मै आपको अपने मित्र अर्जुन की बहन कंचन और उसकी साली श्वेता की आप बीती आप लोगो को बताना चाहती हु। कुछ दिनों पहले अर्जुन ने मुझे बताया था कि उसकी बहन की मौत हो गयी है ये सुनकर मै बहुत दुखी हो गयी और मैंने उसकी मौत का कारण पूछा तो उसने पुरी घटना मुझे सुनाई।
कुछ दिनों पहले अर्जुन उसकी बहन कंचन और साली श्वेता के साथ कही घुमने गये थे। अर्जुन की बहन और श्वेता दोनों बहुत अच्छी दोस्त थी। लौटते वक़्त काफी रात हो गयी थी। रास्ते में उसकी बहन की तबियत खराब हो गयी थी उसे काफी ठण्ड लग रही थी। हमारा घर अभी भी 180 किमी दूर था और रास्ते में कोई भी रुकने की जगह नहीं मिल रही थी। थोड़ी देर के बाद हमे एक होटल दिखाई दी तो श्वेता ने होटल में रुककर उसकी बहन को आराम देने को कहा।
Room No. 13 का डरावना सच

उस होटल के काउंटर पर हमने जब रूम के लिए पुछा तो उसने बताया कि सभी रूम फुल थे क्योंकि उस रास्ते पर केवल वही एक ढंग की होटल थी। लेकिन तभी होटल के मेनेजर ने बताया कि एक रूम खाली था Room No. 13। हमने उस समय अन्धविश्वासी वाली बातो को ना सोचकर रूम ले लिया। जैसा कि आप लोग जानते है कि Room No. 13 को अशुभ माना जाता है और कई होटलों में इस नंबर का कोई रूम नहीं होता है लेकिन ये होटल कई साल पुराना था।
जैसे ही वो तीनो उस रूम में गये तो उन्हें नेगेटिव एनर्जी महसूस हुई। उस रूम की कंडीशन तो ठीक थी लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे बरसों से यहा कोई रहने नहीं आया हो। उन्होंने कुछ ज्यादा नहीं सोचा। अब वो अपनी बहन कंचन के लिए काउंटर से पैनकिलर लेने को गया। काउंटर से टेबलेट लेकर जैसे ही रूम में आया तो देखा कि उसकी बहन बालकनी में खडी बाते कर रही थी।
अर्जुन में सोचा श्वेता और उसकी बहन दोनों बालकनी में बाते कर रही है लेकिन जैसे ही उसके पास गया तो उसकी बहन के अलावा कोई नहीं था। उसने उसकी बहन से पुछा कि तुम किससे बाते कर रही थी तो उसने सिर्फ सर हिला कर मना कर दिया। तभी श्वेता वाशरूम से आयी।
अर्जुन घबरा गया की अगर श्वेता वाशरूम में थी तो कंचन किससे बात कर रही थी। अर्जुन ने कंचन को टेबलेट दी और सो जाने को कहा। अब श्वेता और कंचन दोनों बेड पर सो गये और अर्जुन सोफे पर सो गया। सुबह जब क्लीनर कमरे की सफाई के लिए आया तो दरवाज़ा खुला था। और वो जब अंदर आया तो देखा की कमरे में खून की खून था और कंचन मर चुकी थी। क्लीनर जोर से चिल्लाया तो मेरी नींद खुल गयी और देखा कि कंचन की मौत हो चुकी थी और श्वेता बेहोश हो गयी थी। अर्जुन जोर जोर से रोने लगा और मेनेजर को बुलाया।
मेनेजर ने तुरंत एम्बुलेंस को बुलाया और दोनों को हॉस्पिटल ले गये। कंचन तो मर चुकी थी लेकिन श्वेता को थोड़ी देर में होश आ गया। जैसे ही श्वेता को होश आया तो उसके पीछे उसकी बहन की आत्मा थी जो उससे बोल रही थी “तूने मुझे मार दिया ”।
यह कहकर वो गायब हो गयी। कंचन काफी बुरी तरह डर गयी अब अर्जुन ने श्वेता से सारी घटना पूछी तो उसने बताया कि “रात को जब मै पानी पीने उठी रात तो देखा श्वेता फिर से बालकनी में बैठी थी और कुछ बडबडा रही थी और मै जैसे उसके पास गयी और उससे पूछा कि वो यहा क्या कर रही है तो उसने मुझे जोर से धक्का दिया और मेरा सर दीवार से टकरा गया और मै बेहोश हो गयी और इसके अलावा मुझे कुछ याद नहीं है।
जैसे ही श्वेता हॉस्पिटल से छुटी तो वो अर्जुन के साथ उस होटल में गयी और उसने काउंटर पर मेनेजर से बात करने को कहा तो उसने बताया की आपकी घटना के दुसरे दिन मेनेजर की मौत हो गयी थी। वो दोनों शॉक हो गये। उन्होंने क्लीनर से माजरा समझने की कोशिश की तो उसने बताया कि आप जिस रूम में रुके थे वो प्रेतबाधित था और रात में वहा कोई नहीं रुकता है लेकिन मेनेजर ने पैसो के चक्कर में रूम आपको दे दिया। इस रूम में पहले भी दो मौते हो चुकी है। अब सारी बात अर्जुन को समझ में आयी।
इस घटना के बाद अर्जुन काफी सदमे में चला गया और कभी किसी होटल में नहीं रुका।
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