अगर किसी दिन अचानक कोई अनजान आवाज़ आपको आपकी मौत की तारीख बता दे… तो क्या आप उस भविष्यवाणी से बच पाएँगे ? शहर में लगातार हो रही रहस्यमयी मौतों के पीछे छुपा था एक ऐसा डरावना राज, जिसने हर किसी की नींद छीन ली थी। पत्रकार आरव इन घटनाओं की सच्चाई जानना चाहता था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह रहस्य उसे सीधे मौत के दरवाजे तक ले जाएगा। “मौत की भविष्यवाणी” एक ऐसी हॉरर कहानी है जहाँ हर फोन कॉल किसी की आखिरी चेतावनी बनकर आती है।
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सर्दियों की एक ठंडी रात थी। पूरा शहर घने कोहरे में डूबा हुआ था। सड़कें सुनसान थीं और दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ माहौल को और डरावना बना रही थी। रात के लगभग बारह बज रहे थे लेकिन पत्रकार आरव अभी भी अपने ऑफिस में बैठा काम कर रहा था।
आरव एक बहादुर और जिज्ञासु पत्रकार था। उसे रहस्यमयी घटनाओं की सच्चाई खोजने का शौक था। भूत-प्रेत, आत्मा और भविष्यवाणी जैसी बातों पर वह बिल्कुल विश्वास नहीं करता था। उसी रात उसके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आया।
आरव ने फोन उठाया। दूसरी तरफ से सिर्फ धीमी साँसों की आवाज़ आ रही थी।
हेलो ? कौन बोल रहा है ? कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा। फिर एक बूढ़ी औरत की काँपती हुई आवाज़ सुनाई दी। तुम्हारी मौत तीन दिन बाद होगी। आरव चौंक गया। क्या बकवास है ? लेकिन तभी कॉल कट गई।
आरव हँस पड़ा। उसे लगा कोई मजाक कर रहा है। उसने फोन को नजरअंदाज किया और फिर काम में लग गया। अगली सुबह जब वह ऑफिस पहुँचा तो वहाँ अफरा-तफरी मची हुई थी। उसका दोस्त और साथी पत्रकार करण घबराया हुआ था। तुमने खबर सुनी ?
क्या हुआ……..?
करण ने धीरे से कहा शहर के मशहूर बिजनेसमैन विनोद मेहरा की रात को मौत हो गई। आरव ने सिर हिलाया। तो……? करण ने काँपती आवाज़ में कहा मरने से पहले उन्हें भी किसी ने फोन करके उनकी मौत की भविष्यवाणी की थी। आरव के चेहरे की मुस्कान गायब हो गई।
क्या…..?
करण ने बताया कि विनोद मेहरा को मौत से ठीक तीन दिन पहले एक अनजान कॉल आया था। कॉल पर किसी बूढ़ी औरत ने कहा था। तीन दिन बाद तुम्हारी मौत हो जाएगी और ठीक तीसरे दिन उनकी कार खाई में गिर गई। आरव के शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई। उसे पिछली रात वाला कॉल याद आ गया।
लेकिन उसने खुद को संभाला। ये सिर्फ इत्तेफाक है। हालाँकि उसके दिल में डर की एक छोटी-सी चिंगारी जल चुकी थी। उसने तय किया कि वह इस मामले की तह तक जाएगा।
पूरे दिन उसने उस रहस्यमयी कॉल के बारे में जानकारी जुटाई। धीरे-धीरे उसे पता चला कि पिछले कुछ महीनों में शहर में ऐसी पाँच मौतें हो चुकी थीं। हर इंसान को मरने से पहले एक ही तरह का कॉल आया था और हर बार कॉल करने वाली आवाज़ एक बूढ़ी औरत की थी। रात को घर लौटते समय आरव के मन में अजीब बेचैनी थी। उसे बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसका पीछा कर रहा हो।
जैसे ही वह अपने फ्लैट में पहुँचा अचानक उसकी लाइट चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया। तभी उसके फोन की घंटी बज उठी। वही अनजान नंबर। आरव का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने काँपते हुए कॉल उठाया। तुम्हारे पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। यह सुनते ही आरव के हाथ काँप गए।
तुम कौन हो…….? वह चिल्लाया।
लेकिन दूसरी तरफ से सिर्फ धीमी हँसी सुनाई दी। फिर कॉल कट गया। उस रात आरव को नींद नहीं आई। हर छोटी आवाज़ उसे डरा रही थी। कभी उसे खिड़की के बाहर किसी की परछाई दिखाई देती कभी किसी के फुसफुसाने की आवाज़ सुनाई देती।
अगले दिन वह सीधे पुलिस स्टेशन पहुँचा। इंस्पेक्टर देव उसकी बात सुनकर हँस पड़ा। एक फोन कॉल से डर गए। आरव गुस्से में बोला ये मजाक नहीं है जिन लोगों को ये कॉल आया वे सब मर चुके हैं। देव कुछ पल चुप रहा। फिर धीरे से बोला सच कहूँ मुझे भी ये मामला अजीब लग रहा है।
उसने फाइल निकालकर आरव के सामने रख दी। सभी मौतों में एक बात कॉमन थी।
क्या…….?
