हवेली जो साँस लेती थी | रात होते ही हवेली जिंदा हो जाती थी
चाँदनी रात में जागती परछाइयों का अभिशाप वापसी बरसों बाद जब आरव ने अपने गाँव भैरवपुर की पगडंडी पर कदम रखा तो उसे लगा जैसे समय ठहर गया है। लेकिन हवा बदल चुकी थी। गाँव के बाहर पीपल और बरगद के घने पेड़ों के पीछे छिपी वह पुरानी हवेली अब भी खड़ी थी। वही ऊँचे … Read more