- vishal
- February 25, 2026
हवेली जो साँस लेती थी Part-2
Table of Contentsहवेली का इतिहासडायरी का पहला पन्नादूसरा पन्नाआवाज़ हवेली का इतिहास आरव ने खुद को समझाया कि यह सब
Table of Contentsहवेली का इतिहासडायरी का पहला पन्नादूसरा पन्नाआवाज़ हवेली का इतिहास आरव ने खुद को समझाया कि यह सब
चाँदनी रात में जागती परछाइयों का अभिशाप वापसी बरसों बाद जब आरव ने अपने गाँव “भैरवपुर” की पगडंडी पर कदम
एक बहुत पुराना म्यूज़ियम था| म्यूज़ियम की दीवारों पर, हज़ारों ऐतिहासिक तस्वीरें लगी हुई थी और उन्हीं तस्वीरों में, कुछ
रात के करीब ढाई बज रहे होंगे। नाइट शिफ्ट करने के बाद मैं पैदल ऑफ़िस से घर की और लौट
वापसी हवेली बिक चुकी थी। नए मालिक—एक व्यापारी परिवार—ने उसे सस्ते दाम में खरीद लिया। उनका मानना था कि “भूत-वूत
अधूरी मुक्ति सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए अद्वैत ने तय कर लिया था—वह अब इस हवेली में एक रात भी
दर्पण के उस पार जब अद्वैत की आँख खुली, वह अपने ही बिस्तर पर था। खिड़की से सुबह की रोशनी
वाराणसी की तंग गलियों में रात हमेशा थोड़ी लंबी लगती है। खासकर तब, जब गंगा के घाटों पर धुआँ देर