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दादी का पुराना घर
साल 2018 की बात है।
मैं पहली बार अपने पिता के गाँव गया था। पंजाब के एक छोटे से गाँव में हमारा पुश्तैनी घर था। जो लगभग 25 सालों से बंद पड़ा था। दादी की मौत के बाद वहाँ कोई रहने नहीं गया।
गाँव के लोग उस घर को मनहूस हवेली कहते थे। पहले मुझे लगा लोग बस डराने के लिए ऐसा बोल रहे होंगे लेकिन जिस दिन मैं वहाँ पहुँचा मुझे समझ आने लगा कि बात सिर्फ अफवाह नहीं थी। घर बहुत पुराना था। दीवारों पर काई जमी हुई थी, खिड़कियाँ टूटी हुई थीं और अंदर घुसते ही अजीब सी बदबू आती थी। जैसे कई सालों से कुछ सड़ रहा हो।
मेरे साथ मेरा दोस्त अमन भी था।
भाई यहाँ रात मत रुकना बाहर खड़े एक बूढ़े आदमी ने कहा। मैं हँस पड़ा।
क्यों बाबा भूत है क्या उस बूढ़े ने मेरी आँखों में देखते हुए कहा
भूत नहीं….. श्राप है।
उसकी आवाज़ सुनकर पहली बार मेरे शरीर में हल्की सिहरन दौड़ गई। घर की सफाई करते समय हमें ऊपर वाली मंज़िल पर एक कमरा मिला जो बाहर से जंजीर से बंद था। अमन ने कहा यार इसे खोलते हैं।
जैसे ही मैंने जंजीर हटाई दरवाज़ा अपने आप धीरे-धीरे खुल गया। अंदर पूरा अंधेरा था। कमरे में धूल की मोटी परत जमी हुई थी। ऐसा लग रहा था जैसे कई सालों से कोई अंदर नहीं आया।
कमरे के बीचोंबीच एक लकड़ी की मेज रखी थी और उस मेज पर एक काली पुरानी डायरी। उस डायरी को देखते ही पता नहीं क्यों मेरे हाथ काँपने लगे। उस पर लाल रंग से लिखा था।
इसे मत पढ़ना।
अमन हँस पड़ा। अब तो जरूर पढ़ेंगे। लेकिन जैसे ही उसने डायरी उठाई….. कमरे का दरवाज़ा जोर से बंद हो गया।
धड़ाम!!!…………
हम दोनों डर गए। अचानक कमरे का तापमान बहुत ठंडा हो गया। मैंने जल्दी से दरवाज़ा खोला और बाहर आ गया लेकिन अमन कुछ सेकंड तक वहीं खड़ा रहा जैसे किसी चीज़ को घूर रहा हो। क्या हुआ ? मैंने पूछा।
वो धीरे से बोला……… अभी किसी ने मेरे कान में कहा मुझे बाहर मत ले जाना।
डायरी का पहला पन्ना
रात को हम नीचे वाले कमरे में बैठे थे। बाहर तेज बारिश हो रही थी। अमन ने डायरी खोली। पहले पन्ने पर लिखा था।
“अगर तुम यह पढ़ रहे हो… तो अब बहुत देर हो चुकी है।”
मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। अगले पन्ने पर तारीख लिखी थी। 17 अक्टूबर 1989 उसमें लिखा था।
“आज मैंने फिर उसे देखा। वो कुएँ के पास खड़ी थी। सफेद कपड़ों में। उसका चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।
उसने कहा — डायरी वापस करो नहीं तो सब मर जाएंगे।
नीचे किसी आदमी के हस्ताक्षर थे।
रघुवीर सिंह
मैंने पिता से कभी यह नाम नहीं सुना था। अमन ने मजाक में कहा लगता है कोई पागल आदमी था। तभी ऊपर वाले कमरे से किसी चीज़ के गिरने की आवाज आई।
ठक!!!…………
हम दोनों चुप हो गए। घर में हमारे अलावा कोई नहीं था।
आधी रात का साया
करीब 1 बजे मैं सो रहा था कि अचानक मेरी आँख खुल गई। कमरे में अजीब सी फुसफुसाहट गूंज रही थी। पहले लगा सपना होगा लेकिन आवाज़ साफ थी। डायरी वापस करो…..।मैंने देखा अमन बिस्तर पर नहीं था। मेरा गला सूख गया।
मैंने मोबाइल की फ्लैशलाइट ऑन की और बाहर निकला। ऊपर वाले कमरे की लाइट जल रही थी। मैं धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ा। दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर जो मैंने देखा वो आज तक नहीं भूल पाया। अमन जमीन पर बैठा था।
उसके सामने डायरी खुली हुई थी और वो किसी से बात कर रहा था। लेकिन कमरे में उसके अलावा कोई नहीं था।
अमन…..? मैंने डरते हुए कहा । वो धीरे-धीेरे मेरी तरफ मुड़ा। उसकी आँखें पूरी काली लग रही थीं। उसने फुसफुसाकर कहा वो आ गई है……।
अचानक कमरे के कोने में खड़ी एक औरत दिखाई दी। सफेद कपड़े, लंबे बाल और चेहरा पूरी तरह जला हुआ। मेरे हाथ से मोबाइल गिर गया। जब मैंने दोबारा ऊपर देखा वहाँ कोई नहीं था। अमन जोर-जोर से हँसने लगा।
अगली सुबह हम गाँव के सबसे बुजुर्ग आदमी हरनाम चाचा के पास गए। जैसे ही उन्होंने डायरी देखी उनका चेहरा पीला पड़ गया। उन्होंने तुरंत कहा इसे यहाँ से ले जाओ। मैंने पूछा ये क्या है ?
