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रात 11:45 बजे मिला वह चैलेंज
मैंने हमेशा सुना था कि GP Block, मेरठ की रातें सामान्य नहीं होतीं। लोग तरह-तरह की बातें करते थे। कोई कहता वहाँ आधी रात को सफेद कपड़ों में एक औरत दिखाई देती है।
कोई दावा करता कि टूटी इमारत के अंदर चार लोग मोमबत्ती जलाकर बैठे दिखाई देते हैं। कुछ लोग इन बातों को सिर्फ़ अफवाह बताते।
और कुछ लोग उनका नाम सुनते ही रास्ता बदल लेते। मैं इन सब बातों पर कभी विश्वास नहीं करता था। मैं एक YouTube चैनल चलाता था, जहाँ मैं पुराने और रहस्यमयी स्थानों की वीडियो बनाता था।
एक दिन मेरे दोस्त विवेक ने कहा। अगर सच में हिम्मत है। तो आज रात GP Block चलते हैं।
मैं हँस पड़ा।
चलो…. आज पता चल ही जाएगा कि भूत होते हैं या नहीं। रात 11:45 बजे….
हम दोनों कैमरा, टॉर्च और ट्राइपॉड लेकर GP Block पहुँचे। सड़क लगभग खाली थी। दूर-दूर तक सिर्फ़ स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी थी। पुरानी इमारत अंधेरे में किसी विशाल काले साये की तरह खड़ी थी।
टूटी हुई खिड़कियाँ…. उखड़ी हुई दीवारें….
और अंदर से आती ठंडी हवा पूरा माहौल किसी हॉरर फिल्म जैसा लग रहा था। विवेक ने मज़ाक करते हुए कहा। अगर कोई भूत मिले तो इंटरव्यू ज़रूर लेना।
हम दोनों हँस पड़े। हमें नहीं पता था।
कुछ मिनट बाद…..
हमारी हँसी हमेशा के लिए गायब हो जाएगी।
टूटी हुई इमारत के अंदर जो हमने देखा….
हमने कैमरा रिकॉर्डिंग पर लगाया और धीरे-धीरे इमारत के अंदर कदम रखा। अंदर धूल की मोटी परत जमी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे वर्षों से वहाँ कोई आया ही न हो। छत से लटके जंग लगे सरिए…..

टूटी हुई सीढ़ियाँ और हर कदम पर उड़ती धूल…..
पूरा माहौल बेचैन कर देने वाला था। अचानक विवेक रुक गया।
सुन….
मैंने पूछा क्या हुआ ?
उसने उँगली होंठों पर रख दी। पूरा माहौल शांत था। फिर ऊपरी मंज़िल से किसी के धीरे-धीरे चलने की आवाज़ आई।
ठक….
ठक….
ठक….
मैंने सोचा शायद कोई आवारा जानवर होगा। लेकिन यह आवाज़ इंसानी कदमों जैसी थी। विवेक ने कैमरा ऊपर किया। चलकर देखते हैं।
हम दोनों टूटी हुई सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने लगे। हर सीढ़ी पर ऐसा लगता था कि अभी टूट जाएगी। ऊपर पहुँचकर हमने टॉर्च चारों तरफ़ घुमाई। पूरा फ़्लोर खाली था। कोई नहीं।
लेकिन…..
हवा में अगरबत्ती जैसी हल्की खुशबू आ रही थी। इतनी तेज़ कि जैसे अभी-अभी किसी ने जलाई हो। मैंने विवेक की तरफ देखा।
यहाँ कोई है।
वह कुछ बोलता उससे पहले ही…..
गलियारे के आख़िरी कमरे में हल्की-सी रोशनी दिखाई दी। जैसे किसी ने मोमबत्ती जलाई हो। हम धीरे-धीरे उस कमरे की तरफ़ बढ़ने लगे। जैसे-जैसे हम पास पहुँच रहे थे। रोशनी और साफ़ होती जा रही थी।
मैंने कैमरा कमरे के अंदर घुमाया और मेरी साँस अटक गई। कमरे के बीचों-बीच चार लोग गोल घेरा बनाकर बैठे थे। उनके सामने एक मोमबत्ती जल रही थी। सभी ने सफेद कपड़े पहन रखे थे।
लेकिन……
उनमें से कोई भी हिल नहीं रहा था। ऐसा लग रहा था।जैसे समय वहीं रुक गया हो।
विवेक ने धीरे से कहा।
भाई….. ये लोग कौन हैं ?
मैंने ज़ोर से आवाज़ लगाई।
हैलो….. कौन है वहाँ ?
