके शरीर से जलने की बदबू आ रही थी। मैं कभी इंसान था उसने कहा। लेकिन मौत ने मुझे अपना बना लिया। अचानक अजय को अपने आसपास अजीब-अजीब आकृतियाँ दिखाई देने लगीं। धुएँ से बने चेहरे, रोती हुई औरतें, जलते हुए लोग……. जैसे हजारों आत्माएँ श्मशान में घूम रही हों।
अजय डर से चीख पड़ा। तभी श्मशान वाला इंसान बोला ये सब वो लोग हैं जो यहाँ जलाए गए। उनकी आत्माएँ अभी भी शांति नहीं पा सकीं। अजय ने काँपते हुए पूछा तु….तुम चाहते क्या हो। उसकी आँखों में अचानक दर्द दिखाई दिया।
मुक्ति………..
अजय हैरान रह गया। श्मशान वाला इंसान बोला मैं इस श्मशान से बंध चुका हूँ। हर रात मुझे इन आत्माओं की चीखें सुननी पड़ती हैं। कोई मुझे इस श्राप से मुक्त नहीं कर सकता।अचानक जमीन हिलने लगी। मंदिर की दीवारों पर दरारें पड़ गईं। हवा में चीखों की आवाज़ गूँजने लगी। भाग जा यहाँ से श्मशान वाला इंसान अचानक चिल्लाया।
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। श्मशान की जमीन से काले हाथ बाहर निकलने लगे। वे हाथ अजय के पैरों को पकड़ने लगे। अजय जोर-जोर से चिल्लाया और खुद को छुड़ाने की कोशिश करने लगा। श्मशान वाला इंसान दर्द से तड़पने लगा। उसकी आँखों से खून बहने लगा।
ये आत्माएँ किसी को जिंदा नहीं जाने देंगी। अजय ने पूरी ताकत लगाकर खुद को छुड़ाया और भागने लगा। पीछे से उसे सैकड़ों लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं। वह बिना पीछे देखे दौड़ता रहा। अचानक उसका पैर फिसला और वह जमीन पर गिर पड़ा। उसकी नजर सामने गई और उसका खून जम गया। सामने दर्जनों जले हुए लोग खड़े थे। उनकी आँखें खाली थीं और शरीर से धुआँ निकल रहा था।
वे धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगे। अजय रोने लगा। उसे लगा अब वह बच नहीं पाएगा। तभी अचानक पीछे से तेज आवाज़ आई रुको श्मशान वाला इंसान वहाँ आ चुका था। उसने दोनों हाथ आसमान की तरफ उठाए और जोर से मंत्र पढ़ने लगा। उसकी आवाज़ इतनी तेज थी कि पूरा श्मशान काँपने लगा। धीरे-धीरे वे सारी आत्माएँ पीछे हटने लगीं। हवा में आग की लपटें उठने लगीं। श्मशान वाला इंसान अजय की तरफ मुड़ा।

भाग जा! अभी…… !
अजय पूरी ताकत से दौड़ पड़ा। जब वह गाँव पहुँचा तो सुबह होने लगी थी। उसका शरीर काँप रहा था और आँखें डर से लाल हो चुकी थीं। गाँव वालों ने उसे उस हालत में देखा तो घबरा गए। अजय कई दिनों तक बीमार रहा। उसने किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन अब वह पहले जैसा नहीं रहा था। उसकी आँखों में हमेशा डर दिखाई देता था। कुछ दिनों बाद गाँव में खबर फैली कि श्मशान घाट में अजीब घटनाएँ बंद हो गई हैं। रात में अब वहाँ कोई लाल आँखों वाला आदमी दिखाई नहीं देता था।
लोगों ने सोचा शायद वह आत्मा हमेशा के लिए चली गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। करीब एक महीने बाद अजय फिर से उसी श्मशान घाट की तरफ गया। इस बार दिन का समय था। वह जानना चाहता था कि आखिर उस रात क्या हुआ था। श्मशान पहुँचकर उसने देखा कि पुराना मंदिर पूरी तरह टूट चुका था। चारों तरफ सिर्फ राख फैली हुई थी।
अजय धीरे-धीरे आगे बढ़ा। तभी उसकी नजर जमीन पर पड़ी एक पुरानी माला पर गई। वही माला जो उस श्मशान वाले इंसान के गले में थी। अजय ने काँपते हुए उसे उठाया। अचानक उसके कानों में एक फुसफुसाहट गूँजी मैं अभी भी यहीं हूँ। अजय का चेहरा सफेद पड़ गया। उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा।
श्मशान बिल्कुल खाली था। लेकिन फिर हवा में राख उड़ने लगी। पेड़ों की शाखाएँ अपने आप हिलने लगीं और दूर, पुराने बरगद के पेड़ के पीछे कोई खड़ा था।
लंबा काला साया….. लाल आँखें….. और चेहरे पर वही डरावनी मुस्कान। अजय की चीख पूरे श्मशान में गूँज उठी। उस दिन के बाद अजय कभी गाँव में दिखाई नहीं दिया। कुछ लोग कहते हैं कि वह पागल हो गया था। कुछ कहते हैं कि श्मशान वाला इंसान उसे अपने साथ ले गया।
लेकिन आज भी उस गाँव के लोग रात होने के बाद श्मशान घाट की तरफ नहीं जाते। क्योंकि कई बार अंधेरी रातों में वहाँ से मंत्र पढ़ने की आवाज़ सुनाई देती है और अगर कोई ध्यान से देखेतो जलती चिताओं के बीच एक लंबा आदमी खड़ा दिखाई देता है। जिसकी लाल आँखें अंधेरे में चमकती रहती हैं।
गाँव वाले आज भी बच्चों को चेतावनी देते हैं। रात के समय श्मशान घाट मत जाना……. क्योंकि श्मशान वाला इंसान अभी भी वहीं है……..।
अगर आपको यह कहानी डरावनी लगी हो। तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और ऐसी ही और रहस्यमयी व खौफनाक कहानियों के लिए जुड़े रहें!
भूतनी का खूनी बदला – horror story in hindi
कोन थी वह ? | Horror Story in Hindi for Reading
रात की सवारी | Short Horror Story – घाटशिला स्टेशन की डरावनी सच्ची कहानी
horror story, Hindi Horror Stories, best hindi horror story 2026, latest horror story in hindi, short horror stories,short horror stories in hindi, short horror story hindi, horror story in hindi for reading
अगर आपको डरावनी कहानियाँ पसंद हैं, तो ऐसी ही और खौफनाक कहानियाँ पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉग से जुड़े रहें।
