एक साधारण पिकनिक…. एक छोटा सा खेल….. real horror story in hindi
और पानी के अंदर छुपा एक खौफनाक राज।
सब कुछ ठीक था….
जब तक मैंने उस सिक्के को ढूंढने के लिए गोता नहीं लगाया था।
रात के करीब 2 बजे का समय था…
मैं अपने कमरे में अकेला बैठा था, लेकिन नींद मेरी आँखों से कोसों दूर थी। बाहर हल्की-हल्की हवा चल रही थी और खिड़की के शीशे बार-बार हिल रहे थे… जैसे कोई बाहर खड़ा होकर अंदर झाँकने की कोशिश कर रहा हो।
तभी मेरे फोन की गैलरी अपने आप खुल गई।
और स्क्रीन पर एक फोटो सामने आई वही दिन वही पिकनिक….. वही स्विमिंग पूल….
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा, क्योंकि उस फोटो में कुछ ऐसा था…. जो पहले कभी मैंने नोटिस नहीं किया था।
पानी के अंदर… ठीक मेरे पीछे..
एक धुंधली सी आकृति खड़ी थी….
एक औरत जिसके हाथ में एक सिक्का था और वो सीधे मेरी तरफ देख रही थी। उस पल मुझे एहसास हुआ
जो मैंने उस दिन देखा था… वो सपना नहीं था। “पुराना कब्रिस्तान – real horror story in hindi”
यह कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि आँखों देखा सच है!
मैं कंपनी की ओर से पिकनिक पर गया हुआ था! पिकनिक शहर के बाहर एक रेसोर्ट में थी! पहले कंपनी के लोगों ने क्रिकेट और अन्य खेल खेले, उसके बाद रेसोर्ट में ही बने वाटर पार्क में चले गए !
वहां केवल कुछ लोगों को ही तैरना आता था, वो सब गहरे पानी मैं तैर रहे थे, बाकी सब कम गहरे पानी में तैर रहे थे ! हम दोस्तों में एक शर्त लगी, पानी मे एक सिक्का फैका जायेगा और जो सब से कम समय में सिक्का ढून्ढ के लायेगा वह जीत जाएगा!
सब ने बारी बारी से गोता लगाया मगर किसी को सिक्का मिला तक नहीं ! अगली बारी मेरी थी ! मैं भी कूद गया, लेकिन पानी में जाते ही दृश्य बदल गया !मैंने पाया कि जमीन 20 या 25 फीट दूर थी ! नीचे एक कब्रिस्तान दिखाई दे रहा था! वहाँ एक औरत खड़ी थी जो चेहरे और पोशाक से भारतीय नहीं लग रही थी !
उसके हाथ मे वही सिक्का था! वह अपना हाथ ऊपर की ओर करके खड़ी थी !ऐसा लग रहा था मानो की वो मुझे ही सिक्का देने के लिए खड़ी हो!
मै जैसे उसके सम्मोहन में आगे बढता चला जा रहा था ! कुछ ही क्षणों में मै उसके करीब था और मैंने उसके हाथ से सिक्का ले लिया! जैसे ही मै वापस आने लगा, उसने मेरा हाथ पकड़ कर खींच लिया अब उसका और मेरा चेहरा आमने सामने था !

एक ही पल में उसका चेहरा बदल गया और एक भयानक रूप ले लिया ! उसकी आँखों से खून निकल रहा था और उसके चेहरे पर एक भयानक सी मुस्कान थी! मेरे डर की कोई सीमा नहीं थी! मै डर के मारे कांप गया ! मैंने झटके से अपना हाथ छुड़ाया !
हाथ छुड़ाते ही कब्रिस्तान और महिला दोनों गायब हो गए और मैंने अपने आप को पूल में पाया!मुझे लगा जैसे कि मैं किसी सपने से जागा हूँ! मैं जल्दी से पानी से बाहर आ गया और दूर जाकर बैठ गया! मेरी साँस फूल रही थी ओर मै खांस रहा था!
