कब्रिस्तान के पास का किराए का घर | Real Horror Story in Hindi (Part 2)

बंद दरवाज़े के पीछे छिपा वह सच, जिसे जानकर हमारी रूह काँप उठी

Part 1 में आपने पढ़ा कि घर के अंदर एक रहस्यमयी बंद दरवाज़ा मिला था, जिस पर लिखा था कब्रिस्तान के पास का किराए का घर | Real Horror Story in Hindi (Part 1)

इसे कभी मत खोलना।

लेकिन इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी जिज्ञासा होती है और वही जिज्ञासा हमारी सबसे बड़ी गलती साबित होने वाली थी।

वह दरवाज़ा खुल गया…..

सुबह होते ही मैंने मकान मालिक को फोन किया। घर में एक बंद कमरा है। उसके बारे में बताइए। कुछ सेकंड तक दूसरी तरफ सन्नाटा रहा। फिर उसने फोन काट दिया। मैंने दोबारा कॉल की।

इस बार उसका नंबर बंद था। अब हमारा शक और बढ़ गया।

राहुल बोला..

भैया.. अंदर कुछ न कुछ ज़रूर है।

मैंने पहले मना किया, लेकिन आखिरकार हम तीनों ने मिलकर ताला तोड़ने का फैसला किया। पुराना जंग लगा ताला हथौड़े की दो चोटों में टूट गया। जैसे ही दरवाज़ा खुला….. एक सड़ी हुई बदबू पूरे घर में फैल गई।

नेहा ने तुरंत अपना मुँह ढक लिया। कमरे के अंदर घुप्प अंधेरा था। टॉर्च की रोशनी अंदर डाली। कमरा लगभग दस साल से बंद लग रहा था। चारों तरफ धूल जमी थी। मकड़ी के जाले लटक रहे थे।

लेकिन एक चीज़ ने हमारा ध्यान खींचा। कमरे के बीचोंबीच एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी रखी थी और उसके सामने दीवार पर एक तस्वीर टंगी हुई थी। तस्वीर देखकर हमारे होश उड़ गए।

वह सुमन शर्मा की तस्वीर थी। ठीक वही औरत…. जिसकी कब्र नंबर 47 में थी।

दीवारों पर लिखी चेतावनियाँ

जब हमने कमरे को ध्यान से देखा तो पता चला कि दीवारों पर कुछ लिखा हुआ था। लाल रंग से। ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने जल्दबाज़ी में लिखा हो।

पहली लाइन थी….

वह वापस आएगी।

दूसरी लाइन….।

उसकी आवाज़ सुनकर दरवाज़ा मत खोलना।

और आखिरी लाइन…..

वह अकेली नहीं है……

नेहा डर के मारे रोने लगी। मैं भी पहली बार घबरा गया था। लेकिन अभी सबसे डरावनी चीज़ मिलनी बाकी थी। कुर्सी के नीचे एक पुरानी डायरी पड़ी थी। उस पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।

मैंने डायरी खोली। यह घर के पुराने किरायेदार की थी। उसका नाम विकास था। डायरी के शुरुआती पन्ने सामान्य थे। लेकिन आखिरी पन्नों में लिखी बातें पढ़कर रोंगटे खड़े हो गए।

उसने लिखा था

पहले मुझे सिर्फ कदमों की आवाज़ सुनाई देती थी। फिर खिड़की पर एक औरत दिखाई देने लगी।

हर रात वह थोड़ा और पास आ जाती है।

आज उसने पहली बार मेरा नाम लेकर पुकारा।

अगर कोई यह डायरी पढ़ रहा है तो यहाँ से भाग जाओ। डायरी का आखिरी पन्ना अधूरा था। उस पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी

वह मेरे पीछे खड़ी है…..

बस। उसके बाद कुछ नहीं।

रात 3:07 का रहस्य

उस रात हम तीनों ने तय किया कि जागते रहेंगे। समय धीरे-धीरे बीत रहा था।

2:45….

2:58….

3:03….

फिर अचानक पूरे घर की बिजली चली गई। अंधेरा। पूरा घर काले साये में डूब गया और तभी…..

ऊपर से किसी औरत के हँसने की आवाज़ आई। धीमी। लेकिन साफ। नेहा चीख पड़ी। राहुल ने टॉर्च जलाई।

घड़ी में समय था

3:07

ठीक उसी समय जब हर रात घटनाएँ होती थीं। फिर ऊपर वाले कमरे का दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

धड़ाम……!

