Short Horror Stories in Hindi पढ़ना पसंद है ? आज हम आपके लिए 3 ऐसी डरावनी कहानियाँ लेकर आए हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगी। इन हिंदी हॉरर स्टोरीज़ में भूत-प्रेत, रहस्य और सस्पेंस का ऐसा मेल है जो आपको आखिरी तक बांधे रखेगा।
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ऑटो में चुड़ैल के साथ | Short Horror Story in Hindi

मित्रो मेरा नाम विक्रम है मै गुजरात का रहने वाला हु और पेशे से ग्राफ़िक्स डिज़ाइनर हु | मेरे साथ जो घटना हुई वो मै आपके साथ शेयर करना चाहता हु | दोस्तों एक दिन मेरे बॉस ने मुझे कुछ जरुरी काम से रोक लिया और रात के 1:30 बजे बोला हार्दिक आप को हमारे पेम्पलेट अभी प्रेस पर देने जाना है और दुसरे जो कार्ड्स है उन पर प्रिंटिंग मिस्टेक को चेक करना है रात को 2 बजे में प्रेस जाने के लिए ऑफिस से निकला |
मेने ऑटो वाले को रोककर वहा जाने के लिए कहा | रास्ते में मैंने मोबाइल की टोर्च चालु करके प्रिंटिंग में गलती को चेक करने लग गया | हमारे प्रेस से पहले शिलाज क्रासिंग आया | वहा पर दो औरते खडी थी | मैंने ध्यान नहीं दिया और अपने काम में लगा रहा | उन औरतो ने ऑटो वाले को को क्रासिंग के पार छोड़ने के लिए बोला | ऑटो वाला मान गया और वो दोनों औरते मेरे बाजू में बैठ गयी | जैसे ही क्रासिंग पास आया उसमे से एक औरत वही उतर गयी |
मै इन सब बातो पर ध्यान नहीं दे रहा था | फिर से ऑटो चल पड़ा | अब उस दुसरी औरत ने मेरे पैर पर उसका पाँव रखा और बोलने लगी भैया आपने उस औरत के पाँव देखे मैंने कहा नहीं क्यू क्या हुआ वो बोलने लगी उसके दोनों पाँव उल्टे थे मै बोला तो उसमे क्या हुआ वो बोली मेरे भी दोनों पाँव उल्टे है उसके पांवो की तरफ देखते ही मै और ड्राईवर दोनों बेहोश हो गये और सुबह 4 बजे जब बेहोशी से उठे तो मेरे दोस्त को फ़ोन करके मुझे ले जाने के लिए बुलाया | उस वाकिये के बाद मै 15 दिन तक बीमार रहा | आज भी वो ऑटो में चुड़ैल की घटना को नहीं भूल पाया
स्टेशन से घर तक….. एक डरावनी सच्चाई | Short Horror Story

