पहाड़ पर बनी आखिरी हवेली Part 1 – जहाँ रात को कोई ज़िंदा नहीं रहता

जहाँ सड़क खत्म होती थी…… वहाँ से डर शुरू होता था

यह कहानी मुझे लिखने में कई महीने लग गए। क्योंकि जो कुछ मैंने देखा था, उसे याद करना भी आसान नहीं था।

मेरा नाम अंशुमान है। ( अवार्ड अंशुमान नहीं )

मैं पेशे से ट्रैवल व्लॉगर हूँ। मुझे सुनसान और रहस्यमयी जगहों पर जाकर उनके बारे में वीडियो बनाना पसंद था। लेकिन 2023 में हुई एक घटना के बाद मैंने यह काम लगभग छोड़ दिया।

यह घटना हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से पहाड़ी इलाके में हुई थी। एक ऐसी जगह…..

जो किसी भी नक्शे में नहीं थी और जहाँ एक हवेली खड़ी थी….. पहाड़ पर बनी आखिरी हवेली।

रहस्यमयी ईमेल

एक शाम मुझे एक अजीब ईमेल मिला। उसमें सिर्फ एक फोटो थी। फोटो में घने कोहरे के बीच एक पुरानी हवेली दिखाई दे रही थी।

नीचे सिर्फ एक लाइन लिखी थी।

अगर सच में डर को रिकॉर्ड करना चाहते हो, तो यहाँ आओ।

न कोई नाम।

न कोई पता। बस एक लोकेशन कोऑर्डिनेट।

दो दिन बाद मैं उस लोकेशन पर पहुँच गया। वहाँ एक छोटा सा पहाड़ी गाँव था। मैंने हवेली के बारे में पूछा। लेकिन जैसे ही लोगों ने उसका नाम सुना…..

उनके चेहरे बदल गए। एक बूढ़े आदमी ने कहा।

वहाँ मत जाओ बेटा।

क्यों ?

क्योंकि जो वहाँ रात बिताता है…..

वह कभी पहले जैसा वापस नहीं आता।

आखिरी रास्ता

हवेली तक पहुँचने के लिए एक पुराना रास्ता था। करीब चार घंटे की चढ़ाई। जैसे-जैसे मैं ऊपर जा रहा था….. मोबाइल नेटवर्क गायब होने लगा। पेड़ घने होते गए और अजीब बात यह थी कि पूरे रास्ते एक भी पक्षी दिखाई नहीं दिया।

पहाड़ों में ऐसा होना लगभग असंभव था। शाम होने से पहले मैं वहाँ पहुँच गया और पहली बार हवेली को देखा।

वह विशाल थी।

काली पत्थर की दीवारें।

टूटी हुई खिड़कियाँ और चारों तरफ फैला हुआ कोहरा।

ऐसा लग रहा था जैसे पूरा पहाड़ उसी हवेली के लिए बना हो।

इतनी पुरानी हवेली का मुख्य दरवाज़ा खुला होना अजीब था। मैं अंदर गया। हॉल में धूल जमी हुई थी। लेकिन फर्श पर पैरों के निशान बने हुए थे।

ताज़ा निशान।

जैसे कोई कुछ समय पहले ही वहाँ से गुजरा हो। मैंने सोचा शायद कोई और ट्रैवलर होगा। लेकिन पूरे घर की तलाशी लेने पर कोई नहीं मिला। फिर भी मुझे बार-बार ऐसा महसूस हो रहा था कि कोई मुझे देख रहा है।

मुख्य हॉल में एक बड़ी तस्वीर टंगी थी। तस्वीर में एक परिवार खड़ा था। लगभग बीस लोग। सबके चेहरे गंभीर थे। लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि तस्वीर में खड़ी एक लड़की का चेहरा धुंधला था।

जैसे किसी ने जानबूझकर उसे मिटा दिया हो।

रात करीब 11 बजे मैं अपने कैमरे का डेटा चेक कर रहा था। तभी एक फोटो देखकर मैं चौंक गया। वह फोटो मैंने नहीं ली थी। लेकिन कैमरे में मौजूद थी। उस फोटो में मैं मुख्य हॉल में खड़ा था।

और मेरे पीछे सीढ़ियों पर कोई लड़की खड़ी थी। सफेद कपड़ों में।

ऊपर की मंजिल

मैं तुरंत कैमरा लेकर ऊपर गया। लेकिन वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ एक लंबा कॉरिडोर और उसके अंत में एक बंद कमरा। दरवाज़े पर जंग लगा ताला था।

करीब 2 बजे मेरी आँख खुली। ऊपर किसी के चलने की आवाज़ आ रही थी।

ठक…..

ठक…..

ठक…..

धीरे-धीरे कदमों की आवाज़। जैसे कोई भारी जूते पहनकर चल रहा हो। फिर एक महिला की आवाज़ सुनाई दी।

बहुत धीमी। लेकिन साफ।

मत खोलो…..

