वह बस स्टॉप जहाँ उतरने वाला इंसान कभी वापस नहीं आता था

आखिरी बस

राघव को उस शहर में नौकरी करते हुए लगभग दो साल हो चुके थे। रोज़ की तरह उस दिन भी वह शाम की आखिरी बस से घर लौट रहा था। यह कोई सुनसान या पहाड़ी इलाका नहीं था। सड़क के दोनों तरफ दुकानें, छोटे कारखाने और कुछ पुराने मकान थे। बस भी रोज़ की तरह यात्रियों से भरी हुई थी।

उसका रूट शहर से बाहर निकलते समय एक पुराने बस स्टॉप से होकर गुजरता था। उस बस स्टॉप का नाम था, बरगद मोड़

बस वहाँ आमतौर पर नहीं रुकती थी। लेकिन उस दिन अचानक ड्राइवर ने ब्रेक लगा दिया। राघव ने खिड़की से बाहर देखा। सड़क के किनारे एक टूटा हुआ शेड था। उसके पीछे बहुत पुराना बरगद का पेड़ खड़ा था। शेड के नीचे एक औरत खड़ी थी।

सफेद साड़ी।

लंबे बाल।

चेहरा नीचे झुका हुआ।

राघव ने सोचा, शायद किसी को बस का इंतजार है। तभी ड्राइवर ने पीछे मुड़कर कहा। कोई यहाँ से उतरेगा नहीं। एक यात्री ने पूछा, क्यों ?

ड्राइवर ने जवाब नहीं दिया। बस कुछ सेकंड रुकी और फिर चल पड़ी। राघव ने पीछे की खिड़की से देखा। वह औरत अब भी वहीं खड़ी थी। लेकिन सड़क पर उसकी परछाई नहीं थी। अगले दिन राघव ने ड्राइवर से उस बस स्टॉप के बारे में पूछा।

ड्राइवर का नाम सुरेश था। वह कुछ देर चुप रहा। फिर बोला। बरगद मोड़ पहले बस स्टॉप था। करीब दस साल पहले वहाँ बसें रुकना बंद हो गईं।

क्यों ?

लोगों की शिकायतें आने लगी थीं।

कैसी शिकायतें ?

सुरेश ने बस चलाते हुए कहा। कुछ लोग वहाँ उतरते थे…. फिर घर नहीं पहुँचते थे।

मतलब ?

सुरेश ने उसकी तरफ देखा। मतलब ये कि आदमी बस से उतरता था लेकिन उसके बाद उसका कोई पता नहीं चलता था। राघव ने बात को मजाक समझा। लेकिन उसी शाम उसे एक पुराना टिकट मिला। वह टिकट उसकी सीट के नीचे पड़ा था। उस पर तारीख धुंधली थी। लेकिन destination साफ लिखा था।

बरगद मोड़।

राघव ने टिकट पलटा। पीछे पेन से एक लाइन लिखी थी।

अगर वह पूछे कि कहाँ उतरना है, तो अपना असली घर मत बताना।

राघव की हँसी गायब हो गई।

सफेद साड़ी वाली औरत

कुछ दिनों तक राघव ने इस बात को भूलने की कोशिश की। फिर एक शाम बस में भीड़ कम थी। सिर्फ आठ-दस यात्री थे। बस बरगद मोड़ के पास पहुँची। इस बार बस नहीं रुकी। लेकिन राघव ने साफ देखा कि वही सफेद साड़ी वाली औरत सड़क के किनारे खड़ी थी। बस तेज गति से आगे निकल गई।

कुछ सेकंड बाद पीछे की सीट पर बैठे एक बूढ़े आदमी ने पूछा।

आज भी दिखी ?

राघव ने चौंककर उसकी तरफ देखा।

आप उसे जानते हैं ?

बूढ़े ने सिर हिलाया।

जानता नहीं…. देखता हूँ।

कौन है वो ?

बूढ़े ने धीरे से कहा। लोग उसे डायन कहते हैं।

राघव ने पूछा क्या करती है ?

बूढ़ा खिड़की से बाहर देखने लगा।

कुछ नहीं।

कुछ नहीं ?

