रात की शिफ्ट में ऑफिस में चुड़ैल | डरावनी कहानी

मैंने उस ऑफिस में लगभग डेढ़ साल काम किया था। ऑफिस बहुत बड़ा नहीं था। एक चार मंज़िला बिल्डिंग की तीसरी मंज़िल पर हमारी कंपनी का ऑफिस था। करीब पचास लोग काम करते थे। दिन में वहाँ हमेशा चहल-पहल रहती थी, लेकिन शाम के बाद माहौल एकदम बदल जाता था।

खासकर रात के समय। मैं अक्सर देर तक रुककर काम करता था इसलिए मुझे रात के ऑफिस से डर नहीं लगता था। कम से कम उस रात तक तो नहीं लगता था।

नई नौकरी और पहली अजीब बात

मेरा नाम अमित है। मैं एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी में काम करता था। मेरी ड्यूटी सुबह 10 से शाम 7 बजे तक थी, लेकिन काम कभी समय पर खत्म नहीं होता था। उस समय कंपनी में एक बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा था। इसलिए महीने के आखिरी दिनों में हमें रात 10-11 बजे तक रुकना पड़ता था।

उस दिन भी ऑफिस में मैं, मेरा दोस्त रोहित और एक लड़की नेहा थे। करीब साढ़े दस बजे नेहा ने अपना बैग उठाया और बोली तुम लोग निकलोगे या आज यहीं सोने का इरादा है ?

रोहित हंसते हुए बोला अमित को छोड़कर चली जा। ये तो रात में भी Excel खोलकर बैठा रहेगा।

मैंने उसे गाली दी और हंसने लगा।

नेहा चली गई। करीब पंद्रह मिनट बाद रोहित भी चला गया।

मैं अकेला रह गया। तभी पहली बार मुझे ऑफिस के पीछे वाले कॉरिडोर से किसी के चलने की आवाज सुनाई दी।

ठक…. ठक…. ठक….

मैंने सोचा शायद सिक्योरिटी वाला होगा। कुछ देर बाद आवाज फिर आई।

ठक…. ठक…. ठक….

इस बार आवाज मेरे कमरे के पास आकर रुक गई। मैंने दरवाजे की तरफ देखा। कोई नहीं था। मैंने सोचा शायद आवाज बाहर सड़क से आई होगी। मैं वापस कंप्यूटर पर काम करने लगा। तभी मेरे फोन पर WhatsApp का notification आया। मैसेज रोहित का था।

भाई निकल जाना। आज अकेला मत रुकना।

मैंने हंसते हुए जवाब दिया,

क्यों ? भूत देखा क्या ?

उसने करीब एक मिनट तक कोई जवाब नहीं दिया। फिर सिर्फ इतना लिखा

तुझे नहीं बताया था क्या ?

मैंने पूछा…. क्या ?

उसका जवाब आया।

तीसरी मंज़िल पर रात में कोई और भी रहता है।

मैंने इसे मजाक समझा। लेकिन उस समय मुझे नहीं पता था कि रोहित मजाक नहीं कर रहा था।

करीब 11:47 हो चुके थे। मैंने अपना काम बंद किया और कंप्यूटर shutdown करने लगा। तभी अचानक ऑफिस की सारी lights बंद हो गईं। पूरी मंज़िल अंधेरे में डूब गई। मैं कुर्सी से उठ गया।

क्या हो गया ?

बाहर corridor में भी अंधेरा था। मैंने मोबाइल की flashlight ऑन की। तभी मुझे दूर reception के पास एक हल्की सी आवाज सुनाई दी। किसी महिला के रोने की आवाज। बहुत धीमी। मैं कुछ सेकंड तक वहीं खड़ा रहा। फिर आवाज दोबारा आई। इस बार साफ सुनाई दिया।

कोई है ?

मेरे शरीर में अजीब सी झुरझुरी हुई। मैंने सोचा शायद कोई महिला सिक्योरिटी गार्ड होगी। मैं धीरे-धीरे reception की तरफ जाने लगा। मोबाइल की रोशनी आगे कर रखी थी। जैसे ही मैं reception के पास पहुंचा रोने की आवाज बंद हो गई।

मैंने चारों तरफ देखा। कोई नहीं था। फिर अचानक reception पर रखा ऑफिस का landline फोन बज उठा।

ट्रिन…. ट्रिन…. ट्रिन….

मैं डर गया। इतनी रात में कौन फोन कर रहा था ?

मैंने फोन उठा लिया।

Hello ?

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही। फिर एक महिला की बहुत धीमी आवाज आई।

आप अभी भी ऑफिस में हैं ?

मैंने कहा।

जी…. कौन बोल रहा है ?

कोई जवाब नहीं आया। मैंने दोबारा पूछा

Hello ?

फिर वही आवाज आई।

आपको यहाँ नहीं रुकना चाहिए।

मेरे हाथ से लगभग फोन गिर गया। मैंने पूछा आप कौन हैं ?