हर मरने वाले ने मौत से पहले कहा था कि उन्हें एक बूढ़ी औरत दिखाई देती है। आरव का गला सूख गया। कौन औरत…… देव ने धीरे से कहा किसी को नहीं पता। उस रात आरव अपने फ्लैट में अकेला बैठा था। घड़ी में रात के ग्यारह बज रहे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। अचानक उसे अपने कमरे के बाहर किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी।
ठक….. ठक….. ठक…..
कदमों की आवाज़ धीरे-धीरे उसके दरवाजे के पास आकर रुक गई। आरव की साँसें तेज हो गईं। फिर दरवाजे पर तीन बार दस्तक हुई।
धड़ाम….! धड़ाम….! धड़ाम….!
आरव ने हिम्मत करके पूछा कौन है। कोई जवाब नहीं आया। उसने धीरे-धीरे दरवाजा खोला। बाहर कोई नहीं था। लेकिन जमीन पर गीले पैरों के निशान बने हुए थे। वे निशान धीरे-धीरे उसके घर के अंदर की तरफ जा रहे थे। आरव का खून जम गया।
अचानक उसके पीछे से किसी बूढ़ी औरत की आवाज़ आई। समय खत्म हो रहा है। आरव ने तेजी से पीछे मुड़कर देखा। कमरे के कोने में एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। उसके सफेद बाल बिखरे हुए थे। आँखें पूरी तरह काली थीं। उसके चेहरे की त्वचा जली हुई लग रही थी।
आरव डर के मारे पीछे हट गया। तुम कौन हो ? वह औरत धीरे-धीरे मुस्कुराई। मैं सिर्फ संदेश देती हूँ। इतना कहकर वह अचानक गायब हो गई। आरव चीख पड़ा। अगली सुबह वह शहर के पुराने रिकॉर्ड्स खंगालने लगा। कई घंटों की खोज के बाद उसे एक पुरानी खबर मिली।

करीब तीस साल पहले शहर में एक भयानक हादसा हुआ था। एक पुरानी हवेली में आग लग गई थी। जिसमें एक बूढ़ी औरत जिंदा जल गई थी। उस औरत का नाम था शांति देवी।लोग कहते थे कि वह भविष्य देखने की शक्ति रखती थी। वह लोगों को उनकी मौत के बारे में पहले ही बता देती थी। लेकिन किसी ने उसकी बातों पर विश्वास नहीं किया।
एक दिन कुछ लोगों ने उसे चुड़ैल कहकर उसकी हवेली में आग लगा दी। मरने से पहले उसने श्राप दिया था। अब मैं हर उस इंसान को उसकी मौत का संदेश दूँगी जिसे मौत बुला रही होगी। आरव की रीढ़ में सिहरन दौड़ गई।
उसी समय उसका फोन फिर बज उठा। आज आखिरी रात है। कॉल कट गया। अब आरव पूरी तरह टूट चुका था। रात होते ही उसने अपने दोस्त करण को बुला लिया। अगर मेरे साथ कुछ हो जाए…. आरव ने कहा तो इस रहस्य को दुनिया के सामने लाना।
करण ने उसे शांत करने की कोशिश की। लेकिन उसकी आँखों में भी डर साफ दिखाई दे रहा था। करीब रात के दो बजे अचानक पूरे फ्लैट की लाइट बंद हो गई। फिर खिड़कियाँ अपने आप खुलने लगीं। तेज ठंडी हवा कमरे में भर गई। तभी दीवार पर टंगी घड़ी अपने आप उल्टी दिशा में घूमने लगी।
टिक…. टिक…. टिक….
