पुराने अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर – जहाँ हर रात अधूरा ऑपरेशन पूरा होता था

वीरान अस्पताल की दहलीज पर पहला कदम

रात के ठीक साढ़े ग्यारह बजे शहर की आखिरी बस भी अस्पताल के सामने वाले सुनसान चौराहे को पार कर चुकी थी। हवा में नमी थी, लेकिन उस नमी से ज़्यादा भारी था वह सन्नाटा जो कई वर्षों से बंद पड़े सेंट मार्था हॉस्पिटल की टूटी हुई दीवारों से चिपका हुआ था।

यह अस्पताल करीब पंद्रह साल पहले अचानक बंद कर दिया गया था। सरकारी रिकॉर्ड में वजह लिखी गई थी। संरचनात्मक कमजोरी और आर्थिक नुकसान। लेकिन शहर के पुराने लोग आज भी उस इमारत का नाम सुनते ही धीमे स्वर में बात करने लगते थे। उनका कहना था कि अस्पताल बंद पैसे की वजह से नहीं बल्कि उस ऑपरेशन थिएटर की वजह से हुआ था जहाँ आखिरी सर्जरी के बाद कुछ ऐसा हुआ था जिसे किसी ने कभी खुलकर नहीं बताया।

लोग कहते थे कि वहाँ रात के समय मशीनें अपने आप चलने लगती हैं। स्टील के औजारों की आवाज़ आती है और कभी-कभी किसी मरीज की धीमी चीखें सुनाई देती हैं जबकि पूरा अस्पताल वर्षों से वीरान पड़ा है।

इन्हीं अफवाहों ने 28 वर्षीय आर्यन को वहाँ तक पहुँचा दिया।

आर्यन एक डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर था। उसका यूट्यूब चैनल ऐसी ही रहस्यमयी जगहों पर आधारित था। उसका मानना था कि हर डरावनी कहानी के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक कारण ज़रूर होता है। भूत-प्रेत जैसी चीज़ों पर वह बिल्कुल विश्वास नहीं करता था।

उस रात उसके साथ उसका कैमरा, एक ट्राइपॉड, हाई-पावर टॉर्च, अतिरिक्त बैटरियाँ और उसका दोस्त निखिल था। यार अभी भी वापस चल सकते हैं। निखिल ने अस्पताल के जंग लगे मुख्य गेट को देखते हुए कहा।

आर्यन मुस्कुराया।

अगर यहाँ सच में कुछ होता, तो अब तक सौ वीडियो वायरल हो चुके होते।

उसने कैमरा ऑन किया। दोस्तों, आज हम शहर के सबसे बदनाम अस्पताल के अंदर जाने वाले हैं। कहा जाता है कि यहाँ का ऑपरेशन थिएटर आज भी बंद नहीं हुआ….। कैमरा रिकॉर्ड कर रहा था। लोहे का गेट हल्का-सा धक्का देते ही कर्रर्र…. की लंबी आवाज़ के साथ खुल गया।

अंदर कदम रखते ही ऐसा लगा जैसे हवा अचानक कई डिग्री ठंडी हो गई हो। गलियारों में जगह-जगह टूटी हुई व्हीलचेयर पड़ी थीं। छत से लटकते तार हवा में धीरे-धीरे हिल रहे थे। दीवारों पर उखड़ा हुआ पेंट और पुराने खून जैसे भूरे धब्बे अब भी साफ दिखाई दे रहे थे।

निखिल ने धीरे से कहा। तूने महसूस किया? यहाँ अजीब-सी बदबू है। आर्यन ने गहरी साँस ली। बदबू सचमुच अजीब थी।

सिर्फ सीलन नहीं…. उसमें दवाइयों की गंध भी थी और कुछ ऐसा….

जो बहुत पुराने खून की याद दिला रहा था। शायद पाइपलाइन में फँसी नमी होगी उसने खुद को समझाया। वे धीरे-धीरे इमरजेंसी वार्ड पार करते हुए आगे बढ़ने लगे। कैमरे की स्क्रीन पर सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था।

लेकिन तभी…..