पूरा घर काँप उठा।

मैं और राहुल सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँचे। टॉर्च की रोशनी कमरे में घुमाई। पहले कुछ दिखाई नहीं दिया। फिर अचानक….. कमरे के कोने में कोई खड़ा था। एक औरत।

लंबे काले बाल।

सफेद कपड़े। सिर झुका हुआ।

वह बिल्कुल स्थिर खड़ी थी। मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने टॉर्च सीधी उसकी तरफ की और तभी….. उसने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया। उसका चेहरा वही था

सुमन शर्मा।

लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं। ऐसा लग रहा था जैसे आँखों की जगह सिर्फ अंधेरा हो। फिर उसने मुस्कुराना शुरू किया। एक अस्वाभाविक मुस्कान। जो इंसान की नहीं हो सकती। अगले ही पल टॉर्च बंद हो गई। पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

नीचे से आई चीख

उसी समय नीचे से नेहा की चीख सुनाई दी। हम दोनों भागकर नीचे आए। नेहा ड्रॉइंग रूम के बीच में खड़ी काँप रही थी। उसने दीवार की तरफ इशारा किया। दीवार पर लाल रंग से एक नया संदेश लिखा हुआ था

अब तुम्हारी बारी है…..

हमारी हिम्मत जवाब देने लगी थी। अगले दिन हम सीधे सामने वाले बुज़ुर्ग के घर पहुँचे। उन्होंने हमारी हालत देखी। फिर बोले….

आखिर तुम लोगों ने भी उसे देख लिया। मैंने पूछा..

वह कौन है…?

बुज़ुर्ग ने गहरी साँस ली। फिर जो कहानी उन्होंने सुनाई उसने सब कुछ साफ कर दिया।

करीब 11 साल पहले उस घर में सुमन शर्मा रहती थी। अपने पति के साथ। शुरुआत में सब ठीक था। लेकिन धीरे-धीरे लोगों को घर से चीखने की आवाज़ें आने लगीं। पड़ोसियों को पता चला कि उसका पति उसे बुरी तरह मारता-पीटता था। एक रात अचानक सुमन गायब हो गई।

उसका पति बोला

वह घर छोड़कर चली गई। लेकिन किसी ने उस पर विश्वास नहीं किया। कुछ महीनों बाद…..

घर के पीछे खुदाई के दौरान एक शव मिला। वह सुमन का था। उसकी हत्या की गई थी। बाद में उसे कब्रिस्तान में दफना दिया गया। कब्र नंबर 47 में। लेकिन उसका पति कभी पकड़ा नहीं गया।

कुछ ही दिनों बाद वह भी रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया और तभी से यह सब शुरू हुआ।

आखिरी रात

हमने फैसला कर लिया। सुबह होते ही घर छोड़ देंगे। लेकिन शायद बहुत देर हो चुकी थी। उस रात फिर 3:07 बजे हमारी आँख खुली। इस बार दरवाज़े पर दस्तक नहीं हुई।

बल्कि…..

घर के अंदर कदमों की आवाज़ आने लगी।

टक…..

टक…..

टक…..

जैसे कोई धीरे-धीरे हमारी तरफ बढ़ रहा हो। आवाज़ हमारे कमरे के बाहर आकर रुक गई। फिर दरवाज़ा अपने आप खुल गया।

चरररर…..

दरवाज़े के बाहर सुमन खड़ी थी। इस बार पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। उसकी आँखें सीधे हमारी तरफ देख रही थीं। फिर उसने हाथ उठाया और घर के पीछे की दिशा में इशारा किया। कब्रिस्तान की तरफ।

कब्र नंबर 47

न जाने क्यों…..

उस समय हमें डर से ज्यादा यह महसूस हुआ कि वह हमें कुछ दिखाना चाहती है। हम तीनों उसके पीछे-पीछे चल पड़े। वह धीरे-धीरे कब्रिस्तान की तरफ बढ़ी और कब्र नंबर 47 के पास जाकर रुक गई। फिर अचानक गायब हो गई।

लेकिन जहाँ वह खड़ी थी वहाँ जमीन थोड़ी उभरी हुई दिखाई दे रही थी।

राहुल बोला

यहाँ कुछ दबा हुआ है। हमने अगले दिन पुलिस को सूचना दी। जब खुदाई हुई…. तो सब हैरान रह गए। जमीन के नीचे एक लोहे का बक्सा दबा था। उसमें पुराने कागज़ और कुछ रिकॉर्डिंग्स थीं।

वे सभी सुमन के पति के खिलाफ सबूत थे। उसने हत्या से पहले सब कुछ रिकॉर्ड कर रखा था। कुछ महीनों बाद पुलिस ने केस दोबारा खोला। जांच में कई नई बातें सामने आईं। सुमन के पति की सच्चाई दुनिया के सामने आ गई।

और सबसे अजीब बात…. उस दिन के बाद घर में कोई भी रहस्यमयी घटना नहीं हुई। न कदमों की आवाज़।

न रात 3:07 का आतंक।

न खिड़की पर दिखाई देने वाली वह औरत।

ऐसा लगा जैसे सुमन सिर्फ इंसाफ चाहती थी और जब उसे इंसाफ मिल गया तो उसकी बेचैन आत्मा हमेशा के लिए शांत हो गई। लेकिन आज भी….. जब मैं उस शहर का नाम सुनता हूँ….. तो मुझे वह रात याद आ जाती है।

रात 3:07… जब मैंने पहली बार उसे देखा था और यकीन मानिए….. कुछ यादें इंसान कभी नहीं भूल सकता।

THE END |

कहानी कैसी लगी ? कमेंट करके ज़रूर बताइए।

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