दिल्ली से उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक निवास लौट रहे थे। ट्रेन काफी लेट हो चुकी थी। वे अपने स्टेशन पर उतरे तो रात के डेढ़ बज चुके थे।
छोटे स्टेशनों पर देर रात को सवारी मिलने में दिक्कत होती है। फिर राकेश का घर शहर के बाहर पड़ता था इसलिए वे रेलवे लाइन के किनारे-किनारे चलने लगे। जैसे ही वे प्लेटफार्म छोड़कर पटरियों के किनारे आए उन्होंने एक युवती को साथ चलते देखा।
उन्होंने पूछा तो उसने बताया कि वह हास्टल से घर आ रही थी ट्रेन लेट होने के कारण परेशानी में पड़ गई। इत्तेफाक से उसका घर उस गुमटी के पास ही था जहां से राकेश के घर का रास्ता निकलता था। उसने कहा कि ठीक है उसे घर पहुंचा कर ही वह आगे बढ़ेगा। उसने बताया कि वह इंटर में पढ़ती है और उसके पिता का नाम अर्जुन सिंह है। उसने पूछा कि क्या आप बैडमिंटन खेलते हैं। राकेश ने कहा-हां, खेलता हूं। उसने बताया कि वह टूर्नामेंट में उसे खेलते हुए देख चुकी है।
रेल लाइन के एक तरफ खेत थे। दूसरी तरफ छिटपुट आबादी। कुछ घर अभी बन ही रहे थे। कुछ घरों से रौशनी आ रही थी। उसके साथ बात करते हुए कब हम रेल फाटक के पास पहुंच गए पता ही नहीं चला। उसने इशारे से राकेश को अपना घर दिखाते हुए कहा कि अब वह चली जायेगी। राकेश ने कहा कि उसे घर तक पहुंचा कर आगे बढ़ेगा। लेकिन उसने कहा अब कोई परेशानी नहीं। अंततः राकेश ने कहा कि वह घर पहुंचने के बाद आवाज़ देगी तभी वह आगे बढ़ेगा। बहरहाल उसने अपने दरवाजे पर पहुंचने के बाद आवाज़ दी। वह अपने रास्ते चल पड़ा।
दो चार दिन बाद राकेश शहर की ओर निकला तो उसके घर के पास से गुजरते हुए उसे लड़की की याद आई। उसने पास के एक दुकानदार से पूछा कि अर्जुन सिंह जी का घर कौन सा है। उसने एक घर की ओर इशारा करते हुए बताया कि गेट के पास जो टहल रहे हैं वही अर्जुन सिंह हैं।
राकेश उनके पास गया और कहा-नमस्ते अंकल।
वे राकेश को पहचानने की कोशिश करने लगे। राकेश ने कहा-अंकल तीन चार दिन पहले मैं रात को स्टेशन से रेलवे लाइन होकर आ रहा था तो आपकी बेटी ममता मेरे साथ आई थी। अब वह कैसी है। अर्जुन सिंह राकेश की बातें खामोशी से सुनते रहे फिर उसे अंदर आने का इशारा किया। हम ड्राइंग रूम में बैठे ही थे कि एक लड़की ट्रे में बिस्किट और पानी रख गई। अर्जुन सिंह ने बताया कि वह उनकी छोटी बेटी शविता है। राकेश ने पूछा ममता कहां है। इसपर अर्जुन सिंह ने दीवार की ओर इशारा किया। वहां ममता की तस्वीर टंगी थी जिसपर माला पहनाया हुआ था। मैं चौंका । अर्जुन सिंह ने बतलायाः दो महीने पहले की बात है।
ममता ट्रेन से से उतरकर रेलवे लाइन से होते हुए पैदल आ रही थी। पीछे से दो भैंसे दौड़ती हुई आईं कुछ लोगों ने शोर मचाया तो ममता ने पीछे मुड़कर देखा। उनसे बचने के लिए वह रेलवे लाइन पर दौड़ गई। उसी वक्त एक ट्रेन आ रही थी जिससे वह कटकर मर गई। यह कहते-कहते उनकी आंखें डबडबा गईं। फिर थोड़ा संयत होकर पूछा-रेखा बहुत हा हंसमुख लड़की थी. हमारे घर की रौनक थी। पढ़ने में बहुत तेज़ थी।
अच्छा बताओ वह तुमसे मिली तो उदास नहीं लग रही थी न…राकेश ने कहा कि वह सामान्य छात्रा की तरह बात कर रही थी। कहीं से ऐसा नहीं लगा कि…राकेश धीरे से उठा और बोला अच्छा अंकल चलता हूं।
अर्जुन सिंह ने कहा-ठीक है बेटे आते रहना। राकेश भावुकता में बहता हुआ बाहर निकला। उसकी आंखों के सामने रेखा का चेहरा नाच रहा था।
रात का पीछा करने वाला साया | Short Horror Stories

नमस्कार मित्रो मेरा नाम आर्यन है और मै उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले का रहने वाला हु | आज जो मै आपको घटना सुनाने जा रहा हु वो मेरे मामा के साथ घटित हुई | उन्होंने मुझे अपनी आप बीती बताई जो आपको बता रहा हु | ये उन दिनों की बात है जब मेरे मामा स्कूल में पढ़ा करते थे | उनका स्कूल घर से बहुत दूर था | हमारे गाँव देवस्थल एक पहाड़ी इलाका है| पहाडी इलाके में जागर लगे रहते है जिनमे लोगो के अंदर देवता आ जाते है |
एक दिन रात को मामा जागर में गए थे और जब रात को वापस आ रहे थे तो रास्ते में एक तालाब आता है | उस तालाब के किनारे पर एक आदमी बैठा हुआ मिला और उसने मेरे मामा से बीडी माँगी | मेरे मामा ने उसकी और ध्यान ना देते हुए आगे बढ़ते जा रहे थे लेकिन वो पीछे बीडी देदे , बीडी देदे कहते हुए आ रहा था | मेरे मामा को पता चल गया कि ये कोई प्रेत या भूत है तो मेरे मामा भी बहुत निडर इंसान थे
वो बस चलते गए और जब उसने पीछा करना बंद नहीं किया तो उन्होंने अपनी जेब से माचिस की तीली निकाली और तीन तीली एक साथ जलाकर पीछे फेक दी तब उस प्रेत ने मेरे मामा का पीछा करना बंद किया | इसलिए मेरा बड़ा भाई हमेशा रात को मुझे माचिस की डिब्बी ले जाने को कहते है
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