कैमरे की रिकॉर्डिंग एक सेकंड के लिए झिलमिलाई। आर्यन ने कैमरा नीचे करके देखा। बैटरी 90% थी। फिर स्क्रीन सामान्य हो गई।

ग्लिच होगा।

वे आगे बढ़े। गलियारे के आखिर में एक बड़ा बोर्ड अब भी टेढ़ा लटक रहा था।

Operation Theatre Complex

ऑपरेशन थिएटर नंबर 3 का बंद दरवाज़ा

पुराने अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर | Real Horror Story in Hindi

उसके नीचे धूल से ढका लाल तीर बना था। जैसे किसी ने आखिरी बार लोगों को उसी दिशा में भेजा हो। लेकिन वापस आने का रास्ता कभी नहीं मिला। सीढ़ियाँ ऊपर जाती थीं। हर कदम पर लकड़ी और लोहे की मिली-जुली चरमराहट गूँजती थी। ऊपर पहुँचकर लंबा कॉरिडोर शुरू हुआ। कॉरिडोर के दोनों तरफ छोटे-छोटे कमरे थे।

रिकवरी रूम….

स्टोर….

स्टेरिलाइजेशन यूनिट….

सब खाली। लेकिन जैसे ही वे आखिरी दरवाजे के सामने पहुँचे। दोनों रुक गए। दरवाजे पर मोटे अक्षरों में लिखा था।

Operation Theatre – 3

दरवाजा बाहर से जंग खाए ताले से बंद था।

लेकिन….

ताला खुला हुआ नीचे फर्श पर पड़ा था। आर्यन झुककर उसे देखने लगा। ताले पर धूल की एक भी परत नहीं थी। जैसे उसे कुछ देर पहले ही हटाया गया हो।

यह किसी ने अभी खोला है….

निखिल की आवाज़ काँप रही थी। आर्यन ने दरवाजा धीरे से धक्का दिया। दरवाजा अपने आप अंदर की ओर खुल गया। कमरे में घुप्प अंधेरा था। टॉर्च की रोशनी अंदर गई तो बीचोंबीच पुरानी ऑपरेशन टेबल दिखाई दी।

उसके ऊपर लगा ऑपरेशन लाइट का विशाल गोल ढाँचा अब भी छत से लटका हुआ था। चारों तरफ स्टील की ट्रॉलियाँ थीं। जंग लगे सर्जिकल औजार बिखरे पड़े थे। सब कुछ वर्षों से छोड़ा हुआ लग रहा था।

लेकिन एक चीज़ बिल्कुल नई थी। ऑपरेशन टेबल पर रखा….

एक सफेद कपड़ा। उस पर धूल का एक भी कण नहीं था। आर्यन धीरे-धीरे उसके पास गया। किसी ने प्रैंक किया होगा। उसने कपड़े का कोना पकड़कर खींचा। नीचे कुछ नहीं था। सिर्फ खाली टेबल। निखिल ने राहत की साँस ली।

उसी क्षण….

कमरे का दरवाजा….

धड़ाम !

पीछे से अपने आप बंद हो गया।

दोनों बुरी तरह चौंक पड़े। आर्यन दौड़कर दरवाजे तक पहुँचा।

हैंडल घुमाया। दरवाजा नहीं खुला।

अभी तो खुल रहा था….

निखिल पूरी ताकत से दरवाजा पीटने लगा। कोई जवाब नहीं।

तभी….

अपने आप जल उठी ऑपरेशन लाइट

ऑपरेशन थिएटर की छत पर लगा गोल ऑपरेशन लाइट। धीरे-धीरे अपने आप नीचे उनकी तरफ घूमने लगा। जबकि पूरे अस्पताल में बिजली का कनेक्शन वर्षों पहले काटा जा चुका था।

और अगले ही पल….

बिना किसी चेतावनी के वह लाइट अचानक जल उठी।

तेज़ सफेद रोशनी ने पूरे ऑपरेशन थिएटर को पल भर में जगमगा दिया। इतनी तेज़ कि आर्यन और निखिल ने अपनी आँखें ढक लीं। कुछ सेकंड पहले तक जो कमरा वीरान और जर्जर दिखाई दे रहा था, अब उसी रोशनी में उसका रूप बदलता हुआ महसूस होने लगा।

आर्यन ने धीरे-धीरे हाथ हटाया। उसका दिल एक पल के लिए रुक गया। ऑपरेशन टेबल अब खाली नहीं थी। उस पर कोई लेटा हुआ था। सफेद चादर के नीचे इंसानी शरीर का पूरा आकार साफ दिखाई दे रहा था।

ये…. ये अभी तो नहीं था…. निखिल की आवाज़ काँप रही थी। आर्यन ने खुद को संभालते हुए कैमरा उस तरफ घुमाया। किसी ने पहले से सेटअप किया होगा उसने खुद से कहा लेकिन उसकी अपनी आवाज़ में भरोसा नहीं था।

