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कब्र पर लिखा था मेरा नाम….
रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे थे। मैं अपनी बाइक पर घर लौट रहा था। नवंबर का महीना था और ठंडी हवा पूरे हाईवे पर अजीब सी खामोशी फैला रही थी। सड़क लगभग खाली थी। कभी-कभार कोई ट्रक गुजर जाता और फिर सब कुछ पहले जैसा शांत हो जाता।
मेरा नाम आर्यन है। उस समय मैं 28 साल का था और जयपुर की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। उस रात ऑफिस में काम ज्यादा था इसलिए देर हो गई थी। मैं बस जल्द से जल्द घर पहुँचना चाहता था।
लेकिन मुझे नहीं पता था कि उस रात मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है।
सुनसान रास्ता
मुख्य हाईवे पर अचानक लंबा जाम लग गया। सामने किसी ट्रक का एक्सीडेंट हुआ था। लोग घंटों फँसे रहने की बात कर रहे थे। मैंने मोबाइल में मैप खोला। एक दूसरा रास्ता दिख रहा था।
रास्ता छोटा था और सीधे मेरे इलाके तक पहुँचता था। मैंने बिना ज्यादा सोचे बाइक उस तरफ मोड़ दी। शुरुआत में सब सामान्य था। लेकिन कुछ किलोमीटर बाद सड़क बहुत सुनसान होने लगी। दोनों तरफ घने पेड़।
दूर-दूर तक कोई घर नहीं। कोई दुकान नहीं। कोई इंसान नहीं। केवल अंधेरा।
करीब पंद्रह मिनट बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं रास्ता भटक गया हूँ। मोबाइल नेटवर्क गायब था। मैप बंद हो चुका था। मैंने बाइक रोकी। चारों तरफ देखा। तभी मेरी नजर सड़क किनारे लगे एक पुराने बोर्ड पर गई।
बोर्ड जंग खा चुका था। उस पर मुश्किल से लिखा दिखाई दे रहा था
रामपुर कब्रिस्तान – 1 KM
मैंने राहत की साँस ली। कम से कम कोई जगह तो थी जहाँ पहुँचकर रास्ता पूछ सकता था। हालाँकि मुझे यह अजीब लगा कि इतनी रात में कब्रिस्तान के पास कौन मिलेगा।
फिर भी मैंने बाइक आगे बढ़ा दी।
बूढ़ा आदमी
कुछ दूरी पर मुझे एक बूढ़ा आदमी दिखाई दिया। वह सड़क किनारे खड़ा था।
सफेद कुर्ता।
सफेद दाढ़ी। हाथ में लालटेन।
इतनी रात में उसे देखकर मैं हैरान रह गया। मैं उसके पास रुका। बाबा शहर का रास्ता किधर है ? उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें बहुत अजीब थीं। जैसे वह मुझे पहचानता हो। कुछ सेकंड तक वह कुछ नहीं बोला।
फिर धीरे से बोला
तुम्हें वहाँ नहीं जाना चाहिए।
कहाँ ?
उसने सामने की तरफ इशारा किया।
कब्रिस्तान।
मैं हल्का सा हँसा।
मैं वहाँ जाने नहीं आया हूँ। बस रास्ता पूछ रहा हूँ। वह मुस्कुराया। लेकिन उसकी मुस्कान देखकर मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
कभी-कभी इंसान वहाँ अपनी मर्ज़ी से नहीं जाता बेटा……
यह कहकर वह मुड़ गया और अंधेरे में गायब हो गया।
अजीब खामोशी
अब मैं थोड़ा असहज महसूस कर रहा था। लेकिन वापस लौटना भी संभव नहीं था। मैंने बाइक स्टार्ट की और आगे बढ़ गया। कुछ मिनट बाद सड़क खत्म हो गई। मेरे सामने एक बड़ा लोहे का गेट था।
उस पर लिखा था।
रामपुर कब्रिस्तान
मेरे मन में गुस्सा आया। मैप ने मुझे सीधे कब्रिस्तान तक पहुँचा दिया था। मैं बाइक मोड़ने ही वाला था कि अचानक इंजन बंद हो गया। मैंने कई बार कोशिश की। लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुई।
बैटरी बिल्कुल ठीक थी। फिर भी इंजन चालू नहीं हो रहा था। मैं परेशान हो गया। ठंडी हवा अचानक और तेज लगने लगी। उसी समय दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आई।
फिर सब कुछ शांत हो गया। इतना शांत कि मैं अपनी साँसों की आवाज़ सुन सकता था।
मैं कब्रिस्तान के गेट के अंदर चला गया। मुझे लगा शायद कोई चौकीदार मिल जाए। कब्रिस्तान बहुत बड़ा था।
सैकड़ों कब्रें।
कुछ नई।
कुछ बहुत पुरानी।
चाँद की हल्की रोशनी कब्रों पर पड़ रही थी। पूरा माहौल डरावना था। लेकिन जो चीज़ मुझे सबसे ज्यादा अजीब लगी। वह थी वहाँ की खामोशी।
जैसे पूरी दुनिया की आवाज़ें उस जगह आकर खत्म हो जाती हों।
वह लड़की
तभी मैंने उसे देखा। करीब तीस मीटर दूर। एक लड़की। सफेद कपड़े पहने हुए। वह एक कब्र के सामने खड़ी थी। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। मैंने सोचा शायद कोई स्थानीय लड़की होगी। मैं उसके पास गया।
सुनिए…..