कोई जवाब नहीं आया। उसी पल चारों लोगों ने एक साथ अपना सिर हमारी तरफ़ घुमा लिया। लेकिन…. उनके चेहरों पर आँखें नहीं थीं। सिर्फ़ काला अंधेरा। विवेक के हाथ से कैमरा लगभग छूट गया।
हम दोनों पीछे हटने लगे। तभी कमरे की मोमबत्ती अपने आप बुझ गई। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया। अगले ही सेकंड हमारे कैमरे की नाइट विज़न अपने आप ऑन हो गई।
स्क्रीन पर…..
कमरा बिल्कुल खाली था। वहाँ कोई नहीं था। मैंने घबराकर टॉर्च जलाई। वास्तव में भी कमरा खाली था। चारों तरफ़ सिर्फ़ धूल।
न कोई मोमबत्ती।
न कोई इंसान।
विवेक काँपती आवाज़ में बोला।
अभी…. अभी तो यहीं बैठे थे। मैं कुछ बोल भी नहीं पाया।
उसी समय…. कैमरे से बीप…. बीप…. की आवाज़ आई। मैंने स्क्रीन देखी। रिकॉर्डिंग अपने आप बंद हो चुकी थी। फिर स्क्रीन पर एक संदेश उभरा।
Memory Full.
जबकि मेमोरी कार्ड बिल्कुल नया था। मैंने गैलरी खोली। सिर्फ़ पाँच मिनट की रिकॉर्डिंग होनी चाहिए थी। लेकिन…..
कैमरे में 4 घंटे 13 मिनट की वीडियो सेव थी। वीडियो का थंबनेल देखकर हमारे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। उसमें मैं और विवेक कमरे के बीचों-बीच बैठे थे।
और….
हमारे सामने….. एक मोमबत्ती जल रही थी।
कैमरे की रिकॉर्डिंग ने जो सच दिखाया….
मैं और विवेक कुछ सेकंड तक कैमरे की स्क्रीन को देखते रह गए। वीडियो का टाइम अपने आप चल रहा था।
04:13:27
जबकि हम इमारत में आए थे मुश्किल से दस मिनट हुए थे। मैंने काँपते हाथों से वीडियो चलाया। शुरुआत बिल्कुल सामान्य थी। हम दोनों इमारत के अंदर जाते हुए दिखाई दे रहे थे। फिर कैमरा अचानक हिलने लगा। स्क्रीन पर तेज़-तेज़ काली रेखाएँ आने लगीं।
कुछ सेकंड बाद…..
वीडियो पूरी तरह साफ़ हो गया। लेकिन अब कैमरा हमारे हाथ में नहीं था। ऐसा लग रहा था। जैसे कोई तीसरा व्यक्ति दूर खड़ा होकर हमें रिकॉर्ड कर रहा हो। मैं और विवेक उसी कमरे में बैठे थे।
हम दोनों की आँखें बंद थीं। कमरे के बीच एक मोमबत्ती जल रही थी और हमारे चारों ओर वही चार सफेद कपड़ों वाले लोग बैठे थे। उनके चेहरे अब भी दिखाई नहीं दे रहे थे।
वीडियो में अचानक एक अजीब आवाज़ सुनाई दी।
पाँचवाँ…. आ गया….
इसके बाद चारों आकृतियाँ धीरे-धीरे हमारी तरफ़ झुकने लगीं और अगले ही पल वीडियो पूरी तरह काला हो गया। सिर्फ़ एक आवाज़ बची।
अब इनमें से एक यहीं रहेगा….
वीडियो खत्म हो गया। मैं और विवेक एक-दूसरे को देखने लगे। हम दोनों के चेहरे का रंग उड़ चुका था। क्योंकि…. हमें उस वीडियो का एक भी पल याद नहीं था।
इमारत से बाहर…. लेकिन कोई हमारे साथ था
हम बिना एक सेकंड रुके नीचे भागे। टूटी हुई सीढ़ियाँ कूदते हुए किसी तरह बाहर पहुँचे। जैसे ही इमारत के मुख्य गेट से बाहर निकले…. दोनों ने राहत की साँस ली। मैंने बाइक स्टार्ट की।
इस बार बाइक तुरंत स्टार्ट हो गई। हमने पीछे मुड़कर नहीं देखा। करीब पाँच किलोमीटर दूर जाकर एक चाय की दुकान पर रुके। वहाँ रोशनी थी। लोग थे।
सब कुछ सामान्य लग रहा था।
मैंने सोचा अब डर खत्म हो चुका है। तभी….. चाय वाले ने हमारी तरफ़ ध्यान से देखा।
फिर धीरे से पूछा।
आप लोग GP Block से आ रहे हो ?
मैंने चौंककर पूछा
हाँ….. कैसे पता ?
वह कुछ पल चुप रहा। फिर बोला
आप दोनों नहीं…..