जैसे ही कैमरे की स्क्रीन पर उसने टेबल को देखा उसका गला सूख गया। कैमरे में ऑपरेशन टेबल बिल्कुल खाली दिखाई दे रही थी। उसने कैमरा नीचे किया चादर के नीचे शरीर मौजूद था। कैमरा ऊपर किया कुछ भी नहीं।

दो अलग-अलग सच एक ही समय पर उसके सामने खड़े थे। निखिल…. कैमरे में देख। निखिल ने स्क्रीन देखी फिर टेबल की तरफ देखा। उसके चेहरे का रंग उड़ चुका था।

आर्यन…. यहाँ से चलते हैं। अभी।

दोनों ने फिर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की। हैंडल जाम था। लोहे का दरवाज़ा जैसे दीवार का हिस्सा बन चुका था। उसी समय कमरे के कोने में रखी पुरानी हार्ट मॉनिटर मशीन से अचानक….

बीप….

दोनों उछल पड़े। मशीन पर वर्षों की धूल जमी हुई थी। उसमें कोई तार नहीं लगा था। कोई बिजली नहीं थी।

फिर भी….

बीप…. बीप…. बीप….

मॉनिटर की काली स्क्रीन धीरे-धीरे हरी रोशनी से चमकने लगी। उस पर दिल की धड़कन की लहरें चल रही थीं। आर्यन ने डरते हुए टेबल की तरफ देखा। चादर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हो रही थी। जैसे उसके नीचे लेटा कोई व्यक्ति साँस ले रहा हो।

निखिल पीछे हट गया। ये…. ये मज़ाक नहीं हो सकता। अचानक पूरे कमरे में ठंडी हवा का तेज़ झोंका चला। सभी स्टील के औज़ार एक साथ खनखनाने लगे। धातु की वह आवाज़ इतनी तीखी थी कि दोनों ने अपने कान पकड़ लिए।

और तभी….

स्पीकर जैसी किसी पुरानी मशीन से एक भारी टूटी हुई आवाज़ सुनाई दी।

स्केलपेल….

कमरे में कोई नहीं था। फिर भी आवाज़ दोबारा आई।

स्केलपेल….

जैसे कोई सर्जन ऑपरेशन शुरू कर चुका हो। आर्यन ने टॉर्च उस दिशा में घुमाई जहाँ से आवाज़ आई थी।

कुछ नहीं।

लेकिन अगले ही पल उसके सामने रखी स्टील ट्रॉली अपने आप खिसकने लगी। उस पर रखा एक पुराना सर्जिकल ब्लेड धीरे-धीरे किनारे तक आया और फर्श पर गिरने के बजाय हवा में रुक गया। दोनों की साँसें थम गईं।

ब्लेड हवा में तैर रहा था। धीरे-धीरे वह ऑपरेशन टेबल की तरफ बढ़ा। जैसे किसी अदृश्य हाथ ने उसे पकड़ रखा हो। उसके पीछे-पीछे एक कैंची।

फिर फोर्सेप…

फिर सुई पकड़ने वाला उपकरण। एक-एक करके सारे औज़ार हवा में उठ गए। पूरा ऑपरेशन थिएटर किसी अदृश्य सर्जरी की तैयारी कर रहा था। निखिल चीख पड़ा।

भाग….!

लेकिन भागने का रास्ता नहीं था। उसी समय ऑपरेशन लाइट के नीचे एक धुँधली आकृति बनने लगी। पहले सिर्फ सफेद कोट दिखाई दिया।

फिर दस्ताने।

फिर मास्क।

फिर धीरे-धीरे एक चेहरा

नहीं….

चेहरा नहीं था।

जहाँ चेहरा होना चाहिए था वहाँ सिर्फ काला अँधेरा था। फिर भी ऐसा लग रहा था कि वह सीधे उनकी ओर देख रहा है। उस आकृति ने अपना दाहिना हाथ उठाया। हवा में तैरता स्केलपेल उसकी मुट्ठी में आ गया।

और उसी क्षण ऑपरेशन टेबल पर पड़ी सफेद चादर अपने आप हट गई। उसके नीचे जो शरीर था। उसे देखकर आर्यन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

वह….

उसी का शरीर था।

वही चेहरा।

वही कपड़े।

वही कैमरा स्ट्रैप।

टेबल पर लेटा व्यक्ति आर्यन ही था। लेकिन उसकी आँखें खुली हुई थीं और वे सीधे खड़े हुए आर्यन को घूर रही थीं।

न…. नहीं….