इस बार फोन कट गया। उसी समय ऑफिस की lights वापस आ गईं। मैंने राहत की सांस ली। लेकिन तभी मेरी नजर reception के सामने लगे CCTV monitor पर पड़ी। उसमें पूरा ऑफिस दिखाई दे रहा था और camera number 6 में एक लड़की खड़ी थी।

सफेद कुर्ते में।

उसके बाल चेहरे के आगे लटक रहे थे। वह बिल्कुल camera की तरफ पीठ करके खड़ी थी। मैंने तुरंत पीछे मुड़कर देखा। वहाँ कोई नहीं था। मैंने फिर monitor देखा। लड़की अब भी वहीं थी। मैंने CCTV के उस camera की live location खोली।

Conference Room.

मैं conference room की तरफ गया। दरवाजा बंद था। मैंने धीरे से खोला।

कमरा खाली था। लेकिन अंदर एक कुर्सी पर लंबे काले बालों का छोटा सा गुच्छा पड़ा था। मैंने उसे हाथ नहीं लगाया। सीधे वापस अपनी desk पर आया और अपना सामान उठाया। उस रात मैंने ऑफिस में दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अगली सुबह रोहित ने जो बताया

अगले दिन मैं ऑफिस पहुंचा तो सबसे पहले रोहित को ढूंढा। मैंने उससे पूछा

कल रात तूने वो मैसेज क्यों किया था ?

वह कुछ सेकंड चुप रहा। फिर बोला

तुझे सच में नहीं पता ?

मैंने कहा

क्या ?

रोहित ने आसपास देखा और धीरे से बोला तीन साल पहले यहाँ एक लड़की काम करती थी। नाम था पूजा। वो भी रात की shift में काम करती थी। मैं चुपचाप सुनता रहा। रोहित ने बताया कि पूजा काफी मेहनती थी और अक्सर सबसे आखिर में ऑफिस से जाती थी।

एक रात वह ऑफिस में अकेली थी। अगली सुबह वह ऑफिस के conference room में मृत मिली। पुलिस आई थी। जांच हुई। लेकिन उसकी मौत को suicide बताया गया। मामला खत्म हो गया। मैंने पूछा

फिर ?

रोहित बोला

फिर लोगों ने रात में उसे देखना शुरू किया।

पहले security guard ने देखा था।

फिर cleaning वाली आंटी ने।

और उसके बाद कई लोगों ने।

मैंने पूछा किस रूप में ?

रोहित ने मेरी तरफ देखा। वही सफेद कपड़े। खुले बाल।

मेरे दिमाग में पिछली रात वाला CCTV घूम गया। मैंने पूछा

Conference room में ?

रोहित ने सिर हिलाया।

वही कमरा।

मैंने उससे पूछा,

लेकिन मुझे क्यों नहीं बताया ?

वह बोला क्योंकि ज्यादातर लोग इसे अफवाह समझते हैं। फिर उसने धीरे से कहा, लेकिन एक बात और है।

मैंने पूछा,

क्या ?

रोहित बोला,

पूजा मरने से पहले एक complaint करना चाहती थी।

किसके खिलाफ ?

रोहित ने जवाब नहीं दिया। बस इतना कहा तू रात में अकेला था न ?

मैंने सिर हिलाया। वह बोला तो आज रात मत रुकना।

वह file

उस दिन मुझे काम करते समय बार-बार पिछली रात की घटना याद आ रही थी। शाम करीब सात बजे सब लोग निकलने लगे। मैं भी निकलने वाला था कि manager ने मुझे बुलाया। अमित वो पुरानी campaign files conference room के कंप्यूटर में हैं। आज रात चाहिए।

मैंने कहा सर, कल सुबह कर दूंगा।

उन्होंने कहा नहीं, client को सुबह चाहिए। बस copy करके ले आओ। मैंने मजबूरी में हां कर दी।

करीब 9:30 बजे ऑफिस लगभग खाली हो गया। मैं conference room में गया। कंप्यूटर ऑन किया। पुरानी files ढूंढते-ढूंढते मुझे एक folder मिला।

नाम था।

POOJA_BACKUP

मेरी उंगलियां keyboard पर रुक गईं। मैंने folder खोल दिया। उसमें कुछ documents थे।एक file का नाम था।

Complaint_Final.doc

मैंने उसे खोला। उसमें लिखा था कि पूजा ऑफिस में किसी व्यक्ति के बारे में शिकायत करने वाली थी। लेकिन complaint पूरी नहीं थी। आखिरी लाइन सिर्फ इतनी थी।

अगर मेरे साथ कुछ होता है तो…..