हरनाम चाचा कुछ देर चुप रहे फिर बोले रघुवीर सिंह इस गाँव का जमींदार था। बहुत क्रूर आदमी। उसने एक औरत पर काला जादू करने का आरोप लगाया था। फिर……?
पूरा गाँव इकट्ठा हुआ और उसे जिंदा जला दिया गया। मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मरते समय उसने कहा था। जिसने मुझे जलाया उसका पूरा खानदान खत्म हो जाएगा। मैंने घबराकर पूछा
रघुवीर का क्या हुआ…… ? हरनाम चाचा की आवाज काँपने लगी। तीन दिन बाद वो अपने कमरे में मरा मिला। उसकी आँखें बाहर निकली हुई थीं और दीवार पर खून से लिखा था।
डायरी श्रापित है।
अजीब घटनाएँ शुरू
उस रात से सब बदल गया। घर में हर समय किसी के चलने की आवाजें आने लगीं। कभी ऊपर से रोने की आवाज आती कभी कोई दरवाज़ा अपने आप खुल जाता। लेकिन सबसे डरावनी बात अमन के साथ हो रही थी।
वो धीरे-धीरे बदलने लगा। कभी घंटों चुप बैठा रहता। कभी अकेले हँसने लगता। एक रात मैंने उसे आईने के सामने खड़े देखा। वो खुद से बात कर रहा था। मैंने डायरी नहीं ली मुझे छोड़ दो…..। अचानक आईने में उसका चेहरा बदल गया।
कुछ सेकंड के लिए ऐसा लगा जैसे किसी औरत का जला हुआ चेहरा दिखाई दिया। मैं डरकर पीछे हट गया और तभी आईना अपने आप टूट गया। अगले दिन मैंने तय किया कि डायरी पूरी पढ़नी होगी। उसके आखिरी पन्नों में लिखा था।
वो अब मेरे पीछे आ चुकी है।
रात को मेरी छाती पर बैठ जाती है।
उसकी जली हुई त्वचा की बदबू पूरे कमरे में भर जाती है।
उसने कहा है…….
जब तक डायरी जलेगी नहीं श्राप खत्म नहीं होगा।
नीचे आखिरी लाइन थी।
अगर कोई यह पढ़ रहा है तो देर मत करना।
उस पन्ने पर खून जैसे धब्बे लगे हुए थे। मैंने तुरंत फैसला किया कि डायरी जला देंगे।
कुएँ के पास
गाँव के बाहर वही पुराना कुआँ था जहाँ उस औरत को जलाया गया था। रात के लगभग 11 बजे हम वहाँ पहुँचे। हवा बहुत तेज चल रही थी। मैंने डायरी पर मिट्टी का तेल डाला।
जैसे ही माचिस जलाई। पीछे से किसी औरत की चीख सुनाई दी। मैंने पलटकर देखा। कुएँ के पास वही सफेद कपड़ों वाली औरत खड़ी थी। उसका चेहरा पूरी तरह जला हुआ था। अमन अचानक चिल्लाने लगा…………
मत जलाओ वो मुझे मार देगी,……..। लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। मैंने डायरी में आग लगा दी और उसी पल चारों तरफ इतनी तेज चीख गूंजी कि मेरे कान सुन्न हो गए। हवा अचानक रुक गई और वो औरत धीरे-धीरे धुएँ में बदलने लगी।
लेकिन जाते-जाते उसने मेरी तरफ देखा उसकी आँखें पूरी काली थीं और उसने सिर्फ एक बात कही श्राप खत्म नहीं हुआ……..।
उस घटना के बाद हम शहर लौट आए। कुछ दिनों तक सब सामान्य रहा। फिर एक रात अमन का फोन आया। उसकी आवाज काँप रही थी। वो अभी भी मेरे कमरे में आती है। मैंने कहा।
तू शांत हो जा सब खत्म हो चुका है। वो रोने लगा।
नहीं….. वो कहती है किसी ने आखिरी पन्ना नहीं पढ़ा। फोन कट गया। अगले दिन खबर मिली। अमन अपने कमरे में मृत मिला। पुलिस ने कहा उसने आत्महत्या की। लेकिन मैं जानता था वो सच नहीं था। क्योंकि उसकी दीवार पर खून से लिखा था।
डायरी वापस करो।
आखिरी सच
अमन की मौत के बाद मैं फिर गाँव गया। इस बार अकेला। मैं सीधे उस बंद कमरे में गया। कमरा पहले से भी ज्यादा ठंडा था। मुझे लगा सब खत्म हो चुका होगा। लेकिन मेज पर कुछ रखा था।
एक नई डायरी। काली….. पुरानी…. और धूल से भरी हुई। उस पर लाल अक्षरों में लिखा था।
भागने से श्राप खत्म नहीं होता…………।
मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने धीरे से डायरी खोली। पहले पन्ने पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी।
अब अगली कहानी तुम्हारी होगी…………..।
और नीचे मेरा नाम लिखा था। उस रात के बाद मेरी जिंदगी कभी सामान्य नहीं रही। आज भी हर रात 3 बजे मेरे कमरे का दरवाज़ा अपने आप खुल जाता है। कभी-कभी जली हुई त्वचा की बदबू आती है और कई बार मेरे कानों में कोई फुसफुसाता है।
डायरी वापस करो……….।
अगर आपको कभी किसी पुराने घर में काली डायरी मिले। तो उसे खोलने की गलती मत करना। क्योंकि कुछ श्राप… पढ़ने से शुरू होते हैं।
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