Table of Contents
बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू मुझे हमेशा अच्छी लगती थी। लेकिन उस दिन…..
धनपुर गाँव की सूखी झील के किनारे खड़े होकर पहली बार मुझे मिट्टी से सड़न की बदबू आ रही थी।
मैं आरव मिश्रा एक खोजी पत्रकार हूँ। पिछले आठ सालों में मैंने देशभर की ऐसी घटनाओं पर रिपोर्ट बनाई थी जिन्हें लोग भूत-प्रेत, चमत्कार या श्राप मानते थे। ज़्यादातर मामलों में सच कुछ और ही निकलता था।
इसी वजह से जब मेरे ऑफिस में एक पुराना लिफाफा पहुँचा तो मैंने उसे भी किसी शरारत से ज़्यादा महत्व नहीं दिया। लिफाफे पर कोई नाम नहीं था। अंदर सिर्फ़ एक पीला पड़ चुका कागज़ था। जिस पर नीली स्याही से लिखा था।
अगर सच जानना है तो अमावस्या की रात धनपुर की सूखी झील पर आना। झील कभी सूखी नहीं थी….. उसे सूखा बनाया गया था।
नीचे सिर्फ़ एक तारीख़ लिखी थी।
अमावस्या….. तीन दिन बाद।
उसके साथ एक पुरानी काले-सफेद फोटो भी थी। फोटो में करीब बीस लोग झील के किनारे खड़े थे। सबके चेहरे साफ़ दिख रहे थे। लेकिन सबसे अजीब बात…..
फोटो के बीच में जहाँ झील थी। वहाँ पानी नहीं था। वहाँ बिल्कुल काली मिट्टी थी और उस मिट्टी के बीचों-बीच एक लड़की खड़ी थी। सभी लोग कैमरे की तरफ देख रहे थे। लेकिन वह लड़की कैमरे की तरफ नहीं…..
सीधे मेरी तरफ देख रही थी।
धनपुर की पहली झलक
तीन दिन बाद मैं धनपुर पहुँच गया। गाँव छोटा था। मुश्किल से डेढ़ सौ घर होंगे। जैसे ही मेरी गाड़ी गाँव में दाखिल हुई मुझे पहली अजीब बात दिखाई दी। गाँव के हर घर के बाहर नींबू-मिर्च नहीं…..
बल्कि सूखी मिट्टी से भरी छोटी-छोटी मटकियाँ रखी थीं। मैंने एक दुकानदार से पूछा।
ये सब क्या है ?
वह कुछ पल मुझे देखता रहा। फिर बोला।
आप बाहर से आए हो ?
हाँ।
तो जल्दी अपना काम करके चले जाना।
क्यों ?
उसने जवाब नहीं दिया। बस दुकान बंद करने लगा। दोपहर के सिर्फ़ तीन बजे थे। लेकिन पूरा गाँव ऐसे लग रहा था जैसे शाम हो चुकी हो।
गाँव के सरपंच रघुबीर सिंह से मिलने पर उन्होंने पहले तो बात करने से ही मना कर दिया। लेकिन जब मैंने उन्हें वह पुरानी फोटो दिखाई….. उनके हाथ काँप गए। उन्होंने तुरंत दरवाज़ा बंद किया और धीमी आवाज़ में बोले….
ये फोटो तुम्हें कहाँ मिली ?
किसी ने भेजी है।
उन्होंने फोटो को दोबारा देखा। फिर बोले।
इस फोटो को वापस ले जाओ….. और आज रात ही गाँव छोड़ दो।
लेकिन क्यों ?
उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुए कहा। क्योंकि इस फोटो में जितने लोग दिखाई दे रहे हैं…..
उनमें से आज एक भी ज़िंदा नहीं है। मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
ये लड़की कौन है ?
सरपंच ने तुरंत फोटो मुझसे वापस लेकर उलटी कर दी। उसका नाम मत लेना।
क्यों ?
उन्होंने सिर्फ़ एक बात कही
जिस दिन उसका नाम लिया जाता है….. उसी रात झील किसी को बुलाती है।
सूखी झील
शाम होने से पहले मैं झील देखने निकल गया। गाँव से करीब एक किलोमीटर दूर….. पेड़ों के बीच… एक बहुत बड़ा मैदान था।
यही धनपुर की मशहूर सूखी झील थी। पुराने रिकॉर्ड बताते थे कि पचास साल पहले यहाँ बहुत गहरा पानी था। लेकिन अचानक एक साल ऐसा आया जब पूरा पानी गायब हो गया। सरकारी रिकॉर्ड में लिखा था।
प्राकृतिक कारणों से झील सूख गई।
लेकिन वहाँ खड़े होकर मुझे सरकारी रिपोर्ट झूठ लग रही थी। क्योंकि पूरी झील की मिट्टी बाकी ज़मीन जैसी नहीं थी। वह काली थी….. इतनी काली कि धूप पड़ने पर भी चमकती नहीं थी।
झील के बिल्कुल बीच में एक अकेला बरगद का पेड़ खड़ा था। उस पर एक भी पत्ता नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे वह पेड़ सालों पहले मर चुका हो…..