उसके बाद कुछ नहीं लिखा था। तभी conference room का दरवाजा अपने आप बंद हो गया। मैंने तुरंत पीछे देखा। दरवाजा हिल रहा था। जैसे बाहर से कोई उसे खींच रहा हो। मैंने उठकर handle पकड़ा। दरवाजा नहीं खुला। मैंने जोर लगाया। तभी पीछे से किसी महिला की आवाज आई।

इसे मत पढ़ो।

मैं जम गया। धीरे-धीरे मैंने पीछे देखा।कमरे के कोने में एक लड़की खड़ी थी। सफेद कपड़े। चेहरा बालों से ढका हुआ। मैंने कुछ बोलने की कोशिश की लेकिन आवाज नहीं निकली। वह धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ी। उसके पैर जमीन को छू नहीं रहे थे। मैं पीछे हटता गया। फिर उसने अपना चेहरा ऊपर किया। मैं आज भी उस चेहरे को याद नहीं करना चाहता।

आंखें पूरी काली थीं और चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी।

उसने कहा।

सच बाहर मत जाने देना।

अचानक computer screen बंद हो गई और उसी पल दरवाजा खुल गया। मैं भागकर बाहर आया।

मैंने उस रात घर पहुंचकर किसी को कुछ नहीं बताया। अगले दिन ऑफिस में पुलिस आई हुई थी। मैंने पूछा क्या हुआ ?

एक कर्मचारी ने बताया कि पुराने conference room की ceiling से कुछ सामान गिर गया था। मैंने अंदर जाकर देखा। वही कमरा। वही कंप्यूटर। लेकिन table पर एक चीज रखी थी। एक पुरानी फोटो। उस फोटो में ऑफिस के सभी पुराने कर्मचारी खड़े थे। बीच में पूजा भी थी। मैं फोटो देख ही रहा था कि पीछे से रोहित की आवाज आई।

अमित….

मैंने पलटकर देखा।

उसके हाथ में एक पुरानी file थी। उसने कहा ये देख।

File में पूजा की complaint थी। लेकिन इस बार वह अधूरी नहीं थी। पूरी complaint पढ़कर मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। उसमें उसने जिस व्यक्ति का नाम लिखा था। वह हमारे ऑफिस का वही manager था जिसने मुझे पिछली रात conference room में भेजा था।

मैंने रोहित की तरफ देखा। वह कुछ बोल नहीं रहा था। तभी manager कमरे में आए। उन्होंने हमें देखा और पूछा क्या देख रहे हो ?

रोहित ने file बंद कर दी। मैं बाहर निकलने लगा। तभी conference room के अंदर से एक महिला की धीमी हंसी सुनाई दी।

अब सबको पता चल गया….

Manager वहीं रुक गए। उनका चेहरा सफेद पड़ गया। उन्होंने धीरे से कमरे की तरफ देखा। फिर बिना कुछ बोले वहाँ से चले गए।

उस घटना के कुछ महीने बाद मैंने वह नौकरी छोड़ दी।रोहित ने भी कुछ समय बाद कंपनी बदल ली। मुझे बाद में पता चला कि पूजा की मौत की पुरानी investigation दोबारा खोली गई थी। लेकिन सबसे अजीब बात आज भी मेरे पास मौजूद है। मेरे पुराने फोन में उस रात का एक CCTV screenshot पड़ा हुआ है। मैंने वह screenshot खुद नहीं लिया था।

वह अपने आप मेरे फोन की gallery में आया था। उस तस्वीर में conference room दिखाई देता है। कमरा खाली है। एक कुर्सी बीच में रखी है।और उस कुर्सी के पीछे एक लड़की खड़ी है। सफेद कपड़ों में। चेहरा नीचे झुका हुआ। लेकिन असली डर वाली बात यह नहीं है। उस फोटो के नीचे timestamp लिखा है।

11:47 PM

यानी वही समय जब मैंने reception का फोन उठाया था और उसके ठीक नीचे एक और चीज लिखी थी। मेरे फोन में किसी unknown number से भेजा गया message

अमित, अगली बार जब ऑफिस में कोई अकेला मिले…. उसे अकेला मत छोड़ना।

मैंने उस नंबर पर कई बार call किया। नंबर कभी लगा ही नहीं और शायद सबसे डरावनी बात ये है कि आज भी जब मैं किसी ऑफिस में रात के समय अकेला होता हूं, तो मुझे कभी-कभी वही आवाज सुनाई देती है।

ठक…. ठक…. ठक….

जैसे कोई मेरे पीछे वाले corridor में धीरे-धीरे चल रहा हो। मैं कभी पीछे मुड़कर नहीं देखता। क्योंकि मुझे डर है इस बार शायद वह सिर्फ CCTV में नहीं होगी।

THE END |

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Vishal is the creator behind HorrorStory, a platform dedicated to sharing chilling and mysterious horror stories. He crafts each story with suspense, fear, and unexpected twists to keep readers hooked till the very end. If you enjoy scary and ghost stories, HorrorStory by Vishal is the perfect place for you.

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