मैं बिस्तर पर बैठ गया। पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

सुबह मैंने पूरी हवेली का निरीक्षण किया और पीछे की तरफ एक छोटा सा कब्रिस्तान मिला। सिर्फ छह कब्रें। लेकिन हवेली में रहने वाले लोगों की संख्या तस्वीर में बीस से ज्यादा थी।

बाकी लोग कहाँ गए ?

एक कब्र पर लिखा था।

आर्या मेहता

लेकिन तारीख की जगह किसी ने पत्थर खुरच दिया था। जैसे उसकी मृत्यु की तारीख छिपाई गई हो।

मैं वापस गाँव गया। काफी पूछने पर एक 90 साल के बुजुर्ग ने मुझे कहानी बताई।

मेहता परिवार

करीब 70 साल पहले इस हवेली में मेहता परिवार रहता था। वे इलाके के सबसे अमीर लोग थे।

लेकिन एक रात….. पूरा परिवार अचानक गायब हो गया।

गाँव वालों के अनुसार सिर्फ एक लड़की जीवित बची थी। उसका नाम था।

आर्या।

लेकिन कुछ दिनों बाद वह भी गायब हो गई। मैं दोबारा हवेली लौटा। इस बार मैंने ऊपर वाले बंद कमरे का ताला तोड़ दिया। कमरे के अंदर सिर्फ एक मेज थी और उस पर रखी थी एक पुरानी डायरी।

पहला पन्ना पढ़ते ही मेरे हाथ काँप गए।

उसमें लिखा था।

अगर कोई यह डायरी पढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि हवेली ने तुम्हें भी बुला लिया है।

आगे लिखा था।

यह हवेली इंसानों को नहीं छोड़ती।

यह यादों को खाती है।

मैं समझ नहीं पाया। यादों को खाती है……?

उसी शाम मुझे महसूस हुआ कि मैं कुछ भूल रहा हूँ। बहुत जरूरी चीज़। लेकिन याद नहीं आ रहा था क्या। फिर धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ…..

मैं अपनी माँ का चेहरा याद नहीं कर पा रहा था।

असंभव

मैं घबरा गया।

मोबाइल निकाला। फोटो देखी।

तब जाकर चेहरा याद आया। लेकिन कुछ देर बाद फिर भूल गया।

पहले यह तुम्हारी छोटी यादें लेती है।

फिर चेहरे।

फिर नाम।

और आखिर में तुम्हें खुद भूल जाती है दुनिया।

डायरी में हवेली के नीचे बने एक गुप्त तहखाने का जिक्र था। जहाँ मेहता परिवार ने कुछ ऐसा खोज लिया था….. जो कभी खोजा नहीं जाना चाहिए था।

उसी रात 3:11 बजे पूरा घर हिलने लगा। जैसे नीचे से कोई भारी चीज़ चल रही हो। दीवारों से अजीब आवाज़ें आने लगीं और तभी…..

मुझे ऊपर वाले कॉरिडोर में किसी लड़की के रोने की आवाज़ सुनाई दी।

मैं आवाज़ के पीछे गया। कॉरिडोर के अंत में वही लड़की खड़ी थी….. जो फोटो में दिखाई दी थी।

सफेद कपड़े।

उदास आँखें।

और चेहरा…..

बिल्कुल वैसा जैसा पुरानी तस्वीर में धुंधला किया गया था।

तुम आर्या हो ?

मैंने पूछा। उसने धीरे से सिर हिलाया।

उसका चेतावनी

वह बोली

तुम्हें सुबह होने से पहले यहाँ से जाना होगा।

क्यों ?

उसकी आँखों में डर दिखाई दिया। फिर उसने कहा।

क्योंकि हवेली को पता चल चुका है कि तुम नीचे जाने वाले हो।

मैंने पूछा।

लेकिन वह जवाब नहीं दे सकी। अचानक पूरा कॉरिडोर अंधेरे में डूब गया और अगले ही पल वह गायब हो चुकी थी।

उसी समय मेरी टॉर्च की रोशनी फर्श पर पड़ी। वहाँ धूल में किसी ने उँगली से एक संदेश लिखा था।

तहखाना मत खोलना…..

और उसके ठीक नीचे…..

एक दूसरा संदेश उभर रहा था। जैसे कोई अदृश्य हाथ अभी लिख रहा हो।

हम अभी भी नीचे हैं……।

Part-1 END |

अगर आपको “पहाड़ पर बनी आखिरी हवेली Part-1 पसंद आई हो, तो कमेंट में Part-2 ज़रूर लिखें। आगे की कहानी में हवेली के नीचे छिपे रहस्य और आर्या की सच्चाई सामने आएगी।

Part 2 में:

  • तहखाने के नीचे क्या छिपा था ?
  • मेहता परिवार अचानक कैसे गायब हुआ ?
  • आर्या सच में कौन थी ?
  • और क्यों हवेली लोगों की यादें चुरा रही थी ?

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