तीन लोग आए हैं।
मेरे पूरे शरीर में बिजली-सी दौड़ गई। मैंने तुरंत पीछे देखा। वहाँ कोई नहीं था। चाय वाले ने काँपते हुए उँगली मेरी पीठ की तरफ़ उठाई।
अभी…. अभी आपके पीछे एक आदमी खड़ा था। सफेद कपड़ों में….
लेकिन जैसे ही आपने पीछे देखा….. वह गायब हो गया।
मैं और विवेक बिना कुछ बोले वहाँ से निकल गए।
जिसे हमने अफ़वाह समझा था….
उस रात के बाद हमने कभी GP Block वापस जाने की हिम्मत नहीं की। घर पहुँचकर मैंने कैमरे का मेमोरी कार्ड लैपटॉप में लगाया। लेकिन…..
उसमें कोई वीडियो नहीं था। पूरा कार्ड खाली था। जैसे हमने कभी रिकॉर्डिंग की ही न हो। कुछ दिन बाद मैंने उस रात के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
मुझे पता चला कि GP Block के बारे में कई कहानियाँ वर्षों से चली आ रही हैं। कुछ लोग रहस्यमयी आकृतियाँ देखने का दावा करते हैं। कुछ अजीब आवाज़ें सुनने की बात कहते हैं। लेकिन इन दावों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
मैंने खुद को समझाया कि शायद उस रात जो कुछ हुआ, वह डर, अंधेरा और तनाव का असर रहा होगा।
लेकिन तीन महीने बाद…..
विवेक का फोन आया। उसकी आवाज़ काँप रही थी। उसने सिर्फ़ इतना कहा। भाई….. वह फिर दिखाई दिया।
कहाँ ?
मेरे घर के CCTV में…..
मैं उसी रात उसके घर पहुँचा। हमने रिकॉर्डिंग चलाई। स्क्रीन पर विवेक अपने घर के बाहर खड़ा था।
उसके पीछे….. सड़क के दूसरी तरफ़ एक सफेद कपड़ों वाली धुंधली आकृति खड़ी थी। वह कैमरे की तरफ़ नहीं सीधे मेरी तरफ़ देख रही थी।
अचानक वीडियो अपने आप रुक गया। स्क्रीन काली हो गई और उस काली स्क्रीन पर सिर्फ़ एक वाक्य उभर आया।
अगली बार…. अकेले आना।
उस दिन के बाद मैंने कभी GP Block का नाम लेकर वीडियो नहीं बनाई। आज भी अगर कोई मुझसे पूछता है।
क्या GP Block सच में भुतहा है ?
तो मेरा जवाब हमेशा एक ही होता है।
मुझे नहीं पता वहाँ भूत हैं या नहीं…”
लेकिन उस रात…. जो मैंने देखा…. उसे मैं आज तक समझ नहीं पाया।
THE END |
GP Block, मेरठ – अफवाहें और वास्तविक जानकारी
नोट: ऊपर दी गई कहानी पूरी तरह काल्पनिक (Fictional) है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है। इसका किसी वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है।
GP Block मेरठ का एक ऐसा स्थान है, जिसके बारे में वर्षों से कई रहस्यमयी कहानियाँ और अफवाहें सुनने को मिलती हैं। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि देर रात यहाँ सफेद कपड़ों में एक महिला दिखाई देती है। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने एक पुरानी इमारत के अंदर चार लोगों को मोमबत्ती जलाकर बैठे देखा है, जबकि कुछ लोगों के अनुसार रात के समय यहाँ अजीब परछाइयाँ, कदमों की आवाज़ें और रहस्यमयी गतिविधियाँ महसूस होती हैं।
हालाँकि, इन सभी बातों की कोई आधिकारिक, वैज्ञानिक या प्रमाणित पुष्टि नहीं हुई है। अधिकांश विशेषज्ञ इन्हें स्थानीय लोककथाएँ, अफवाहें या लोगों के व्यक्तिगत अनुभव मानते हैं। इसलिए GP Block को भुतहा साबित करने वाला कोई विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं है।
GP Block, Meerut Cantonment (Cantt), Meerut, Uttar Pradesh – 250001, India
यदि आप इस स्थान पर जाने का विचार करते हैं, तो स्थानीय नियमों का पालन करें, निजी संपत्ति का सम्मान करें और सुरक्षा को हमेशा प्राथमिकता दें। किसी भी अफवाह या अप्रमाणित दावे को तथ्य मानकर स्वीकार न करें।
कहानी कैसी लगी ? कमेंट करके ज़रूर बताइए।
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2 thoughts on “मैंने GP Block मेरठ में जो देखा, उस पर आज भी यकीन नहीं होता”
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