बस पूछती है, कहाँ उतरना है ?

और ?

गलत जवाब देने वाला उतर जाता है।

राघव ने पूछा गलत जवाब मतलब ?

बूढ़े ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। जिसे अपने घर वापस नहीं जाना होता…. वही वहाँ उतरता है।

कुछ दिनों बाद राघव के ऑफिस में काम करने वाला एक कर्मचारी गायब हो गया। नाम था मनोज। वह भी उसी बस रूट से घर जाता था। पुलिस में रिपोर्ट हुई। परिवार ने हर जगह तलाश की। उसका फोन आखिरी बार बरगद मोड़ के पास बंद हुआ था।

राघव के मन में डर बैठ गया। उसने सुरेश से फिर पूछा। सुरेश ने इस बार कुछ नहीं छिपाया। मनोज ने खुद उतरने को कहा था।

क्यों ?

उसने कहा था कि कोई औरत उसे घर का रास्ता दिखाएगी।

राघव के शरीर में सिहरन दौड़ गई।

आपने उसे रोका नहीं ?

सुरेश ने कहा,

मैंने कहा था मत उतरना।

फिर ?

वह मुस्कुराया और बोला मुझे अपना रास्ता पता है।’

बस में कुछ देर खामोशी रही। फिर सुरेश ने कहा। उसके बाद मैंने उसे कभी नहीं देखा।

एक सप्ताह बाद बारिश के कारण सड़क पर जाम लग गया। बस बरगद मोड़ के पास रुक गई। राघव ने खिड़की से बाहर देखा। शेड के नीचे वही औरत खड़ी थी। इस बार वह बस की तरफ देख रही थी। सुरेश ने बस आगे बढ़ाने की कोशिश की। इंजन बंद हो गया। बस में बैठे सभी लोग चुप हो गए। औरत धीरे-धीरे बस के दरवाज़े तक आई।

दरवाज़ा अपने आप खुल गया। वह अंदर चढ़ी। किसी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। वह सीधे पीछे की सीट तक गई। राघव के पास आकर रुक गई। उसने सिर उठाया। चेहरा साधारण था। इतना साधारण कि उसे देखकर डरने की बजाय अजीब बेचैनी होती थी।

उसने पूछा

कहाँ उतरना है ?

राघव चुप रहा।

औरत ने फिर पूछा।

कहाँ उतरना है ?

राघव ने कहा।

घर।

औरत कुछ सेकंड उसे देखती रही।

फिर मुस्कुराई।

कौन-सा घर ?

राघव के पास जवाब नहीं था। उसने अपना मोबाइल निकाला। लेकिन फोन में नेटवर्क नहीं था। बस के बाकी यात्री बिल्कुल स्थिर बैठे थे। जैसे सबको पता था कि क्या होने वाला है। अचानक औरत आगे बढ़ी। बस का दरवाज़ा खुला। उसने पीछे मुड़कर राघव की तरफ देखा।

चलो।

राघव ने सिर हिला दिया।

नहीं।

औरत पहली बार मुस्कुराई नहीं। वह बस से उतर गई। दरवाज़ा बंद हुआ। इंजन तुरंत चालू हो गया।

बरगद मोड़ का सच

अगले दिन राघव ने उस जगह को दिन में देखने का फैसला किया। बरगद मोड़ पर कोई बस स्टॉप नहीं था। सिर्फ पुराना बरगद का पेड़ था। शेड भी नहीं था। उसे पास की चाय की दुकान मिली। दुकानदार से पूछने पर उसने कहा।

यहाँ बस स्टॉप हुआ करता था।

कब बंद हुआ ?

बहुत साल पहले।

क्यों ?

दुकानदार ने कहा लोग कहते थे, वहाँ एक औरत यात्रियों से बात करती थी।

कौन औरत ?

किसी को नहीं पता।

डायन ?

दुकानदार हँसा नहीं।

उसने बस इतना कहा उसे जो नाम देना है दे दो। लेकिन एक बात सच है।

क्या ?