आर्यन पीछे हटने लगा। टेबल पर पड़ा उसका दूसरा रूप मुस्कुराया। उसके होंठ हिले लेकिन आवाज़ पूरे कमरे में गूँजी।

ऑपरेशन अधूरा है……

और उसी पल ऑपरेशन थिएटर की सारी लाइटें एक साथ झपकने लगीं। लाइटें लगातार जलने-बुझने लगीं। हर बार जब रोशनी जाती, ऑपरेशन थिएटर कुछ और बदल जाता।

पहली बार अंधेरा हुआ….

फिर रोशनी आई…,

तो दीवारों का उखड़ा हुआ पेंट गायब था।

दूसरी बार अंधेरा हुआ….

रोशनी लौटी….

तो स्टील की ट्रॉलियाँ बिल्कुल नई दिखने लगीं।

तीसरी बार….

पूरा कमरा ऐसा लग रहा था जैसे अस्पताल कभी बंद हुआ ही न हो। दीवारों पर ताज़ा सफेद पेंट चमक रहा था। ऑक्सीजन सिलेंडर व्यवस्थित रखे थे। मॉनिटर सामान्य रूप से चल रहे थे। एयर-कंडीशनर की हल्की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

और सबसे डरावनी बात…. कमरे में अब वे दोनों अकेले नहीं थे। ऑपरेशन थिएटर में पाँच लोग मौजूद थे।

दो नर्सें।

दो सर्जन।

और एक एनेस्थीसिया डॉक्टर। सभी ने हरे रंग के ऑपरेशन गाउन पहन रखे थे। उनके चेहरे मास्क से ढके हुए थे। वे किसी की तरफ देख भी नहीं रहे थे। मानो आर्यन और निखिल वहाँ थे ही नहीं। सभी की निगाहें ऑपरेशन टेबल पर थीं।

लेकिन टेबल पर अब आर्यन का दूसरा रूप नहीं था। वहाँ लगभग तीस-पैंतीस साल का एक आदमी लेटा था। उसकी छाती पर खून लगा हुआ था। वह ज़िंदा था। उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं।

एक डॉक्टर बोला।

हमें जल्दी करनी होगी…. मरीज का ब्लड प्रेशर गिर रहा है।

दूसरे ने जवाब दिया। बिजली फिर से चली गई तो हम उसे नहीं बचा पाएँगे।” अचानक कमरे की लाइट एक बार झपकी। फिर पूरी बिजली चली गई। पूरा थिएटर अंधेरे में डूब गया। सिर्फ इमरजेंसी लाल लाइट जल रही थी।

मरीज दर्द से चीख उठा।

फिर….

एक अजीब आवाज़ सुनाई दी। जैसे कोई भारी चीज़ छत के ऊपर रेंग रही हो। नर्स ने डरकर ऊपर देखा।

सर…. ये आवाज़ कैसी है ?

किसी ने जवाब नहीं दिया। अगले ही पल ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया। ठीक उसी तरह। जैसे कुछ मिनट पहले आर्यन और निखिल के साथ हुआ था। डॉक्टरों ने दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।

बेकार।

फिर ऑपरेशन लाइट अपने आप जल उठी। लेकिन इस बार वह सफेद नहीं थी। उसमें हल्की नीली चमक थी। नीली रोशनी पड़ते ही सभी डॉक्टर अचानक बिल्कुल शांत हो गए। जैसे किसी ने उनका दिमाग अपने नियंत्रण में ले लिया हो।

उनकी गर्दनें एक साथ धीरे-धीरे ऑपरेशन टेबल की ओर झुक गईं।

और फिर….

उन्होंने मरीज की ओर नहीं। बल्कि एक-दूसरे की ओर देखना शुरू कर दिया। उनकी आँखें अब इंसानों जैसी नहीं थीं। पूरी तरह काली। एक डॉक्टर ने बिना कुछ कहे स्केलपेल उठाया।

लेकिन उसने मरीज पर नहीं। अपने ही साथी के हाथ पर चीरा लगा दिया। खून फर्श पर टपकने लगा।

फिर दूसरी नर्स हँसने लगी। वह सामान्य हँसी नहीं थी। ऐसा लग रहा था जैसे कई लोग एक साथ हँस रहे हों। कमरे का तापमान अचानक बहुत नीचे गिर गया। आर्यन ने अपनी साँस से निकलती भाप देखी।

हम…. अतीत देख रहे हैं…. उसने फुसफुसाकर कहा।

बिना आँखों वाली बच्ची की चेतावनी

निखिल ने जवाब नहीं दिया। उसकी नज़र कमरे के कोने पर जमी हुई थी। आर्यन ने उधर देखा। कोने में एक छोटी बच्ची खड़ी थी। लगभग आठ साल की। उसने अस्पताल का मरीज वाला सफेद गाउन पहन रखा था। उसके दोनों पैर ज़मीन से कुछ इंच ऊपर थे।

बाल पूरे चेहरे पर फैले हुए थे। वह धीरे-धीरे सिर उठाने लगी। उसके चेहरे पर आँखें नहीं थीं। सिर्फ दो गहरे काले गड्ढे। उसने बिना होंठ हिलाए कहा।

उन्हें मत देखने दो….

