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अमावस्या की रात जिसने पूरे गाँव को दहशत में डाल दिया
हर गाँव में एक ऐसी जगह होती है जहाँ जाने से लोग डरते हैं।
हमारे गाँव रामपुरा में वह जगह थी। पुराने तालाब के किनारे खड़ा विशाल पीपल का पेड़। दिन में वह सामान्य दिखाई देता था। लेकिन जैसे ही सूरज ढलता…. उसके आसपास का माहौल बदल जाता।
हवा ठंडी हो जाती। जानवर वहाँ जाने से बचते और लोग कहते थे।
उस पीपल पर डायन रहती है।
मैं इन बातों पर कभी विश्वास नहीं करता था।
लेकिन जो मैंने 2018 की एक अमावस्या की रात देखा….। उसने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी।
गाँव वापसी
करीब दस साल बाद मैं शहर से अपने गाँव लौटा था। दादी की तबीयत खराब थी। इसलिए कुछ दिन उनके साथ रहने का फैसला किया। गाँव पहले जैसा ही था। कच्ची गलियाँ।पुराने घर और दूर दिखाई देता वह विशाल पीपल का पेड़।
उसे देखते ही बचपन की बातें याद आ गईं। जब हम छोटे थे तो बुजुर्ग हमें चेतावनी देते थे।
शाम के बाद पीपल के पास मत जाना।
हम पूछते
क्यों………?
तो जवाब मिलता।
वहाँ कोई रहता है।
लेकिन कोई यह नहीं बताता था कि वह कौन है।
पहली कहानी
एक रात दादी ने मुझे उस पेड़ का रहस्य बताया। करीब 70 साल पहले गाँव में एक लड़की रहती थी। उसका नाम था।
गौरी।
वह बेहद सुंदर थी। लेकिन गाँव के कुछ लोगों ने उस पर झूठा आरोप लगा दिया कि वह डायन है। गाँव वालों ने उसकी एक नहीं सुनी। उसे पीपल के पेड़ से बाँध दिया गया और पूरी रात वहीं छोड़ दिया।
अगली सुबह….. गौरी मृत मिली। मरने से पहले उसने कहा था।
मैं लौटूँगी……….। मैं लौटूँगी……….।
उसकी मौत के कुछ दिनों बाद अजीब घटनाएँ शुरू हो गईं। रात में पेड़ के पास रोने की आवाज़ें सुनाई देतीं। जानवर गायब होने लगे। लोगों को सफेद साड़ी वाली औरत दिखाई देने लगी।
अमावस्या

गाँव वालों का मानना था कि हर अमावस्या की रात गौरी की आत्मा जागती है और किसी न किसी को अपने साथ ले जाती है। मुझे ये सब अंधविश्वास लगता था।
मैंने अपने दोस्तों के सामने कहा।
आज रात मैं उस पीपल के पेड़ के पास जाऊँगा।
सबने मुझे रोकने की कोशिश की। लेकिन मैं नहीं माना। रात के 11 बजे मैं टॉर्च लेकर घर से निकला। आसमान में चाँद नहीं था। चारों तरफ घना अंधेरा फैला हुआ था। जैसे-जैसे मैं पेड़ के पास पहुँच रहा था।
अजीब सन्नाटा बढ़ता जा रहा था। झींगुरों की आवाज़ तक गायब थी। मैं पेड़ से लगभग 20 कदम दूर था। तभी मैंने देखा। पेड़ के नीचे कोई खड़ा था। सफेद साड़ी।
लंबे बाल।
झुका हुआ सिर।
मैंने खुद को समझाया। शायद कोई औरत होगी। लेकिन तभी वह आकृति धीरे-धीरे हवा में गायब हो गई।
पायल
अचानक मेरे कानों में पायल की आवाज़ आई।
छन…..
छन…..
छन…..
