उस रात मैंने अपनी ही कब्र देखी Part-2 | Real Horror Story in Hindi

अगर आपने Part 1 नहीं पढ़ा है। तो पहले उसे ज़रूर पढ़ें। उस रात मैंने अपनी ही कब्र देखी Part 1

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि सुनसान कब्रिस्तान में मुझे अपनी ही नाम और तस्वीर वाली कब्र मिली थी। लेकिन असली डर तब शुरू हुआ…. जब उस कब्र की मिट्टी हिलने लगी। और उसके अंदर से बाहर निकलने वाला इंसान…..

मैं खुद था।

कब्र से बाहर निकलने वाला आदमी मैं ही था….

भागते-भागते मेरी साँसें फूल चुकी थीं। कब्रिस्तान का गेट अब कुछ ही कदम दूर था।लेकिन तभी पीछे से एक आवाज़ आई।

आर्यन…

मैं रुक गया। आवाज़ बिल्कुल मेरी अपनी आवाज़ जैसी थी। मैंने काँपते हुए पीछे देखा और जो दिखाई दिया, उसने मेरी रूह जमा दी। कब्र से बाहर निकल चुका वह आदमी अब पूरी तरह खड़ा था।

वह बिल्कुल मेरी तरह दिखता था।

चेहरा।

आँखें।

बाल।

यहाँ तक कि कपड़े भी। जैसे मैं खुद अपने सामने खड़ा था। फर्क सिर्फ इतना था कि उसका चेहरा बुरी तरह पीला था और उसकी आँखों में अजीब सी उदासी थी।

वह क्या चाहता था ?

मैं डर के मारे पीछे हटने लगा। लेकिन उसने हाथ उठाकर कहा

डरो मत। मैं हैरान रह गया। उसकी आवाज़ भी मेरी जैसी थी। तुम….. कौन हो ? उसने कुछ सेकंड मेरी तरफ देखा।

फिर बोला

मैं वही हूँ….. जो तुम बनने वाले हो।

मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।

क्या मतलब ? उसने कब्र की तरफ इशारा किया।

तुम्हारी मौत यहाँ लिखी जा चुकी है।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या हो रहा है। वह मुझे कब्रिस्तान के अंदर एक पुराने हिस्से में ले गया। वहाँ एक टूटा हुआ मकबरा था। मकबरे की दीवारों पर अजीब निशान बने हुए थे। बीच में एक पत्थर रखा था।

उस पर कई नाम खुदे हुए थे।

सैकड़ों नाम। और उनमें एक नाम मेरा भी था।

आर्यन शर्मा

लेकिन उसके नीचे एक तारीख भी लिखी थी। तारीख थी….

15 नवंबर 2021

मैंने घड़ी देखी। आज 14 नवंबर थी।

मतलब…. कल।

लड़की का रहस्य

तभी वही सफेद कपड़ों वाली लड़की फिर दिखाई दी। इस बार वह पहले से ज्यादा साफ दिखाई दे रही थी। वह धीरे-धीरे हमारी तरफ आई और अचानक बोली

समय खत्म हो रहा है।

मैंने हिम्मत करके पूछा। तुम कौन हो ?

उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैं भी कभी तुम्हारी तरह थी।

क्या मतलब ?

मैंने भी अपनी कब्र देखी थी।

मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।

उस लड़की ने जो बताया वह और भी डरावना था। कई साल पहले इस कब्रिस्तान के नीचे एक पुराना श्मशान था। कहा जाता था कि वहाँ एक तांत्रिक रहता था। मृत्यु से बचने के लिए उसने एक अजीब अनुष्ठान किया।

लेकिन अनुष्ठान गलत हो गया। उसके बाद इस जगह पर एक श्राप जन्मा। जो भी व्यक्ति उस श्राप के घेरे में आता….. उसे अपनी मौत पहले दिखाई देने लगती।

और अंत में…. वह सच हो जाती।

लड़की मुझे एक पुराने पेड़ के पास ले गई। वहाँ मिट्टी में दबा हुआ एक लोहे का बक्सा था। बक्से के अंदर एक पुस्तक मिली। पुस्तक उसी तांत्रिक की थी। मैंने काँपते हाथों से उसे खोला।

एक पन्ने पर लिखा था

जिस दिन कोई इंसान अपनी कब्र देख लेगा उसकी आत्मा दो हिस्सों में बँट जाएगी।

एक हिस्सा जीवित रहेगा।

दूसरा हिस्सा मृत्यु की प्रतीक्षा करेगा।

अचानक मुझे समझ आया। कब्र से निकला आदमी….. मेरी आत्मा का दूसरा हिस्सा था।

मौत का समय

पुस्तक के आखिरी पन्ने पर एक और बात लिखी थी।

जिस व्यक्ति ने अपनी कब्र देख ली हो वह अगली रात बारह बजे तक जीवित नहीं रह सकता।

मेरे हाथ काँपने लगे। घड़ी में सुबह के चार बज रहे थे। मेरे पास सिर्फ बीस घंटे बचे थे।