किसे ?

आर्यन के मुँह से अपने आप निकला। बच्ची ने काँपते हाथ से ऑपरेशन लाइट की ओर इशारा किया। जैसे ही दोनों ने ऊपर देखा। उनकी रूह काँप गई। ऑपरेशन लाइट के गोल शीशे में उनका प्रतिबिंब नहीं दिख रहा था।

उसमें….

एक और ऑपरेशन थिएटर दिखाई दे रहा था और उस दूसरे थिएटर में सैकड़ों लोग ऑपरेशन टेबलों पर लेटे हुए थे। सभी की आँखें खुली थीं। सभी एक साथ उनकी तरफ देख रहे थे।

फिर उन सैकड़ों लोगों ने एक साथ अपने हाथ उठाए और काँच के उस पार से जैसे बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। शीशे में दरारें पड़ने लगीं।

टक….

टक….

टक….

हर दरार के साथ कमरे में किसी की दर्दभरी चीख गूँजती। अचानक वही छोटी बच्ची ज़ोर से चिल्लाई।

भागो ! इससे पहले कि ये तुम्हें भी याद कर ले !

उसकी चीख खत्म होते ही ऑपरेशन लाइट का काँच ज़ोरदार धमाके के साथ फट गया। हज़ारों काँच के टुकड़े पूरे कमरे में बरस पड़े। लेकिन उनमें से एक भी टुकड़ा ज़मीन पर नहीं गिरा।

वे सभी हवा में ही रुक गए और धीरे-धीरे आर्यन और निखिल की तरफ मुड़ने लगे।

आर्यन ने बिना कुछ सोचे निखिल का हाथ पकड़ा और दोनों फर्श पर गिर पड़े। अगले ही पल सारे काँच उनके सिर के ऊपर से सीटी जैसी आवाज़ करते हुए निकल गए और पीछे वाली दीवार में धँस गए।

धड़ाम….

पूरी दीवार हिल गई। जंग लगी अलमारी गिर पड़ी। उसके पीछे दीवार में छिपा एक छोटा-सा लोहे का दरवाज़ा दिखाई दिया। उस पर मोटी धूल जमी थी। ऊपर फीके अक्षरों में लिखा था।

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जैसे ही वह दरवाज़ा दिखाई दिया पूरे कमरे का माहौल बदल गया। हवा में तैरते सारे सर्जिकल औज़ार एक साथ ज़मीन पर गिर पड़े। हार्ट मॉनिटर बंद हो गया। ऑपरेशन लाइट बुझ गई।

और कुछ सेकंड पहले दिखाई दे रहे डॉक्टर नर्सें और वह छोटी बच्ची सभी गायब हो चुके थे। सिर्फ वही पुराना टूटा-फूटा ऑपरेशन थिएटर बचा था।

ये…. ये दरवाज़ा पहले नहीं था…. निखिल हाँफते हुए बोला। आर्यन ने काँपते हाथों से उसकी कुंडी घुमाई। इस बार दरवाज़ा आसानी से खुल गया। अंदर एक संकरी सीढ़ी नीचे की ओर जा रही थी। सीढ़ियों से सड़ी हुई दवाइयों, गीली मिट्टी और पुराने खून जैसी गंध आ रही थी।

हमें बाहर निकलना चाहिए। निखिल ने आखिरी बार कहा।

लेकिन अब आर्यन के भीतर डर से ज़्यादा जिज्ञासा थी।

अगर सच जानना है….. तो यहीं मिलेगी। दोनों धीरे-धीरे नीचे उतरने लगे। हर कदम के साथ हवा और ठंडी होती जा रही थी। करीब तीस सीढ़ियाँ उतरने के बाद वे एक भूमिगत कमरे में पहुँचे।