लेकिन फिर भी गिरा नहीं। मैं कैमरा लेकर नीचे उतर गया। जितना अंदर जाता…..
हवा उतनी ठंडी होती जा रही थी। अचानक मेरे जूते किसी सख़्त चीज़ से टकराए। मैंने मिट्टी हटाई। नीचे…..
एक बच्चे का हाथ दिखाई दिया। मैं घबरा गया। लेकिन अगले ही पल समझ आया…… वह हाथ असली नहीं था। पत्थर की मूर्ति का टूटा हुआ हाथ था। मैंने राहत की साँस ली।
तभी…..
मेरे पीछे किसी बच्चे के हँसने की आवाज़ आई। मैं तुरंत पलटा। पूरा मैदान खाली था।
कैमरे में कैद हुआ सच
मैंने सोचा शायद किसी गाँव के बच्चे की आवाज़ होगी। मैंने रिकॉर्डिंग जारी रखी। करीब आधे घंटे बाद होटल लौट आया। रात को फुटेज देखने बैठा। सब कुछ सामान्य था। लेकिन जैसे ही कैमरा झील के बीच वाले बरगद पर पहुँचा…..
वीडियो अपने-आप रुक गया। स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए अजीब-सी लाइनें आने लगीं। फिर अचानक……
बरगद के नीचे कोई दिखाई दिया। मैंने वीडियो रोक दिया। ज़ूम किया। दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
वहाँ…..
एक लड़की खड़ी थी।
सफेद नहीं…
बल्कि गीली नीली फ्रॉक पहने हुए। उसके लंबे बाल चेहरे पर थे और उसके हाथ में एक मिट्टी का घड़ा था। मुझे साफ़ याद था…..। जब मैंने शूटिंग की थी….. वहाँ कोई नहीं था। मैंने वीडियो दोबारा चलाया।
इस बार लड़की धीरे-धीरे कैमरे की तरफ देखने लगी।
और फिर…..
वह मुस्कुराई।
अगले ही सेकंड स्क्रीन पूरी काली हो गई।
रात 2:13 बजे
उस रात मेरी नींद ठीक 2:13 बजे खुली। कमरे में कोई आवाज़ नहीं थी। लेकिन मुझे साफ़ महसूस हो रहा था….। जैसे कोई मेरे कमरे के बाहर….
नंगे पैर चल रहा हो।
ठप….
ठप….
ठप….
मैंने दरवाज़े के नीचे से आती रोशनी देखी। किसी की परछाई दिखाई दे रही थी। मैंने धीरे से पूछा।
कौन है ?
कोई जवाब नहीं। लेकिन अगले ही पल….. दरवाज़े के दूसरी तरफ से एक लड़की की बहुत धीमी आवाज़ आई।
पानी….. वापस कर दो….
मैं एकदम सन्न रह गया। मेरे होटल में मेरे अलावा सिर्फ़ दो कमरे भरे हुए थे। कोई बच्ची वहाँ थी ही नहीं। मैंने हिम्मत करके दरवाज़ा खोल दिया।
बाहर…..
पूरा गलियारा खाली था। लेकिन फर्श पर…..
गीली मिट्टी से बने छोटे-छोटे पैरों के निशान थे और वे निशान…. सीधे मेरी कमरे से निकलकर झील की दिशा में जा रहे थे।
उसी समय मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
अगर सच जानना है…. तो आज आधी रात झील के बीच वाले बरगद के पास अकेले आना। गाँव वालों पर भरोसा मत करना। असली हत्यारे अभी भी ज़िंदा हैं…..
मैसेज पढ़ते ही मेरे हाथ काँपने लगे…..
क्योंकि उसके नीचे जो फोटो जुड़ी थी…..
उसमें मैं था।
मैं…. अभी-अभी होटल के दरवाज़े पर खड़ा था।
लेकिन वह फोटो बाहर से खींची गई थी और मुझे याद था।
होटल के बाहर उस समय कोई नहीं था।
Part-2 will come tomorrow after 9 pm….
अगर आपको यह Horror Story in Hindi पसंद आई हो, तो इसका दूसरा और अंतिम भाग ज़रूर पढ़ें। भाग 2 में झील के नीचे दफन काला सच, रहस्यमयी लड़की की असली पहचान और इस खौफनाक रहस्य का अंत आपका इंतज़ार कर रहा है।
अगर आपको भूतिया स्थानों, सच्ची डरावनी घटनाओं, चुड़ैल, डायन और रहस्यमयी कहानियाँ पढ़ना पसंद है, तो हमारे ब्लॉग को Subscribe करना न भूलें।
Subscribe करें और हर नई Horror Story सबसे पहले अपने Email Inbox में प्राप्त करें।
हम नियमित रूप से नई Real Horror Stories, Haunted Places, Bhoot Stories और Paranormal Experiences प्रकाशित करते हैं, जो आपकी रूह तक कंपा देंगी। डर की इस दुनिया से जुड़े रहें….. क्योंकि अगली कहानी शायद इस कहानी से भी ज्यादा खौफनाक हो।
नीचे अपना Email दर्ज करें और अभी Subscribe करें!