जिसने उसके साथ बस से उतरकर रास्ता पकड़ा…. वह वापस नहीं आया।

राघव ने पूछा क्या किसी की लाश मिली ?

दुकानदार ने सिर हिलाया।

कभी नहीं।

फिर वे लोग गए कहाँ ?

दुकानदार ने बरगद की तरफ देखा। शायद कहीं नहीं गए।

आखिरी सफर

राघव ने उस रूट की आखिरी बस पकड़ने का फैसला किया। वह जानना चाहता था कि मनोज और बाकी लोगों के साथ क्या हुआ। बस में इस बार सुरेश ड्राइवर नहीं था। नया ड्राइवर था। राघव ने पूछा बरगद मोड़ पर बस रुकती है ?

ड्राइवर ने कहा नहीं।

बस आगे बढ़ती रही। कुछ देर बाद खिड़की के बाहर वही बरगद दिखाई दिया। लेकिन इस बार वहाँ एक बस खड़ी थी। पुरानी। जंग लगी हुई और उसके अंदर कई लोग बैठे थे। राघव ने ध्यान से देखा। उनमें मनोज भी था। मनोज ने राघव को देख लिया। उसने शीशे पर हाथ रखा। उसके होंठ हिले,

मत उतरना।

राघव की सांस अटक गई। तभी उसके पीछे से आवाज़ आई।

कहाँ उतरना है ?

वही औरत। राघव ने पीछे मुड़कर देखा। वह उसकी सीट के पीछे खड़ी थी। इस बार राघव ने कोई जवाब नहीं दिया। औरत ने कुछ देर इंतजार किया। फिर धीरे से बोली अगर तुम्हें अपना घर पता है…. तो तुम बच जाओगे।

राघव ने पूछा मनोज कहाँ है ?

औरत ने खिड़की की तरफ देखा। वह अपने घर का रास्ता भूल गया। क्या आप उसे वापस भेज सकती हैं ?

औरत ने कहा मैं किसी को रोकती नहीं। फिर लोग जाते क्यों नहीं ?

वह पहली बार उसकी तरफ देखकर बोली।

क्योंकि कुछ लोग जाना ही नहीं चाहते।

अगले ही पल बस बरगद मोड़ से आगे निकल गई। पुरानी बस गायब थी और वह औरत भी।

वह आज भी वहाँ खड़ी है

राघव ने उस दिन के बाद वह बस रूट छोड़ दिया। मनोज कभी वापस नहीं मिला। पुलिस के रिकॉर्ड में उसकी गुमशुदगी आज भी दर्ज है। बरगद मोड़ पर अब नया हाईवे बन चुका है। पुराना पेड़ काट दिया गया है। बस स्टॉप का नाम भी कहीं नहीं मिलता। लेकिन स्थानीय बस ड्राइवरों में आज भी एक बात कही जाती है।

अगर किसी यात्री को रास्ते में अचानक एक पुराना बस स्टॉप दिखाई दे, तो ड्राइवर बस नहीं रोकता। क्योंकि वह बस स्टॉप हर किसी को दिखाई नहीं देता और अगर कभी वहाँ सफेद साड़ी पहने कोई औरत खड़ी दिखाई दे। तो उससे बात नहीं करनी चाहिए।

क्योंकि वह डराने के लिए आपका रास्ता नहीं रोकती। वह सिर्फ एक सवाल पूछती है।

कहाँ उतरना है ?

राघव ने आज तक उस सवाल का मतलब नहीं समझा। लेकिन उसे एक बात जरूर पता है। जिस रात उसने उस औरत से कहा था घर वह सही जवाब नहीं था।

क्योंकि वह औरत मंज़िल नहीं पूछ रही थी। वह पूछ रही थी।

तुम्हें सच में वापस कहाँ जाना है ?

और शायद यही वजह है कि बरगद मोड़ पर उतरने वाले लोग कभी वापस नहीं आते। वे कहीं गायब नहीं होते। वे बस उस रास्ते पर चले जाते हैं जहाँ से लौटने की इच्छा ही धीरे-धीरे खत्म हो जाती है।

THE END |

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