चीफ सर्जन की डरावनी डायरी

कमरे की दीवारों पर पुराने मेडिकल रिकॉर्ड रखने वाली लोहे की अलमारियाँ थीं। ज़्यादातर फाइलें नमी से गल चुकी थीं। बीच में एक लकड़ी की मेज़ रखी थी। उस पर धूल से ढकी एक मोटी डायरी पड़ी थी। कवर पर उभरे हुए सुनहरे अक्षरों में लिखा था।

Chief Surgeon – Personal Log

आर्यन ने डायरी खोली। पहले कुछ पन्नों में सामान्य ऑपरेशन का रिकॉर्ड था। लेकिन आखिरी हिस्से की लिखावट बदल चुकी थी। ऐसा लग रहा था जैसे लेखक ने घबराहट में लिखी हो। उसने पढ़ना शुरू किया।

12 अगस्त….

आज ऑपरेशन थिएटर नंबर 3 में फिर वही हुआ। बिजली बंद होने के बाद भी लाइट जलती रही। मरीज मर चुका था लेकिन मॉनिटर धड़कन दिखाता रहा।

अगला पन्ना….

16 अगस्त….

स्टाफ कह रहा है कि ऑपरेशन के दौरान कोई अदृश्य व्यक्ति हमारे बीच खड़ा रहता है। हमने इसे तनाव समझकर नज़रअंदाज़ किया।

अगला पन्ना…..

स्याही जगह-जगह फैली हुई थी।

21 अगस्त….

आज पहली बार मैंने उसे देखा। वह डॉक्टर नहीं था…. मरीज भी नहीं…. लेकिन वही ऑपरेशन कर रहा था। उसके चेहरे की जगह सिर्फ अँधेरा था।

निखिल ने घबराकर पूछा आगे क्या लिखा है। आर्यन ने आखिरी पन्ना पलटा। उस पर सिर्फ एक वाक्य था। जिसे पढ़ते ही उसके हाथ काँपने लगे।

जो भी यह डायरी पढ़े…. ऑपरेशन थिएटर से बाहर मत भागना…. क्योंकि वह बाहर नहीं आता…. वह तुम्हारे साथ चला जाता है।

दोनों ने एक-दूसरे की ओर देखा। उसी क्षण ऊपर कहीं से लोहे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद होने की आवाज़ आई।

धड़ाम…..!

सीढ़ियों का रास्ता बंद हो चुका था और फिर पूरे तहखाने में किसी के भारी जूतों की आवाज़ गूँजने लगी।

ठक….

ठक….

ठक….

कोई धीरे-धीरे सीढ़ियाँ उतर रहा था। आवाज़ बिल्कुल साफ़ थी। लेकिन दिखाई कोई नहीं दे रहा था। आर्यन ने टॉर्च सीढ़ियों पर डाली। खाली।

फिर भी हर कदम की आवाज़ पहले से ज़्यादा पास आ रही थी।

ठक….

ठक….

अब ऐसा लग रहा था जैसे वह अदृश्य व्यक्ति आखिरी सीढ़ी पर पहुँच चुका हो। कमरे का तापमान अचानक इतना गिर गया कि दोनों के हाथ सुन्न होने लगे।

तभी कमरे के बीचोंबीच हवा हल्की-सी काँपी और उसी जगह धीरे-धीरे एक आकृति बनने लगी।

पंद्रह साल पुरानी आखिरी सर्जरी

पहले जूते….

फिर हरे रंग का ऑपरेशन गाउन….

फिर दस्ताने….

और आखिर में….

वही चेहरा….

या यूँ कहें….

चेहरे की जगह फैला हुआ गहरा अंतहीन अँधेरा। उसने बिना होंठ हिलाए कहा।

ऑपरेशन…. अब पूरा होगा।

उसके दस्ताने पर ताज़ा खून चमक रहा था। धीरे-धीरे उसने अपना हाथ उठाया। हवा में पड़ा स्केलपेल अपने आप उसकी हथेली में आ गया और उसी क्षण आर्यन के कैमरे की स्क्रीन अपने आप चालू हो गई। स्क्रीन पर लाइव वीडियो चल रहा था। लेकिन उसमें तहखाना नहीं दिख रहा था।

उसमें ऑपरेशन टेबल पर दो लोग लेटे थे। उनके चेहरे साफ़ दिखाई दे रहे थे। वे थे….