उसने कोई जवाब नहीं दिया। मुझे रास्ता पूछना है। धीरे-धीरे उसने अपना सिर मेरी तरफ घुमाया और उसी क्षण मेरा दिल रुकते-रुकते बचा। उसका चेहरा बिल्कुल पीला था। आँखें असामान्य रूप से काली।
और उसके होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी।
वह अचानक बोली।
आर्यन…..
मैं जम गया। मैंने उसे कभी नहीं देखा था। फिर उसे मेरा नाम कैसे पता था ?
आप मुझे जानती हैं ? वह मुस्कुराई।
बहुत अच्छी तरह।
कब्र
उसने सामने की तरफ इशारा किया।
तुम्हें अपनी जगह देखनी चाहिए।
क्या मतलब ?
उसने जवाब नहीं दिया। बस धीरे-धीरे पीछे हट गई। मेरी नजर उस कब्र पर गई जिसके सामने वह खड़ी थी और अगले ही पल मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। कब्र पर लिखा था…..
आर्यन शर्मा
जन्म: 1991
मृत्यु: 2021
मैं वहीं जम गया। मेरा दिमाग सुन्न पड़ गया। यह मेरा नाम था। मेरी जन्मतिथि थी। सब कुछ मेरा था। सिवाय मृत्यु की तारीख के। मैंने कई बार पढ़ा।
फिर पढ़ा।
फिर पढ़ा।
लेकिन नाम वही था। मैंने आसपास देखा। वह लड़की गायब हो चुकी थी। जैसे वह कभी वहाँ थी ही नहीं। मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने खुद को समझाया
यह सिर्फ संयोग है।
लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं था। तभी मेरी नजर कब्र के नीचे लगी तस्वीर पर गई। मैंने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाई और जो देखा…. उससे मेरी चीख निकल गई। तस्वीर मेरी थी। बिल्कुल मेरी।
वही चेहरा।
वही आँखें।
वही मुस्कान। जैसे किसी ने मेरी फोटो उठाकर कब्र पर लगा दी हो।
पीछे कोई खड़ा था
मैं डरकर पीछे हटा। तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरे पीछे कोई खड़ा है। बहुत पास। इतना पास कि उसकी साँसें मेरे कान तक पहुँच रही थीं। लेकिन मैंने पीछे मुड़ने की हिम्मत नहीं की।
मेरे पूरे शरीर में डर दौड़ चुका था। फिर धीरे से एक आवाज़ आई…
तुम देर से आए…….
मैंने तुरंत पीछे देखा। लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
उसी समय….. कब्र के अंदर से आवाज़ आई।
ठक…..
ठक…..
ठक…..
जैसे कोई अंदर से मिट्टी पर हाथ मार रहा हो। मेरा गला सूख गया। आवाज़ फिर आई। इस बार और तेज।
ठक…!
ठक…!
ठक…!
जैसे कोई बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो। अचानक कब्र की मिट्टी हिलने लगी। मैंने अपनी आँखों से देखा। मिट्टी धीरे-धीरे ऊपर उठ रही थी। जैसे नीचे से कोई धक्का दे रहा हो।
मेरे पैर जवाब दे चुके थे। मैं भागना चाहता था। लेकिन हिल नहीं पा रहा था। फिर मिट्टी के बीच से एक हाथ बाहर निकला।
सफेद….
सड़ा हुआ….
और उसकी कलाई पर वही घड़ी थी। जो मैं उस समय पहने हुए था। मेरी चीख निकल गई और मैं पूरी ताकत से कब्रिस्तान के गेट की तरफ भागा। लेकिन भागते समय मैंने पीछे मुड़कर जो आखिरी चीज़ देखी…… उसने मेरी रूह तक जमा दी।
कब्र से बाहर निकल रहा वह इंसान…..
मैं खुद था।
Part 1 समाप्त…..
Part 2 में:
- कब्र से निकला मेरा हमशक्ल कौन था ?
- वह लड़की कौन थी ?
- मेरी कब्र सालों पहले कैसे बन गई ?
- और क्यों हर व्यक्ति जो उस कब्र को देखता था…. कुछ दिनों बाद मर जाता था ?
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1 thought on “उस रात मैंने अपनी ही कब्र देखी Part-1 (Kabr ki darawani kahani)”
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