मेरे दोस्तों मेरी मदद करने लगे ! थोड़ी देर में मै सामान्य था! हर कोई पूछ रहा था कि क्या हुआ ! मैने बस सर हिलाते हुए कुछ नहीं मे जवाब दिया! मैंने मुट्ठी खोल कर देखी तो सिक्का मेरे हाथ मे था ! ये देख मेरे दोस्त ख़ुशी से उछलने लगे और मुझे बधाई देने लगे!
दोस्तों ने फिर से शर्त लगाई मगर मै फिर से पानी मे नहीं गया !शाम हो गयी थी ,हमारी बस जाने वाली थी, हम कुछ लोग सिगरेट पीने बाहर चले गए! मेरे दोस्त मजाक कर रहे थे ओर जोर जोर से हंस रहे थे !
सामने खडे एक अंकल हमारी बातें गौर से सुन रहे थे और बीच बीच मे तड़का भी मार रहे थे ! मै चुपचाप खड़ा था! मेरे एक दोस्त ने मजाक मे पूछा कि मै तब से चुप क्यों हूँ , क्या अन्दर कोई भूत देख लिया ?
ये सुनकर अंकल ने मजाकिया लिहाज मे कहा कि अंग्रेजों के ज़माने मे यहाँ कब्रिस्तान हुआ करता था ,ज़रूर किसी गोरे का भूत देख लिया होगा ! ये सुनकर सब हसने लगे मगर मुझको यकीन हो गया था कि जो मैंने देखा वह मेरा वहम नहीं था !
शाम को जब हम बाहर खड़े थे और वो अंकल अंग्रेजों के ज़माने वाले कब्रिस्तान की बात बता रहे थे !
तो सब हँस रहे थे लेकिन मेरे अंदर एक अजीब सा डर बैठ चुका था। बस में बैठने के बाद भी मैं बार-बार अपनी जेब टटोल रहा था वो सिक्का अब भी मेरे पास था।
घर पहुँचकर मैंने उस सिक्के को मेज़ पर रख दिया और सोने चला गया लेकिन उस रात मुझे नींद नहीं आई। मुझे बार-बार ऐसा लग रहा था। जैसे कोई मेरे कमरे में है। कोई मुझे देख रहा है।
अचानक
टप…. टप…. टप….
पानी टपकने की आवाज़ आने लगी। मैंने डरते हुए आँखें खोलीं और देखा मेरे कमरे के फर्श पर पानी फैला हुआ था और उस पानी में गीले पैरों के निशान बनते जा रहे थे। जैसे कोई अभी-अभी पानी से निकलकर अंदर आया हो।
मेरी नजर धीरे-धीरे उन निशानों का पीछा करने लगी और वो सीधे मेरी मेज़ तक जा रहे थे। जहाँ मैंने वो सिक्का रखा था। लेकिन….
अब वो सिक्का वहाँ नहीं था। तभी मेरे कान के पास एक ठंडी फुसफुसाहट सुनाई दी ये मेरा है। मैंने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा और मेरी रूह काँप गई। वही औरत वही खून से भरी आँखें और उसके हाथ में वही सिक्का था।
इस बार वो मुस्कुरा रही थी। अगली सुबह मेरा कमरा अंदर से बंद था लेकिन मैं वहाँ नहीं था। बस फर्श पर पानी फैला हुआ था और एक कोने में पड़ा था
वही सिक्का…..जिस पर ताज़ा खून लगा हुआ था।
कभी-कभी छोटी सी चीज़ जैसे एक सिक्का आपको ऐसी दुनिया से जोड़ सकती है, जहाँ से वापस आना नामुमकिन हो जाता है। ये कहानी हमें चेतावनी देती है
हर चीज़ जो आसानी से मिल जाए वो आपकी नहीं होती।
क्योंकि……
☠️कुछ चीज़ें खुद वापस लेने आती हैं। ☠️
अगर आपको यह कहानी रोमांचक लगी हो, तो मेरी अन्य डरावनी कहानियाँ भी ज़रूर पढ़ें। हर कहानी में आपको कुछ नया, रहस्यमयी और दिल दहला देने वाला अनुभव मिलेगा। जुड़े रहिए___ क्योंकि अगली कहानी शायद इससे भी ज़्यादा खौफनाक हो!
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