आर्यन और निखिल।

उनके ऊपर वही अंधेरे चेहरे वाला सर्जन झुक रहा था और कैमरे के कोने में रिकॉर्डिंग का समय चल रहा था।

15 साल पहले।

कैमरे की स्क्रीन पर चल रही रिकॉर्डिंग देखकर दोनों के शरीर से जैसे जान निकल गई।

तारीख़-15 साल पहले।

वह तारीख़ उस दिन की थी जब इस अस्पताल को हमेशा के लिए बंद किया गया था। लेकिन सबसे असंभव बात यह थी कि वीडियो में ऑपरेशन टेबल पर लेटे दोनों लोगों के चेहरे बिल्कुल आर्यन और निखिल जैसे थे।

एक भी फर्क नहीं।

वही कपड़े।

वही घड़ी।

वही कैमरे का स्ट्रैप।

ये…. ये कैसे हो सकता है ? निखिल की आवाज़ टूट चुकी थी। आर्यन कुछ बोल ही नहीं पाया। स्क्रीन पर अंधेरे चेहरे वाला सर्जन धीरे-धीरे कैमरे की ओर मुड़ा। पहली बार ऐसा लगा जैसे उसे पता हो कि कोई उसे देख रहा है।

उसने सीधे कैमरे की तरफ़ हाथ बढ़ाय और अचानक स्क्रीन पूरी तरह काली हो गई। उसी क्षण तहखाने में खड़ा वही साया एक कदम आगे बढ़ा।

ठक….

उसके कदम की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज उठी। फर्श काँपने लगा। अलमारियों में रखी फाइलें अपने आप गिरने लगीं। डायरी के बचे हुए खाली पन्ने तेज़ हवा में पलटने लगे। फिर आखिरी पन्ने पर अपने आप लाल रंग की लिखावट उभरने लगी।

आर्यन ने काँपते हाथों से उसे पढ़ा।

सच जानने वाला कभी वापस नहीं जाता।

जैसे ही उसने आखिरी शब्द पढ़ा पूरी डायरी राख बनकर उसकी हथेली से नीचे गिर गई। अंधेरे चेहरे वाला सर्जन अब उनसे सिर्फ़ कुछ कदम दूर था। उसने स्केलपेल उठाया।

लेकिन वार करने से पहले…. उसी छोटी बच्ची की आवाज़ फिर सुनाई दी।

उसकी तरफ़ मत देखो !

आवाज़ कहीं दिखाई नहीं दे रही थी, लेकिन साफ़ सुनाई दे रही थी। उसका चेहरा खाली है जो उसे देखता है वह उसी का हिस्सा बन जाता है।

आर्यन ने तुरंत अपनी नज़र झुका ली। लेकिन निखिल एक पल के लिए उस साए के चेहरे की ओर देख बैठा। बस एक पल और वही पल सब कुछ बदल गया।

निखिल अचानक बिल्कुल शांत हो गया। उसके चेहरे का डर गायब हो चुका था। वह धीरे-धीरे मुस्कुराने लगा। उसकी आँखें पूरी तरह काली हो गईं।

निखिल……………………..! आर्यन चीखा।

लेकिन निखिल ने उसकी तरफ़ देखा भी नहीं। वह बिना कुछ बोले उस साए के पीछे जाकर खड़ा हो गया। जैसे वर्षों से उसी का इंतज़ार कर रहा हो। अब दोनों की चाल एक जैसी थी।

दोनों एक साथ आगे बढ़ने लगे। आर्यन पीछे हटते-हटते दीवार से टकरा गया। उसी समय उसकी टॉर्च हाथ से छूटकर ज़मीन पर गिरी। उसकी रोशनी सीधे तहखाने की छत पर पड़ी। छत पर लाल रंग से एक बड़ा-सा चिन्ह बना हुआ था।

वह किसी धार्मिक प्रतीक जैसा नहीं था। बल्कि गोलाकार ऑपरेशन लाइट की आकृति जैसा था। उसके चारों ओर दर्जनों नाम लिखे थे।

कुछ धुँधले हो चुके थे।

कुछ अभी भी साफ़ थे।

आर्यन ने काँपते हुए पढ़ा।

डॉ. मेहरा….

सीमा….

राकेश….

अनिता….

और सबसे नीचे….

ताज़ी गीली लिखावट में दो नए नाम उभर रहे थे।

आर्यन

निखिल

जैसे किसी अदृश्य हाथ ने अभी-अभी उन्हें लिखा हो। तभी उसे डायरी का एक वाक्य याद आया।

वह बाहर नहीं आता…. वह तुम्हारे साथ चला जाता है।

आर्यन ने पूरी ताक़त से अपनी टॉर्च उस चिन्ह की तरफ़ फेंक दी। काँच टूट गया। तेज़ धमाका हुआ। पूरा तहखाना हिल गया। दीवारों में लंबी दरारें पड़ने लगीं। छत से मलबा गिरने लगा। अंधेरे चेहरे वाला साया पहली बार पीछे हट गया।

उसकी आवाज़ गूँजी।

नहीं…..

