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वह हर रात लिफ्ट मांगती थी… लेकिन उसकी मंज़िल कब्रिस्तान थी
नोट: यह कहानी एक सच्ची घटना से प्रेरित हॉरर स्टोरी के रूप में लिखी गई है। अगर आप रात में अकेले सफर करते हैं, तो यह कहानी आपके रोंगटे खड़े कर सकती है।
सुनसान हाईवे
साल 2019 की बात है। मैं जयपुर से दिल्ली लौट रहा था। रात के लगभग 1:30 बजे थे। हाईवे लगभग खाली था। चारों तरफ अंधेरा फैला हुआ था और सड़क के दोनों ओर खेत थे।मैं अपनी कार में धीमी आवाज़ में गाने सुनते हुए चला जा रहा था।
तभी अचानक मेरी हेडलाइट की रोशनी में कोई दिखाई दिया। एक औरत सड़क किनारे खड़ी। सफेद साड़ी पहने हुए। उसका चेहरा बालों से ढका हुआ था। मैंने सोचा शायद किसी की गाड़ी खराब हो गई होगी।
लेकिन जैसे-जैसे मैं उसके करीब पहुँचा……। मेरे मन में अजीब सा डर पैदा होने लगा। मैंने कार धीरे की। औरत ने अपना हाथ उठाया। जैसे लिफ्ट मांग रही हो। मेरे मन में दो आवाज़ें चल रही थीं।
एक कह रही थी।
मदद कर दो…….।
दूसरी कह रही थी।
यहाँ मत रुकना…….। लेकिन आखिरकार मैंने कार रोक दी। खिड़की नीचे की।
कहाँ जाना है……….?
कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया। फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा।
आगे तक छोड़ दीजिए………।
उसकी आवाज़ अजीब थी। जैसे बहुत दूर से आ रही हो।
कार के अंदर
वह पीछे वाली सीट पर बैठ गई। जैसे ही दरवाज़ा बंद हुआ….. कार का तापमान अचानक बहुत ठंडा हो गया। मैंने रियर व्यू मिरर में देखा। उसका चेहरा अब भी बालों से ढका हुआ था। पूरे रास्ते वह चुप रही।
मैंने दो-तीन बार बात करने की कोशिश की। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। करीब 20 मिनट बाद उसने पहली बार कहा।
यहाँ से दाईं तरफ मुड़ जाइए।
मैंने देखा। वहाँ कोई मुख्य सड़क नहीं थी। सिर्फ एक कच्चा रास्ता था।
क्या आप यहीं रहती हैं………?
मैंने पूछा। कोई जवाब नहीं। बस वही धीमी आवाज़।
दाईं तरफ…….।
न जाने क्यों मैंने कार मोड़ दी।
कुछ दूर जाने के बाद रास्ता खत्म हो गया। सामने एक पुराना कब्रिस्तान था। मेरे हाथ स्टीयरिंग पर जम गए। मैंने पीछे देखा। वह औरत अब भी बैठी थी। फिर उसने कहा
मैं पहुँच गई।
मैंने राहत की साँस ली। लेकिन अगले ही पल……।
जब मैंने पीछे देखा……. सीट खाली थी। कार का दरवाज़ा बंद था। किसी के उतरने की आवाज़ भी नहीं आई थी।
फिर वह गई कहाँ…….? मेरा गला सूख गया। मैं तुरंत वहाँ से निकल गया। लेकिन जाते-जाते मैंने रियर व्यू मिरर में देखा। कब्रिस्तान के गेट पर वही औरत खड़ी थी और मुझे देख रही थी।
सपना
उस रात होटल पहुँचने के बाद मुझे नींद नहीं आई। करीब 3 बजे आँख लगी और मैंने सपना देखा। वही औरत। वही सफेद साड़ी। वह मेरे बिस्तर के पास खड़ी थी और कह रही थी।
तुम वापस आओगे……..
मैं चीखकर उठ बैठा। पूरा कमरा ठंडा था। अगली सुबह मैंने अपने फोन की गैलरी खोली और मेरा खून जम गया। कार में सफर के दौरान ली गई तस्वीरों में…..
पीछे वाली सीट पर वही औरत दिखाई दे रही थी। लेकिन तस्वीर में उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था और उसका चेहरा….. पूरी तरह जला हुआ था। मैंने उस इलाके के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।
कई लोगों से बात की। फिर एक बुजुर्ग आदमी ने मुझे एक कहानी सुनाई। करीब 15 साल पहले उसी सड़क पर एक महिला की दुर्घटना में मौत हुई थी। वह मदद के लिए घंटों सड़क किनारे खड़ी रही।
लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की। आखिरकार उसने वहीं दम तोड़ दिया। लोगों का कहना था कि उसकी आत्मा आज भी सड़क किनारे खड़ी दिखाई देती है। वह राहगीरों से लिफ्ट मांगती है।
और उन्हें उसी कब्रिस्तान तक ले जाती है जहाँ उसे दफनाया गया था। मैंने तय किया कि सच जानना होगा। एक महीने बाद मैं फिर उसी सड़क पर गया।
रात के ठीक 1:30 बजे और वह फिर वहाँ थी। उसी जगह। उसी सफेद साड़ी में।
इस बार चेहरा दिखा
मैंने कार नहीं रोकी। लेकिन जैसे ही उसके पास से गुजरा…… उसने अपना चेहरा ऊपर उठाया और पहली बार मैंने उसे साफ देखा।
उसकी आँखें पूरी सफेद थीं। चेहरा जला हुआ था और होंठों पर अजीब मुस्कान थी।
मैंने कार की स्पीड बढ़ा दी।
120……
130……
140……
लेकिन रियर व्यू मिरर में वह अब भी दिखाई दे रही थी। सड़क पर नहीं…… मेरी कार के पीछे दौड़ती हुई।
अचानक मेरी कार नियंत्रण खो बैठी और सड़क किनारे पलट गई।
जब होश आया…… मैं अस्पताल में था।
डॉक्टर ने कहा……। तुम बहुत भाग्यशाली हो। लेकिन मुझे पता था। मैं बचा नहीं था। मुझे छोड़ा गया था।
अस्पताल से निकलने के बाद मुझे एक डायरी मिली। वह उसी औरत की थी। उसका नाम राधा था। डायरी के आखिरी पन्ने में लिखा था।
अगर कोई मेरी मदद कर देता…… तो शायद मैं जिंदा होती।
मुक्ति
मैंने उसकी कहानी अखबार में छाप दी। लोगों को उसके बारे में बताया। उस जगह पर एक छोटा स्मारक बनवाया गया और पहली बार….. उस सड़क पर दुर्घटनाएँ बंद हो गईं।
मैंने सोचा कहानी खत्म हो चुकी है।
लेकिन एक रात…..
फोन में एक पुरानी फोटो अपने आप खुल गई। वही फोटो। पीछे वाली सीट पर बैठी औरत। लेकिन इस बार……
वह मुस्कुरा नहीं रही थी। वह रो रही थी और फोटो के नीचे एक लाइन लिखी थी।
धन्यवाद……….।
उसके बाद वह कभी दिखाई नहीं दी। लेकिन आज भी……
अगर आप उस सड़क से रात में गुजरें…. तो लोग कहते हैं कि कभी-कभी सफेद साड़ी वाली एक औरत दिखाई देती है।
फर्क सिर्फ इतना है। अब वह लिफ्ट नहीं मांगती। बस सड़क किनारे खड़ी होकर आने-जाने वालों को देखती रहती है और शायद…..
किसी का इंतजार करती है।
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