यह कहानी आपको अंत तक बेचैन कर देगी। कभी-कभी बच्चों को ऐसी चीज़ें दिखाई देती हैं जिन्हें बड़े लोग नहीं देख पाते। लेकिन अगर कोई बच्चा अचानक आपको देखकर कहे “अंकल, आपके पीछे कौन खड़ा है ? तो क्या आप पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत करेंगे ?
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मासूम आवाज़ जिसने सब बदल दिया
मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूँ। यह घटना लगभग तीन साल पहले की है, लेकिन आज भी जब उसे याद करता हूँ तो पूरे शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। उस समय मेरी नाइट शिफ्ट चल रही थी। रात के करीब साढ़े दस बजे मैं ऑफिस से निकला। घर पहुँचने के लिए मुझे मेट्रो से उतरकर लगभग पंद्रह मिनट पैदल चलना पड़ता था।
उस रास्ते पर एक छोटा-सा पार्क था। दिन में वहाँ बच्चों की भीड़ रहती लेकिन रात को पूरा इलाका सुनसान हो जाता था। उस रात भी हल्की बारिश के बाद सड़कें गीली थीं। हवा में अजीब-सी ठंडक थी। मैं मोबाइल देखते हुए चल रहा था कि सामने एक परिवार दिखाई दिया। पति-पत्नी और उनके साथ लगभग पाँच साल का एक छोटा बच्चा।
जैसे ही मैं उनके पास से गुजरने लगा। वह बच्चा अचानक मुझे घूरने लगा। मैं मुस्कुराया। लेकिन अगले ही पल उसने अपनी माँ का हाथ कसकर पकड़ लिया और काँपती आवाज़ में बोला।
मम्मी…. अंकल के पीछे कौन खड़ा है ?
मैंने सोचा शायद मज़ाक कर रहा होगा। उसकी माँ ने तुरंत कहा। चुप रहो बेटा ऐसी बातें नहीं करते। लेकिन बच्चा लगातार मेरी तरफ देखे जा रहा था। फिर उसने वही बात दोहराई।
मम्मी…. वो अंकल के पीछे वाली आंटी मुझे देख रही है।
मेरे कदम वहीं रुक गए। मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा। पीछे कोई नहीं था। मैं हल्का-सा हँस दिया। शायद बच्चा कल्पना कर रहा होगा। लेकिन जब मैं आगे बढ़ा तो पीछे से उसकी आवाज़ फिर आई।
अंकल…. वो आपके साथ ही जा रही है।
उसकी आवाज़ में डर साफ़ सुनाई दे रहा था। उस रात पहली बार मुझे बिना वजह बेचैनी महसूस हुई।
खाली सड़क…. लेकिन अकेला नहीं
मैं तेज़-तेज़ चलने लगा। बार-बार ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे पीछे कदम मिला रहा हो। जब भी रुकता। आवाज़ बंद हो जाती। चलता….
तो फिर वही हल्की पदचाप। मैंने खुद को समझाया। राहुल ज़्यादा हॉरर वीडियो देखना बंद कर। घर पहुँचते-पहुँचते रात के ग्यारह बज चुके थे। दरवाज़ा खोला।
कमरे में घुसते ही अजीब-सी ठंडी हवा चली। हालाँकि सारी खिड़कियाँ बंद थीं। मैंने कपड़े बदले और सोने चला गया। करीब रात के दो बजे मेरी आँख खुल गई। ऐसा लगा जैसे कमरे में कोई मौजूद हो। मैंने अंधेरे में इधर-उधर देखा। कुछ नहीं।
लेकिन तभी कमरे के कोने में रखी कुर्सी अपने आप धीरे-धीरे हिलने लगी। मैं बिस्तर पर बैठ गया। कुछ सेकंड बाद वह अपने आप रुक गई। मैंने सोचा शायद हवा होगी। लेकिन तभी मेरे कान के बिल्कुल पास किसी औरत की बहुत धीमी आवाज़ आई।
तुमने पीछे क्यों देखा था…..।
मैं बिजली की तरह उठ बैठा। कमरे में कोई नहीं था। उस रात मैं सुबह होने तक सो नहीं पाया।
अगले कुछ दिनों में सब कुछ बदल गया। घर की लाइटें अपने आप जलने-बुझने लगीं। बाथरूम का नल रात में अपने आप खुल जाता। मोबाइल बार-बार अपने आप कैमरा खोल देता। एक रात तो हद हो गई। मैंने मोबाइल उठाया। फ्रंट कैमरा पहले से ऑन था। स्क्रीन पर मेरा चेहरा दिखाई दे रहा था।
लेकिन मेरे पीछे एक धुंधली औरत खड़ी थी। मैंने तुरंत पीछे देखा। कमरा खाली था। फिर स्क्रीन देखी। वहाँ भी कुछ नहीं था। मैंने खुद को समझाया। फोन का ग्लिच होगा। लेकिन अब डर मेरे अंदर घर कर चुका था।
पड़ोस की दादी
मेरे सामने वाले फ्लैट में एक बुज़ुर्ग दादी रहती थीं। एक सुबह उन्होंने मुझे रोक लिया। उन्होंने बिना किसी भूमिका के पूछा।
बेटा…. तू रात को किस औरत को लेकर आता है ?