पूरा कमरा भरभरा कर टूटने लगा। आर्यन ने आखिरी बार निखिल का हाथ पकड़ने की कोशिश की। लेकिन निखिल वहीं खड़ा मुस्कुरा रहा था। उसने धीरे से कहा।

अब बहुत देर हो चुकी है….।

अगले ही पल छत का बड़ा हिस्सा गिर पड़ा। आर्यन ज़ोरदार धमाके के साथ बेहोश हो गया।

तीन दिन बाद…..

आर्यन की आँखें शहर के सरकारी अस्पताल में खुलीं। पुलिस ने बताया कि पुराने अस्पताल की इमारत का एक हिस्सा अचानक गिर गया था। उसे मलबे के बाहर बेहोश हालत में पाया गया।

लेकिन निखिल का कोई पता नहीं चला। पूरे मलबे की खुदाई हुई। हर कमरा देखा गया। तहखाना भी। वहाँ कोई नहीं था।

न कोई डायरी।

न ऑपरेशन थिएटर।

न कोई गुप्त रास्ता।

जैसे वह सब कभी था ही नहीं। पुलिस ने मान लिया कि निखिल हादसे में कहीं दब गया होगा। कुछ महीनों बाद खोज भी बंद कर दी गई। आर्यन ने कभी किसी को पूरी सच्चाई नहीं बताई। क्योंकि उसके पास कोई सबूत नहीं बचा था।

कैमरा भी टूट चुका था। उसमें मौजूद सारी रिकॉर्डिंग अपने आप मिट चुकी थी। धीरे-धीरे उसने उस घटना को भूलने की कोशिश की। लेकिन

एक रात….

करीब दो बजे….

उसकी नींद अचानक खुल गई। उसे लगा जैसे घर के किसी कमरे से धातु के औज़ारों के टकराने की हल्की आवाज़ आ रही हो।

टिन….

टिन….

वह उठकर ड्रॉइंग रूम तक गया। कोई नहीं था। जैसे ही वह वापस मुड़ा। उसे अपने कमरे का दरवाज़ा खुला दिखाई दिया। अंदर से तेज़ सफेद रोशनी आ रही थी।

बिल्कुल वैसी। जैसी उस पुराने ऑपरेशन थिएटर की लाइट थी। उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। धीरे-धीरे वह कमरे के अंदर गया। कमरा खाली था। लेकिन उसकी मेज़ पर एक चीज़ रखी थी।

एक बिल्कुल नया चमचमाता हुआ….

सर्जिकल स्केलपेल।

उसके नीचे एक छोटी-सी पर्ची रखी थी। उस पर सिर्फ़ पाँच शब्द लिखे थे—

अगला ऑपरेशन आज रात है।

उसी पल पीछे से किसी ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा।

स्केलपेल….

आर्यन ने काँपते हुए पीछे देखा और उसकी चीख पूरे घर में गूँज उठी। अगली सुबह पड़ोसियों ने दरवाज़ा तोड़ा। कमरे की लाइटें जल रही थीं। फर्श पर सिर्फ़ आर्यन का कैमरा पड़ा था।

उसका रिकॉर्ड बटन अब भी चालू था। रिकॉर्डिंग में कमरा पूरी तरह खाली था। लेकिन आख़िरी पाँच सेकंड में…. कैमरे के बिल्कुल पीछे….

एक धुँधली आकृति दिखाई दी। हरे ऑपरेशन गाउन में। हाथ में चमकता हुआ स्केलपेल और जहाँ उसका चेहरा होना चाहिए था। वहाँ सिर्फ़ अंतहीन अँधेरा था।

उस दिन के बाद से शहर में एक नई अफ़वाह फैल गई। लोग कहते हैं कि पुराने अस्पताल का ऑपरेशन थिएटर अब खंडहरों में नहीं है। वह हर उस जगह बन जाता है जहाँ कोई उसकी सच्चाई जानने की कोशिश करता है और अगर आधी रात के बाद किसी सुनसान कमरे में आपको कोई धीमी आवाज़ सुनाई दे।

स्केलपेल….

तो पीछे मुड़कर कभी मत देखना। क्योंकि हो सकता है….।

ऑपरेशन थिएटर ने अपना अगला मरीज चुन लिया हो।

THE END |

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