लेकिन आसपास कोई नहीं था। तभी किसी ने मेरे पीछे फुसफुसाकर कहा।
अक्षय……
मैं जम गया। क्योंकि मैंने अपना नाम किसी को नहीं बताया था। एक बर्फ जैसी ठंडी हवा मेरे पास से गुज़री और मेरे शरीर का हर रोम खड़ा हो गया।
टॉर्च की रोशनी पेड़ की जड़ों पर पड़ी। वहाँ कुछ चमक रहा था। मैं पास गया। वह एक पुराना चाँदी का कंगन था। अगली सुबह मैंने दादी को कंगन दिखाया। उन्हें देखते ही उनका चेहरा पीला पड़ गया।
उन्होंने कहा……..
यह गौरी का कंगन है।
अधूरा रहस्य
दादी ने बताया कि गौरी वास्तव में डायन नहीं थी। वह निर्दोष थी। उसे झूठे आरोपों में मार दिया गया था। गाँव के जमींदार का बेटा उससे शादी करना चाहता था। गौरी ने इंकार कर दिया।
बदला लेने के लिए उसने अफवाह फैलाई कि गौरी डायन है। मरते समय गौरी को न्याय नहीं मिला। इसीलिए उसकी आत्मा भटक रही थी। मैंने तय किया कि सच्चाई जानकर रहूँगा।
अगली अमावस्या की रात मैं फिर उस पेड़ के पास गया। इस बार मैंने साफ देखा। एक औरत पेड़ के नीचे बैठी रो रही थी। उसके लंबे बाल जमीन तक पहुँच रहे थे। जब उसने चेहरा ऊपर उठाया……
मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। उसकी आँखें पूरी सफेद थीं। लेकिन उनमें दर्द था।
उसने धीरे से कहा…..।
मुझे न्याय चाहिए…….।
उसने पेड़ की जड़ों की ओर इशारा किया और फिर गायब हो गई।
अगले दिन मैंने कुछ लोगों की मदद से वहाँ खुदाई शुरू की। कुछ ही देर में हमें हड्डियाँ मिलीं और साथ ही…… पुराने गहने।
सच सामने
यह गौरी के अवशेष थे। उसे सम्मानपूर्वक दफनाया ही नहीं गया था। जब यह खबर फैली….. गाँव के बुजुर्गों ने स्वीकार किया कि उनके पूर्वजों ने बहुत बड़ा अन्याय किया था।
पूरे गाँव ने मिलकर गौरी के लिए प्रार्थना की। उस रात मैं फिर पेड़ के पास गया। इस बार गौरी दिखाई दी।लेकिन वह रो नहीं रही थी। वह मुस्कुरा रही थी।
उसने धीरे से कहा
धन्यवाद…..
और फिर चाँदनी जैसी रोशनी में बदल गई। उस दिन के बाद पीपल के पेड़ के आसपास कभी कोई अजीब घटना नहीं हुई। कई साल गुजर गए। लोगों ने मान लिया कि कहानी खत्म हो चुकी है।
एक परिवार गाँव में आकर बस गया। उन्होंने पीपल के पास नया घर बनाया। एक रात उस परिवार की छोटी बेटी ने कहा।
माँ बाहर एक दीदी खड़ी हैं…..।
जब परिवार बाहर आया वहाँ कोई नहीं था। लेकिन मिट्टी पर पैरों के निशान बने हुए थे।
आखिरी डायरी
कुछ दिनों बाद मुझे दादी की पुरानी डायरी मिली। उसमें एक ऐसा सच लिखा था जिसे पढ़कर मेरे होश उड़ गए।
डायरी में लिखा था।
गौरी अकेली नहीं मरी थी।
उस रात उसके साथ पाँच और निर्दोष लोगों को भी मार दिया गया था।
आज भी रामपुरा गाँव का वह पीपल का पेड़ खड़ा है। दिन में वह सामान्य दिखाई देता है। लेकिन अमावस्या की रात…… लोग कहते हैं कि कभी-कभी वहाँ पायल की आवाज़ सुनाई देती है और पेड़ के नीचे सफेद साड़ी पहने एक लड़की दिखाई देती है।
फर्क सिर्फ इतना है। अब उसकी आँखों में गुस्सा नहीं….. बल्कि इंतज़ार होता है। जैसे वह किसी ऐसे इंसान का इंतज़ार कर रही हो। जो बाकी अधूरी आत्माओं को भी न्याय दिला सके।
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