मैं हँस पड़ा। मैं तो अकेला रहता हूँ।
उनका चेहरा एकदम गंभीर हो गया। उन्होंने कहा। दो रात से मैंने तेरे पीछे सफेद कपड़ों वाली एक औरत देखी है। मेरे हाथ से चाय का कप लगभग गिर गया। मैंने उन्हें उस बच्चे वाली बात बताई।
उन्होंने बस एक बात कही। कुछ चीज़ें बच्चों को पहले दिखाई देती हैं। उस दिन पहली बार मुझे लगा। शायद यह सब मेरी कल्पना नहीं था। उस रात मैंने अपने पुराने मोबाइल की गैलरी देखनी शुरू की।
शायद मन बहल जाए। एक फोटो पर मेरी नज़र टिक गई। यह फोटो उसी रात की थी। जब बच्चा मिला था। मैंने याद करने की कोशिश की। मुझे याद नहीं था कि मैंने उस रात कोई सेल्फी ली थी। फोटो ज़ूम की।
मैं सामने था। लेकिन पीछे एक धुंधली आकृति दिखाई दे रही थी। सफेद कपड़े।
झुका हुआ सिर। चेहरा बिल्कुल साफ़ नहीं था। मेरे हाथ काँपने लगे। मैंने फोटो अपने दोस्त अमन को भेजी। उसका जवाब आया।
भाई…. तेरे पीछे कौन है ?
मैंने बिना जवाब दिए मोबाइल बंद कर दिया। करीब एक हफ्ते बाद मैं उसी रास्ते से गुजर रहा था।
वही पार्क।
वही जगह और संयोग से वही बच्चा फिर दिखाई दिया। इस बार उसने मुझे देखते ही अपनी आँखें बंद कर लीं। मै उसके पास गया। धीरे से पूछा बेटा….. उस दिन तुमने क्या देखा था ?
वह कुछ सेकंड चुप रहा। फिर बोला। वो आंटी अभी भी आपके पीछे खड़ी हैं।
मेरा गला सूख गया। मैंने पूछा। क्या चाहती हैं ?
बच्चा रोने लगा। फिर बोला।
वो कह रही हैं…. इन्हें मत छोड़ो….
इतना कहकर उसने मेरी तरफ देखना बंद कर दिया। उसकी माँ उसे तुरंत वहाँ से ले गई। लेकिन जाते-जाते उसने एक बार पीछे मुड़कर मुझे देखा। उसकी आँखों में वही डर था।
उस रात मैं सो नहीं पाया। मैंने उस रास्ते के बारे में इंटरनेट पर खोज शुरू की। काफी देर बाद मुझे एक पुरानी खबर मिली। करीब दस साल पहले उसी पार्क के पास एक सड़क दुर्घटना हुई थी। एक महिला की वहीं मौत हो गई थी। खबर के साथ उसकी धुंधली तस्वीर भी थी। मैंने जैसे ही फोटो देखी। मेरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।
वह चेहरा उसी धुंधली आकृति जैसा था जो मेरी तस्वीर में दिखाई दे रही थी। लेकिन बात यहीं खत्म नहीं हुई। खबर में लिखा था।
दुर्घटना के बाद कई लोगों ने रात में उस महिला के दिखाई देने का दावा किया था।
मैंने तुरंत लैपटॉप बंद कर दिया।
आखिरी रात
उस घटना के कुछ दिन बाद मैंने नौकरी छोड़ दी और दूसरा घर ले लिया। सोचा सब खत्म हो जाएगा। लेकिन नई जगह पहली ही रात करीब तीन बजे मेरी नींद खुली। कमरे में पूरी खामोशी थी।
तभी मेरे कान के पास एक बच्चे की बहुत धीमी आवाज़ आई।
अंकल….
मैंने डरते हुए आँखें खोलीं। कमरा खाली था। फिर वही आवाज़
वो अभी भी आपके पीछे खड़ी हैं…..
मैंने हिम्मत करके पीछे देखने की कोशिश की लेकिन गर्दन जैसे जाम हो गई। कुछ सेकंड बाद कमरे का आईना अपने आप हिलने लगा और आईने में मेरे पीछे एक सफेद साया साफ़ दिखाई दे रहा था।
उसका चेहरा धीरे-धीरे ऊपर उठा। वह मुस्कुराई और फिर आईने पर अपने आप एक वाक्य उभर आया।
अब तुम्हें भी कोई बच्चा ही देख पाएगा…..
अगली सुबह जब मैं उठा। आईना बिल्कुल साफ़ था। उस पर कुछ भी लिखा नहीं था। मैंने उस दिन के बाद कभी रात में अकेले चलना बंद कर दिया। लेकिन आज भी जब किसी सड़क पर कोई छोटा बच्चा अचानक मुझे घूरने लगता है। तो मेरे कदम अपने आप रुक जाते हैं। क्योंकि मुझे हमेशा डर रहता है।
कि कहीं वह फिर से वही सवाल न पूछ दे।
अंकल….. आपके पीछे कौन खड़ा है ?
अगर एक छोटा बच्चा अचानक आपको देखकर कहे अंकल…. आपके पीछे कौन खड़ा है और जब आप पीछे मुड़कर देखें तो वहाँ कोई भी न हो…. तो क्या आप यकीन करेंगे कि वह सिर्फ़ बच्चे की कल्पना थी या फिर सच में कोई आपके साथ चल रहा था ?
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