अचानक कमरे में किसी के रोने की आवाज़ गूँज उठी। करण काँपने लगा। ये……. ये क्या हो रहा है। तभी कमरे के बीचों-बीच धुआँ इकट्ठा होने लगा। धीरे-धीरे उस धुएँ से एक आकृति बनने लगी। वही बूढ़ी औरत।
इस बार उसका चेहरा पहले से भी ज्यादा भयानक था। उसकी आँखों से खून बह रहा था और शरीर आधा जला हुआ था।
समय पूरा हुआ…… उसने धीमी आवाज़ में कहा।
अचानक कमरे की दीवारों पर खून जैसे निशान उभरने लगे। हवा में जलने की बदबू फैल गई। आरव डर के मारे जम गया। मैं मरना नहीं चाहता वह चिल्लाया। बूढ़ी औरत की आँखों में अचानक दर्द दिखाई दिया। मौत से कोई नहीं बच सकता…..।
तभी अचानक कमरे की छत से पंखा टूटकर नीचे गिरा। अगर आरव एक कदम आगे होता तो उसकी मौत निश्चित थी। करण चीख पड़ा। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। अचानक गैस सिलेंडर से गैस लीक होने लगी। पूरे कमरे में तेज गंध फैल गई।
भागो…….! करण चिल्लाया।
दोनों तेजी से बाहर भागे। जैसे ही वे दरवाजे तक पहुँचे पीछे जोरदार धमाका हुआ। पूरा फ्लैट आग की लपटों में घिर गया। आरव और करण किसी तरह नीचे पहुँचे। लेकिन तभी आरव को सड़क के दूसरी तरफ वही बूढ़ी औरत दिखाई दी।
वह मुस्कुरा रही थी। फिर अचानक उसने अपनी उंगली ऊपर की तरफ उठाई। आरव ने ऊपर देखा। एक तेज रफ्तार ट्रक उसकी तरफ आ रहा था। करण ने जोर से उसे धक्का दिया। ट्रक आरव को छूते हुए निकल गया। लेकिन करण उसकी चपेट में आ गया।
उसकी चीख सुनकर पूरा इलाका गूँज उठा। आरव सड़क पर बैठा काँप रहा था। उसकी आँखों के सामने उसका दोस्त तड़प रहा था। कुछ ही सेकंड में करण की मौत हो गई। आरव टूट चुका था। उसे समझ आ गया कि मौत की भविष्यवाणी कभी गलत नहीं होती।

लेकिन सवाल यह था….. अगला नंबर किसका था। कुछ दिनों बाद आरव ने शहर छोड़ दिया। वह पहाड़ों के एक छोटे-से गाँव में जाकर रहने लगा। उसने पत्रकारिता छोड़ दी और लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया। उसे लगा अब वह सुरक्षित है।
लेकिन एक रात जब वह अपने कमरे में बैठा था। अचानक उसका फोन बज उठा। स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था। आरव के हाथ काँपने लगे। उसने धीरे-धीरे कॉल उठाया। दूसरी तरफ से वही बूढ़ी आवाज़ आई। मौत जगह बदलने से नहीं रुकती…….।
आरव की आँखें डर से फैल गईं। फिर फोन कट गया। अचानक उसके कमरे की खिड़की अपने आप खुल गई। बाहर घना कोहरा था। उस कोहरे के बीच एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। वही जली हुई आँखें वही डरावनी मुस्कान।
आरव समझ चुका था कि अब बचना नामुमकिन है। अगली सुबह गाँव वालों को आरव का कमरा खाली मिला। दरवाजा अंदर से बंद था। लेकिन आरव कहीं नहीं था। सिर्फ दीवार पर खून से एक वाक्य लिखा हुआ था।
मौत की भविष्यवाणी कभी झूठ नहीं होती……..।
आज भी लोग कहते हैं कि अगर आधी रात को किसी अनजान नंबर से कॉल आए और दूसरी तरफ किसी बूढ़ी औरत की आवाज़ सुनाई दे….. तो समझ जाओ कि मौत तुम्हारे बहुत करीब है।
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