मैं किसी तरह घर पहुँचा। पूरी रात नहीं सोया। बार-बार वही चेहरा आँखों के सामने आ रहा था। मेरा ही चेहरा।

लेकिन मृत।

मैंने खुद को समझाया कि यह सब भ्रम हो सकता है। शायद थकान। शायद कोई मानसिक समस्या। लेकिन दोपहर में एक और घटना हुई।

मैं अपने कमरे में बैठा था। तभी मेरी नजर दीवार पर लगी एक पारिवारिक फोटो पर गई। उस फोटो में मैं मौजूद था। लेकिन धीरे-धीरे मेरी तस्वीर धुंधली होने लगी। जैसे कोई उसे मिटा रहा हो। मैं घबरा गया।

आँखें मलकर फिर देखा।

अब तस्वीर सामान्य थी। लेकिन मैं समझ चुका था। कुछ बहुत गलत हो रहा था। शाम करीब सात बजे मेरा फोन बजा। अज्ञात नंबर था। मैंने कॉल उठाई। कुछ सेकंड तक सन्नाटा रहा।

फिर आवाज़ आई

भाग जाओ।

वह मेरी अपनी आवाज़ थी। फोन तुरंत कट गया।

रात करीब नौ बजे मैं घर से बाहर निकला। मैं बस लोगों के बीच रहना चाहता था। सड़क पर भीड़ थी। अचानक सामने से तेज़ रफ्तार ट्रक आया। उसका संतुलन बिगड़ गया। सीधे मेरी तरफ। लोग चिल्लाने लगे।

मैं किसी तरह पीछे कूदा। ट्रक मेरे सामने से गुजर गया। अगर एक सेकंड भी देर होती….. मैं मर चुका होता।

आधी रात

घड़ी में 11:45 हो चुके थे। मैं समझ गया था कि मौत मेरा पीछा कर रही है। मैं वापस कब्रिस्तान पहुँचा। वही लड़की मेरा इंतजार कर रही थी।

अब क्या होगा ? मैंने पूछा।

उसने जवाब दिया

अब फैसला तुम्हें करना है।

वह मुझे उसी कब्र के पास ले गई। इस बार कब्र खुली हुई थी। अंदर अंधेरा था। लेकिन मुझे किसी की मौजूदगी महसूस हो रही थी। फिर वही हमशक्ल बाहर आया। उसने मेरी तरफ देखा।

अगर तुम जीना चाहते हो…..

तो ?

तुम्हें अपनी जगह मुझे देनी होगी।

मैं समझ नहीं पाया।

मतलब ?

उसने मुस्कुराकर कहा

एक आत्मा को जाना होगा।

अचानक पूरी जमीन काँपने लगी। ठंडी हवा चलने लगी। कब्रिस्तान में मौजूद सभी पेड़ों से अजीब आवाज़ें आने लगीं। मैंने पहली बार महसूस किया कि वह हमशक्ल इंसान नहीं था। वह कुछ और था।

कुछ ऐसा जो मेरी पहचान छीनना चाहता था। मैंने पूरी ताकत से उसे धक्का दिया। वह कब्र के अंदर गिर पड़ा।

उसी समय लड़की ने जोर से चिल्लाया।

अभी !

मैंने पास रखा लोहे का क्रॉस कब्र में फेंक दिया। अचानक भयानक चीख गूँज उठी। इतनी डरावनी कि आज भी याद करके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

श्राप का अंत

कुछ सेकंड बाद सब शांत हो गया। हवा रुक गई। आवाज़ें बंद हो गईं। मैंने कब्र के अंदर झाँका। वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ खाली अंधेरा और मेरी कब्र पर लिखा नाम धीरे-धीरे मिटने लगा।

फिर पूरी कब्र साधारण पत्थर में बदल गई। मैंने पीछे मुड़कर उस लड़की को ढूँढा। लेकिन वह गायब थी। जहाँ वह खड़ी थी, वहाँ एक छोटी सी कब्र थी।

पत्थर पर लिखा था।

सिया

जन्म: 1998

मृत्यु: 2018

मेरी आँखें फैल गईं। मतलब…. वह भी जीवित नहीं थी।

उस घटना को आज पाँच साल हो चुके हैं। मैंने कभी किसी को यह कहानी नहीं बताई। क्योंकि कोई विश्वास नहीं करेगा। लेकिन कभी-कभी….. रात के ठीक 11:45 बजे…. मेरे फोन पर एक अज्ञात कॉल आता है।

जब मैं उसे उठाता हूँ…. तो दूसरी तरफ सिर्फ मेरी अपनी साँसों की आवाज़ सुनाई देती है और फिर कॉल कट जाता है। आज तक मुझे नहीं पता…. क्या उस रात श्राप सचमुच खत्म हो गया था…. या फिर वह अब भी मेरा इंतजार कर रहा है।

समाप्त।

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